सरना धर्म कोड व ओलचिकी में संताली को राजभाषा का मिले दर्जा

Updated at : 09 Mar 2025 7:36 PM (IST)
विज्ञापन
सरना धर्म कोड व ओलचिकी में संताली को राजभाषा का मिले दर्जा

दिवासी सेंगेल अभियान का जिला स्तरीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण आउटडोर स्टेडियम में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सुनील मुर्मू व संचालन दुमका जोनल हेड बार्नाड हांसदा ने किया. शिविर में प्रदेश अध्यक्ष देवनारायण मुर्मू ने कहा कि आज आदिवासी समाज मरने के कगार पर खड़ा है. हासा-भाषा, जाति-धर्म, नौकरी- इज्जत व आबादी आदि लूटे जा रहे हैं. मिटायी जा रही है, जिसको बचाना जरूरी है.

विज्ञापन

आदिवासी सेंगेल अभियान के जिलास्तरीय प्रशिक्षण शिविर में बोले प्रदेश अध्यक्ष संवाददाता, दुमका आदिवासी सेंगेल अभियान का जिला स्तरीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण आउटडोर स्टेडियम में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सुनील मुर्मू व संचालन दुमका जोनल हेड बार्नाड हांसदा ने किया. शिविर में प्रदेश अध्यक्ष देवनारायण मुर्मू ने कहा कि आज आदिवासी समाज मरने के कगार पर खड़ा है. हासा-भाषा, जाति-धर्म, नौकरी- इज्जत व आबादी आदि लूटे जा रहे हैं. मिटायी जा रही है, जिसको बचाना जरूरी है. इसे बचाने के लिए आदिवासी सेंगेल अभियान ही एकमात्र विकल्प है. कहा कि अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद सालखन मुर्मू के नेतृत्व में ही अबतक सीएनटी-एसपीटी कानून को बचाया गया है. सबसे बड़ी आदिवासी भाषा संताली को इन्होंने आठवीं अनुसूची में शामिल कराया है. पेसा कानून के तहत पंचायत चुनाव कराया है. संगठन की मांग भारत में रहनेवाले लगभग 15 करोड़ आदिवासियों के लिए सरना धर्म कोड, राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त संताली भाषा को ओलचिकी लिपि से झारखंड में हर हाल में प्रथम राजभाषा बनाने, राज्य में झारखंडी स्थानीय नीति प्रखंड वार नियोजन नीति की लड़ाई जारी है. कहा कि वीर शहीद सिदो मुर्मू और बिरसा मुंडा के सपने आबुआ दिशुम रे अबुआ राज को इन्हीं के द्वारा स्थापित किया जा सकता है. हुगली जोनल हेड सह केन्द्रीय संयोजक लखीनारायण किस्कू ने कहा कि आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व संसाद सालखन मुर्मू के संदेश को गांव – गांव तक पहुंचाने के लिए संगठन को सशक्त करें. आदिवासी समाज में व्याप्त अंधविश्वास, नशापान आदि को समाप्त करने तथा समाजिक एकता स्थापित करने पर बल दिया. जबकि मालदा जोनल हेड मोहन हांसदा ने कहा कि आज सिदो मुर्मू के ही दिसोम संताल परगना में ही आदिवासी अस्तित्व ज्यादा खतरे में है, अन्य प्रदेशों का क्या हाल होगा, समझा जा सकता है. बैठक को जोनल परगना बरियार हेंब्रम ने भी संबोधित किया. मौके पर संताल परगना अध्यक्ष कमिश्नर मुर्मू ,दुमका से निर्मला सोरेन, रानीश्वर से बहादुर मुर्मू, राजकिशोर हांसदा, विमल हेंब्रम, परमेश्वर हेंब्रम, दिनेश मोहली, मसलिया से गुनदान सोरेन, रुबीन टुडू, रमेश टुडू, रंजीत सोरेन, नंदलाल हेंब्रम, मनोज हांसदा, सकेंद्र हेंब्रम आदि उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola