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जिन्होंने संस्कृति छोड़ी, उसने जनजाति की पहचान छोड़ दी, अब हमारा आरक्षण भी छोड़ दें : डॉ राजकिशोर

Updated at : 30 Nov 2023 8:23 PM (IST)
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जिन्होंने संस्कृति छोड़ी, उसने जनजाति की पहचान छोड़ दी, अब हमारा आरक्षण भी छोड़ दें : डॉ राजकिशोर

डॉ राजकिशोर ने कहा कि देश भर में मंच इस अहम विषय को लेकर वर्ष 2006 से लगातार आंदोलन कर रहा है. यह मंच अब तक 221 जिलों में जिलास्तरीय रैली एवं 14 राज्यों में प्रांतीय स्तर की रैली का आयोजन कर चुका है. इन रैलियों में लगभग 60 हजार गांवों में संपर्क अभियान चलाया गया.

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दुमका, आनंद जायसवाल : जिन लोगों ने अपनी संस्कृति छोड़ दी है, उसने जनजाति की पहचान भी छोड़ दी है. इसलिए अब वे हमारा आरक्षण भी छोड़ दें. यह कहना है जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ राजकिशोर हांसदा का. उन्होंने कहा कि धर्मांतरण करने वालों अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची से हटाए जाने की मांग अब और तेज होकी. इसी मुद्दे पर जनजाति सुरक्षा मंच ने उपराजधानी दुमका व राजधानी रांची में डी-लिस्टिंग महारैली आयोजित करने का ऐलान कर दिया गया है. प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ राजकिशोर हांसदा ने बताया कि अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण, संरक्षण एवं विकास के फंड से संबंधित संवैधानिक अधिकार वे लोग छीन रहे हैं, जो इसके पात्र नहीं हैं. जो मानक पर खरे नहीं उतरते. ऐसे धर्मांतरित लोगों की संख्या कुल जनजातियों की 10 फीसद से भी कम है, लेकिन ये लोग 70 प्रतिशत के अधिकार हड़प रहे हैं. इस बड़े अन्याय के विरुद्ध जनजाति समाज ने आंदोलन खड़ा किया है.

10 लाख लोगों तक पहुंचा जनजाति सुरक्षा मंच

डॉ राजकिशोर ने कहा कि देश भर में मंच इस अहम विषय को लेकर वर्ष 2006 से लगातार आंदोलन कर रहा है. यह मंच अब तक 221 जिलों में जिलास्तरीय रैली एवं 14 राज्यों में प्रांतीय स्तर की रैली का आयोजन कर चुका है. इन रैलियों में लगभग 60 हजार गांवों में संपर्क अभियान चलाया गया. 10 लाख से अधिक लोगों की इसमें भागीदारी हुई. डॉ हांसदा ने कहा कि ऐसी ही रैली दुमका में 16 दिसंबर को व राजधानी रांची में 24 दिसंबर होने वाली है. कुछ अन्य राज्यों में भी प्रांतस्तरीय रैलियां होंगी. डॉ हांसदा ने बताया कि दुमका में होनेवाली महारैली में संताल परगना के छह जिलों के अलावा पश्चिम बंगाल के बीरभूम, बिहार के बांका, झारखंड के धनबाद, गिरिडीह जैसे जिले के 20 हजार से अधिक लोग इसमें शामिल होंगे. इस महारैली में मंच के राष्ट्रीय संरक्षक पद्मभूषण से सम्मानित करिया मुंडा बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे.

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धर्मांतरण करने वालों की हो डी-लिस्टिंग

डॉ राजकिशोर ने कहा कि पुरखों की संस्कृति ही हमारे हक का संवैधानिक आधार है. हमारा मानना है कि जिन्होंने संस्कृति छोड़ दी, उन्होंने जनजाति की पहचान छोड़ दी. इसलिए अब वे हमारा आरक्षण भी छोड़ दें. उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति की भांति अनुसूचित जनजाति से ईसाई और इस्लाम में धर्मांतरित सदस्यों की डी-लिस्टिंग होनी चाहिए, क्योंकि वे लोग कानूनन अल्पसंख्यक हो गए हैं. उन्होंने कहा कि यदि जनजातीय समाज की कोई महिला किसी दूसरे धर्म के पुरुष से शादी कर लेती है, तो उस महिला को जनजातीय समाज का जाति प्रमाण पत्र भी नहीं दिया जाना चाहिए.

पांच दशक से संसद में लंबित है डी-लिस्टिंग बिल

डॉ राजकिशोर ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि डॉ कार्तिक उरांव ने पांच दशक पहले इस विषय पर पहल की थी. वर्ष 1970 में उन्होंने डी-लिस्टिंग बिल को संसद में लाने की पहल की थी. उसके बाद से ही यह बिल अब तक लंबित है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला संयोजक माईकल मुर्मू व कार्यक्रम के सह संयोजक संतोष पुजहर मौजूद थे.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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