तीन और ग्रामीण डायरिया की चपेट में, नर्सिंग होम में भर्ती

Updated at : 29 Aug 2018 4:37 AM (IST)
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तीन और ग्रामीण डायरिया की चपेट में, नर्सिंग होम में भर्ती

मुसाबनी के शिव मंदिर टोला के ग्रामीण दहशत में घाटशिला : सुवर्णरेखा नर्सिंग होम में सात पीड़ितों का हो रहा इलाज अन्य नर्सिंग होम में इलाज करा रहे डायरिया पीड़ित मुसाबनी : मुसाबनी के शिव मंदिर पाड़ा के डायरिया पीड़ितों को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास नहीं रह गया है. अब ग्रामीण नर्सिंग होम में […]

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मुसाबनी के शिव मंदिर टोला के ग्रामीण दहशत में

घाटशिला : सुवर्णरेखा नर्सिंग होम में सात पीड़ितों का हो रहा इलाज
अन्य नर्सिंग होम में इलाज करा रहे डायरिया पीड़ित
मुसाबनी : मुसाबनी के शिव मंदिर पाड़ा के डायरिया पीड़ितों को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास नहीं रह गया है. अब ग्रामीण नर्सिंग होम में इलाज कराने को विवश हैं. 27 अगस्त (सोमवार) की रात तीन ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ गयी. उन्हें परिजनों ने घाटशिला के सुवर्णरेखा नर्सिंग होम में भर्ती कराया. इनमें सुधीर नायक (65), पत्नी लोबा नायक (55) और सुभाष नायक (50) शामिल हैं. वहीं वृंदावन नायक (50), शिव चरण नायक (32), मनोरमा नायक (60) को एमजीएम अस्पताल में 25 अगस्त की रात भरती कराया गया था. सबीता थायाल (20) के परिजनों ने एमजीएम से वापस लाकर 26 अगस्त की रात सुवर्णरेखा नर्सिंग में भरती कराया है. शोभा नायक (35) का यहां इलाज जारी है.
समय पर इलाज होता तो मेरी मां जीवित होती : राजेश : ग्रामीणों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग डायरिया रोकने व पीड़ितों का सही से इलाज करने में विफल है. ग्रामीणों ने कहा कि अब हमें एंबुलेंस की सायरन से दहशत होने लगा है. डायरिया पीड़ितों के परिवार वालों ने कहा कि एमजीएम अस्पताल में यदि समय पर कारगर इलाज होता, तो अंजना नायक को बचाया जा सकता था. मृतका का पुत्र राजेश नायक चेन्नई में डिप्लोमा की पढ़ाई कर रहा है. मां की मौत की खबर सुनकर घर पहुंचा है. राजेश नायक ने कहा कि डायरिया जैसी साधारण बीमारी से मां की मौत ने प्रखंड की सरकारी चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोल दी है. यदि उसकी मां को समय पर इलाज होता तो वह जिंदा होती.
व्यवस्था के खिलाफ युवाओं में आक्रोश : टोला के युवक डायरिया के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के दौरे व आश्वासनों को लेकर आक्रोशित दिखे. युवाओं ने कहा कि गांव में डायरिया से लोग आक्रांत हो रहे हैं. सरकारी चिकित्सा व्यवस्था केवल कैंप लगा कर ड्यूटी निभा रहे हैं. एंबुलेंस से डायरिया पीड़ितों को सीएचसी इलाज के लिए ले जाया जा रहा है. यहां से एमजीएम रेफर कर दिया जा रहा है. एमजीएम में उचित इलाज की व्यवस्था नहीं मिलने से अंजना नायक की मौत हो गयी.
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