दलमा सेंदरा : 12 अप्रैल को खजूर के पत्ते से बना पारंपरिक निमंत्रण पत्र ‘गिरा सकाम’ सेंदरा वीरों को बांटा जायेगा

Updated at : 07 Apr 2024 9:56 PM (IST)
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दलमा सेंदरा : 12 अप्रैल को खजूर के पत्ते से बना पारंपरिक निमंत्रण पत्र ‘गिरा सकाम’ सेंदरा वीरों को बांटा जायेगा

दलमा सेंदरा की तैयारी अंतिम चरण में है.12 अप्रैल को खजूर पत्ते से बना पारंपरिक निमंत्रण पत्र अर्थात गिरा सकाम दिसुआ सेंदरा वीरों को बांटा जायेगा. उस दिन दलमा राजा राकेश हेंब्रम के पैतृक आवास में वन देवी-देवता व ग्राम देवी-देवता का आह्वान भी किया जायेगा.

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जमशेदपुर.

परसुडीह क्षेत्र के गदड़ा में रविवार को दलमा बुरू सेंदरा समिति की एक बैठक दलमा राजा राकेश हेंब्रम की अध्यक्षता में हुई. इसमें दिसुआ लोगों ने सेंदरा की तारीख, सेंदरा वीरों को निमंत्रण, वन विभाग व प्रशासन के लोगों के साथ तालमेल, पूजा-पाठ की तैयारी समेत अन्य बिंदुओं पर विचार किया. राकेश हेंब्रम ने कहा कि सेंदरा तारीख तय हो चुकी है, लेकिन इसकी विधिवत सार्वजनिक घोषणा 12 अप्रैल को खजूर के पत्ते से बने निमंत्रण पत्र को दिसुआ सेंदरा वीरों को देकर की जायेगी. उस दिन गदड़ा स्थित उनके आवास पर पूजा-अर्चना कर वन व ग्राम देवी-देवताओं का आह्वान किया जायेगा. उन्हें तय शिकार पर्व की तारीख से अवगत कराया जायेगा तथा सेंदरा पर्व मनाने की अनुमति मांगी जायेगी. उनकी सहमति से उसी दिन विभिन्न जगहों से आये सेंदरा वीरों को खजूर के पत्ते से बना पारंपरिक सेंदरा निमंत्रण पत्र-गिरा सकाम वितरित किया जायेगा. बैठक में लखींद्र कुंकल, संपूर्ण सांवैया, उदय हेंब्रम, राजेश सामंत, सुकरा बारजो, जेना जामुदा, धानो मार्डी, जीरा पूर्ति, जेमा सामद, दिकू मेलगांडी, बाल्ही मार्डी, छोटे सरदार, शंकर गागराई, सुकलाल सामद, कृष्णा देवगम, कृष्णा बारदा समेत आदिवासी संताल, मुंडा, भूमिज व हो के अलावा अन्य जनजातीय समाज के स्वशासन व्यवस्था के प्रमुख परगना, माझी बाबा, प्रधान, बुद्धिजीवी, शिक्षाविद व ग्रामवासी शामिल हुए.

सेंदरा वीरों को बेवजह परेशान नहीं करने की अपील

राकेश हेंब्रम ने कहा कि सेंदरा समिति वन विभाग व जिला प्रशासन के पदाधिकारियों से अपील करता है कि सेंदरा पर्व के दिन सेंदरा वीरों को बेवजह परेशान न किया जाये. सेंदरा वीर अपने पारंपरिक हथियार तीर-धनुष के साथ इसलिए आते हैं कि उन्हें अपने पूर्वजों के बनाये नीति-नियम व परंपरा का निर्वहन करना है. जंगल के जीवों का शिकार करना उनकी प्राथमिकता नहीं है. सेंदरा समिति भी चाहती है कि जंगल के पशुओं का शिकार न के बराबर हो. लेकिन सेंदरा परंपरा का निर्वहन हर हाल में हो, क्योंकि सेंदरा पर्व के दौरान वन-देवी देवताओं से अच्छी बारिश व अच्छे फसल की प्राप्ति के लिए भी पूजा-अर्चना होती है.

चेकनाका में महिला सदस्य भी रहेंगी मौजूद

सेंदरा परंपरा को बचाने के लिए महिलाओं ने भी बीड़ा उठाया है. रविवार को हुई सेंदरा समिति की बैठक में महिलाओं ने कहा कि जिले के विभिन्न चेकनाका में महिलाओं के समूह को भी तैनात किया जायेगा. वे चेकनाका में वन विभाग व प्रशासन की गतिविधियों की मॉनिटरिंग करेंगी. यहां देखेंगी कि कहीं किसी सेंदरा वीर को चेकनाका में रोककर बेवजह परेशान तो नहीं किया जा रहा है. हालांकि महिलाएं सेंदरा पर्व में शामिल नहीं होंगी.

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