12 साल बाद भी हत्याकांड का राज नहीं खुला

Updated at : 05 Mar 2019 1:58 AM (IST)
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12 साल बाद भी हत्याकांड का राज नहीं खुला

मुख्य शूटर रंजीत पाल उर्फ राहुल बंगाल में कर चुका हैं सरेंडर गालूडीह : चार मार्च 2007 को बाघुड़िया की मिट्टी सांसद सुनील महतो समेत चार के खून से लाल हो गयी थी. होली की शाम थी. देश रंग में सराबोर हो रहा था और बाघुड़िया में नक्सली खून की होली खेल रहे थे. घटना […]

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मुख्य शूटर रंजीत पाल उर्फ राहुल बंगाल में कर चुका हैं सरेंडर

गालूडीह : चार मार्च 2007 को बाघुड़िया की मिट्टी सांसद सुनील महतो समेत चार के खून से लाल हो गयी थी. होली की शाम थी. देश रंग में सराबोर हो रहा था और बाघुड़िया में नक्सली खून की होली खेल रहे थे. घटना के 12 साल बीत गये, लेकिन सांसद हत्याकांड का राज नहीं खुला. सांसद सुनील महतो की हत्या करने वाले मुख्य शूटर हार्डकोर नक्सली रंजीत पाल उर्फ राहुल ने 25 जनवरी 2017 को कोलकाता पुलिस मुख्यालय में हथियार के साथ सरेंडर कर दिया था.

बंगाल सरकार उसे पुलिस सेफ हाउस में रखी है. झारखंड पुलिस तब उसे झारखंड लाने के लिए काफी प्रयास किया. परंतु सफल नहीं हुई. सांसद हत्याकांड का मामला घटना के 15 दिनों तक पुलिस के हाथों में था. इस मामले को सीबीआइ ने लिया. राज अब भी दफन है. सांसद को नक्सलियों ने मारा यह तो जग जाहिर है.

नक्सलियों के कई बड़े नेताओं ने घटना के बाद पंपलेट, प्रेस विज्ञप्ति जारी कर हत्या करने बात स्वीकारी थी. तब नक्सलियों ने हत्या का कारण नागरिक सुरक्षा समिति के पोषक बनना बताया था. नागरिक सुरक्षा समिति पुलिस द्वारा तैयार एक कमेटी थी. जो नक्सल के खिलाफ अभियान चलाती है. पर अहम सवाल है कि सांसद सुनील महतो हत्याकांड के बीच कोई राजनीतिक साजिश थी या नहीं. इसका आज तक खुला नहीं हो पाया.

कई निर्दोष जेल गये और मुख्य शूटर राहुल को मिला इनाम : सांसद हत्याकांड के बाद बाघुड़िया पंचायत ही नहीं अन्य कई बीहड़ों गांवों में पुलिस ने महीनों ऑपरेशन चलाया था. सुधीर सोरेन, उत्तम मंडल, सुबोध सिंह, सुनाराम सोरेन, रामचंद्र सिंह, फूलचांद टुडू, सुनील सिंह, कृष्णा सिंह सरदार, निर्मल सिंह, राजेन महतो समेत कई जेल गये थे. हाइकोर्ट से जमानत मिली थी. कई आरोपी सीबीआइ कोर्ट से रिहा हो चुके हैं. केस लड़ने में घर का सारा सामान बिक गया.

बाघुड़िया के उत्पल पातर रेडियो में उद्घोषक थे. उसकी नौकरी चली गयी. विडंबना है कि सांसद हत्या कांड के मुख्य शूटर नक्सली रंजीत पाल उर्फ राहुल 25 जनवरी को कोलकाता पुलिस मुख्यालय में अपनी नक्सली पत्नी झरना के साथ सरेंडर कर दिया. बंगाल सरकार ने उस पर जारी इमान की राशि उसे दी. जेल नहीं भेज कर पुलिस सेफ हाउस में रखा. उसे होम गार्ड की नौकरी भी दी गयी. निर्दोष होते हुए जिन्हें जेल जाना पड़ा उक्त ग्रामीण कहते हैं कि मुझे सजा मिली और दोषी को इनाम. यह कैसा इंसाफ है. हम लोगों का मुआवजा मिलना चाहिए.

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