जब बढ़ता है अधर्म, भगवान लेते हैं अवतार : अमृता त्रिपाठी

Published by :RAKESH KUMAR
Published at :13 Apr 2026 11:11 PM (IST)
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जब बढ़ता है अधर्म, भगवान लेते हैं अवतार : अमृता त्रिपाठी

कथा श्रवण के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी. क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा रहा. कथा के दौरान उन्होंने बताया कि सृष्टि की रचना परमात्मा से हुई है.

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काठीकुंड. काठीकुंड बाजार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचिका अमृता त्रिपाठी ने भगवान के अवतार के कारणों पर विस्तार से प्रकाश डाला. कथा श्रवण के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी. क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा रहा. कथा के दौरान उन्होंने बताया कि सृष्टि की रचना परमात्मा से हुई है. प्रारंभ में केवल परम तत्व ही विद्यमान थे, जिनसे माया (प्रकृति) और जीव की उत्पत्ति हुई. तीन गुण—सत्व, रज और तम—के प्रभाव से संपूर्ण ब्रह्मांड संचालित होता है. पंच तत्वों से इस सृष्टि का विस्तार हुआ. भगवान के अवतार के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भगवान का जन्म साधारण मनुष्य की तरह नहीं होता, बल्कि वे धर्म की रक्षा, अधर्म के नाश और भक्तों के कल्याण के लिए समय-समय पर अवतार लेते है. भगवान का अवतार दिव्य लीला है, जो मानव जीवन को सही दिशा देने का कार्य करता है. कथावाचिका ने सत्संग की महत्ता बताते हुए कहा कि कथा श्रवण से मन शुद्ध होता है. जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है.

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