एक सप्ताह में दोनों पक्षों को दस्तावेज पेश करने का आदेश

Updated at : 10 May 2018 5:18 AM (IST)
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एक सप्ताह में दोनों पक्षों को दस्तावेज पेश करने का आदेश

वर्ष 1982 में महिला कॉलेज के साथ जुड़ा था ट्रस्ट, 1986 में समाप्त 15 वर्षों के बाद राज्यपाल से ट्रस्टियों ने की शिकायत, जांच हुई घाटशिला : घाटशिला के बलदेवदास संतलाल महिला कॉलेज का बुधवार को कोल्हान विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय टीम ने जांच की. कमेटी के चेयरमैन सह कोल्हान विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ […]

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वर्ष 1982 में महिला कॉलेज के साथ जुड़ा था ट्रस्ट, 1986 में समाप्त

15 वर्षों के बाद राज्यपाल से ट्रस्टियों ने की शिकायत, जांच हुई
घाटशिला : घाटशिला के बलदेवदास संतलाल महिला कॉलेज का बुधवार को कोल्हान विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय टीम ने जांच की. कमेटी के चेयरमैन सह कोल्हान विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ रणजीत कुमार सिंह के नेतृत्व में आधा घंटा तक कॉलेज के दस्तावेजों की जांच की. टीम ने निरीक्षण में पाया कि वर्ष 1982 में ट्रस्ट का नाम कॉलेज से जुड़ा था. ऐसे में किन कारणों से वर्ष 2009 में ट्रस्ट को हटाया गया. जांच टीम में शामिल केयू के कुलानुशासक सह प्रवक्ता डॉ एके झा ने दोनों पक्षों को एक सप्ताह में दस्तावेज प्रस्तुत करने का आदेश दिया. इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी. कुलानुशासक डॉ एके झा ने बताया कि वर्ष 2002 में रांची विश्वविद्यालय था.
कोल्हान विश्वविद्यालय बनने के पूर्व वर्ष 2009 में बीडीएसएल महिला कॉलेज की शासी निकाय ने बैठक कर सर्वसम्मति से कॉलेज से ट्रस्ट को हटाने का निर्णय लिया. मामला रांची विश्वविद्यालय के सिंडिकेट में गया. सिंडिकेट ने पारित कर मामले को एचआरडी में भेजा. एचआरडी ने इस मामले में सहमति जतायी. वर्ष 2009 तक कोल्हान विश्वविद्यालय बनने के पूर्व कॉलेज से ट्रस्ट को हटाया गया. इसी बीच 15 साल बाद ट्रस्ट के कुछ सदस्यों (शिव रतन अग्रवाल और सुशील बसंल शामिल हैं) ने झारखंड की राज्यपाल को पत्र लिख कर मामले की जांच की मांग की. राज्यपाल को दिये गये पत्र के आलोक में कोल्हान विश्वविद्यालय ने जांच कमेटी बनायी.
चार साल बाद हटाया गया ट्रस्ट : जांच में यह बातें सामने आयी कि कॉलेज की जमीन का दाता कौन है. जमीन किसके नाम से है. इंटरमीडिएट भवन की भूमि किसके नाम से है. कुलानुशासक ने बताया कि जब कॉलेज में ट्रस्ट वर्ष 1982 से जुड़ा था.
आखिर चार साल बाद ट्रस्ट को क्यों हटाया गया. 1986 के बाद ट्रस्ट का ध्यान कॉलेज पर नहीं था. जांच में सीसीडीसी डॉ एके मिश्रा, डिग्री कॉलेज की प्रभारी प्राचार्या डॉ पुष्कर बाला, शिव रनत अग्रवाल, अशोक सिन्हा उपस्थित थे.
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