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डाॅक्टरों ने इलाज के लिए वेल्लोर ले जाने की दी थी सलाह और वीरेंद्र बेटे के इलाज कराने में नहीं था सक्षम

Updated at : 23 Nov 2025 10:51 PM (IST)
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डाॅक्टरों ने इलाज के लिए वेल्लोर ले जाने की दी थी सलाह और वीरेंद्र बेटे के इलाज कराने में नहीं था सक्षम

दंपती को एक बेटी और एक पुत्र हुए. परिवार शांतिपूर्ण तरीके से जीवन बिता रहा था, लेकिन इसी बीच दो वर्षीय पुत्र विराज को हर्ट की गंभीर बीमारी हो गयी.

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एक ही परिवार के चार लोगों की मौत से गांव में पसरा सन्नाटा पति-पत्नी में होता था विवाद, पत्नी रुठकर चली गयी थी मायके नवान्न के बहाने पालोजोरी से पति विदा कराकर ले आया था घर हंसडीहा/दुमका. करीब छह वर्ष पूर्व बरदेही निवासी बीरेंद्र मांझी की शादी पालाेजोरी (देवघर) निवासी आरती देवी से हिंदू रीति-रिवाज के साथ हुई थी. दंपती को एक बेटी और एक पुत्र हुए. परिवार शांतिपूर्ण तरीके से जीवन बिता रहा था, लेकिन इसी बीच दो वर्षीय पुत्र विराज को हर्ट की गंभीर बीमारी हो गयी. स्थानीय स्तर पर इलाज के बाद चिकित्सकों ने जवाब दे दिया. बच्चे को वेल्लोर ले जाने की सलाह दी. बीरेंद्र मजदूरी कर घर-परिवार चलाता था. वेल्लोर ले जाकर इलाज कराने में सक्षम नहीं था. इसी आर्थिक तंगी से पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ने लगा. स्थिति इतनी बिगड़ गयी कि छह माह पूर्व आरती दो बच्चों को लेकर अपने मायके पालाेजोरी चली गयी. शनिवार को बीरेंद्र अपनी ससुराल पहुंचा और नवान्न पर्व की बात कहते हुए पत्नी-बच्चों को घर ले जाने की इच्छा जतायी. आरती के घरवाले पहले तैयार नहीं हुए, लेकिन बीरेंद्र ने फोन पर अपनी मां से उनकी बात करायी. अच्छे से रखने का भरोसा दिया, तब जाकर आरती और बच्चों को विदा किया गया. विदाई के समय बच्चों की नानी ने उन्हें गर्म कपड़े खरीदकर दिए. शनिवार की रात आरती ने खाना खाने के बाद अपनी भाभी से फोन पर बात की. बातचीत के दौरान दोनों बच्चों ने भी अपनी मामी से बात की. आरती ने फोन काटते समय कहा कि अब सब लोग सोने जा रहे हैं. पर किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह उनका आखिरी संवाद होगा. रात में तीनों आरती और दोनों मासूम बच्चों की सोते वक्त ही निर्मम हत्या कर दी गयी. बीरेंद्र के पिता ने कहा : रात में पति-पत्नी के बीच हुआ था विवाद बीरेंद्र के पिता मनोज मांझी के अनुसार रात में पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था. सुबह जब वे जागे तो आरती और दोनों बच्चों के शव घर के अंदर पड़े थे, जबकि बीरेंद्र का शव घर के बाहर नीम के पेड़ से लटका मिला. उन्होंने बताया कि आनन-फानन में बेटे के शव को पेड़ से उतारा, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी. इसके बाद शव को पास के खेत में रखकर उन्होंने ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी. परिजनों की चीत्कार से गूंज उठा गांव, नवान्न पर भी नहीं जले चूल्हे एक ही परिवार के चार लोगों की दर्दनाक मौत की खबर पूरे इलाके में आग की तरह फैल गयी. गांव में बड़ी संख्या में लोग जुट गये. नवान्न पर्व होने के बावजूद किसी भी घर में चूल्हा तक नहीं जला. आरती और बीरेंद्र दोनों के परिवार की चीख-पुकार से गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAKESH KUMAR

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