ईरान-इजरायल जंग: ट्रंप ने 100 साल पुराना कानून बदला, क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

Updated at : 19 Mar 2026 1:45 PM (IST)
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Trump Jones Act Waiver

तस्वीर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.

Trump Jones Act Waiver: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने 100 साल पुराने 'जोंस एक्ट' को सस्पेंड कर करके एक बड़ा कदम उठाया है. तेल की किल्लत दूर करने के लिए अब विदेशी जहाज अमेरिकी पोर्ट्स पर सामान पहुंचा सकेंगे.

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Trump Jones Act Waiver: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 100 साल पुराने ‘जोंस एक्ट’ (मर्चेंट मरीन एक्ट 1920) को 60 दिनों के लिए हटा दिया है. ‘जोंस एक्ट’ (जोंस एक्ट अमेरिका का अपना घरेलू कानून है) कानून वर्ल्ड वार फर्स्ट के बाद बनाया गया था ताकि अमेरिकी समुद्री व्यापार पर सिर्फ अमेरिका का हक रहे. इस कानून के तहत अमेरिका के एक पोर्ट से दूसरे पोर्ट तक सामान ले जाने वाले जहाज का अमेरिका में बना होना, अमेरिकी नागरिक की ओनरशिप होना और उसमें अमेरिकी क्रू का होना जरूरी था. लेकिन अब ईरान और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसे कंट्रोल करने के लिए ट्रंप ने विदेशी जहाजों को भी सामान ढोने की इजाजत दे दी है.

मिडिल ईस्ट संकट और स्ट्रैट ऑफ होर्मुज का असर

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार, पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे हमलों ने ग्लोबल सप्लाई चेन बिगाड़ दी है. दुनिया का 20% तेल और गैस ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ से गुजरता है, जिसे ईरान ने रोक दिया है. इससे दुनिया भर में हर दिन 70 लाख से 100 लाख बैरल तेल की कमी हो सकती है. अमेरिका में भी पिछले कुछ हफ्तों में पेट्रोल-डीजल के दाम 25% तक बढ़ गए हैं. इसी संकट से निपटने के लिए ट्रंप ने 60 दिनों की छूट दी है ताकि तेल, नेचुरल गैस और फर्टिलाइजर जैसे जरूरी सामान की सप्लाई तेजी से हो सके. जिससे कि अमेरिका के अंदर तेल और जरूरी सामान की सप्लाई को आसान बनाना ताकि वहां पेट्रोल-डीजल के दाम कम हो सकें.

अगले 60 दिनों तक क्या-क्या बदलेगा?

इस छूट के बाद अब विदेशी झंडे वाले जहाज भी अमेरिकी बंदरगाहों के बीच कच्चा तेल, पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल और खेती के लिए जरूरी खाद (फर्टिलाइजर) ले जा सकेंगे. इससे ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम होगा और लॉजिस्टिक्स में आसानी होगी. खासकर खाड़ी देशों के रिफाइनरी से ईस्ट और वेस्ट कोस्ट तक तेल पहुंचाना आसान हो जाएगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे मार्केट में तेल की कमी दूर होगी, हालांकि पेट्रोल की कीमतें पूरी तरह कम होंगी या नहीं, यह ग्लोबल मार्केट पर निर्भर करेगा.

वेनेजुएला से तेल और स्ट्रैटेजिक रिजर्व का इस्तेमाल

ट्रंप प्रशासन ने सिर्फ जोंस एक्ट ही नहीं बदला, बल्कि वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों में भी ढील दी है. अब अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA से बिजनेस कर सकेंगी. हालांकि, इसके लिए कड़ी शर्तें रखी गई हैं जैसे कि पेमेंट सीधे वेनेजुएला को नहीं बल्कि अमेरिकी कंट्रोल वाले अकाउंट में होगा. साथ ही रूस, ईरान, नॉर्थ कोरिया और चीन के साथ किसी भी तरह की डील पर पाबंदी रहेगी. इसके अलावा, ट्रंप ने अमेरिका के इमरजेंसी तेल भंडार (SPR) से 17.2 करोड़ बैरल तेल निकालने का भी फैसला लिया है.

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ग्लोबल मार्केट का हाल

एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के आंकड़ों के मुताबिक, 13 मार्च को खत्म हुए हफ्ते में अमेरिका का कच्चा तेल भंडार 62 लाख बैरल बढ़कर 44.93 करोड़ बैरल पहुंच गया है. वहीं, इराक ने भी तुर्की के रास्ते रोजाना 2.50 लाख बैरल तेल एक्सपोर्ट करने का समझौता किया है. लिबिया ने भी अपने बंद पड़े ऑयल फील्ड्स से सप्लाई फिर शुरू करने की कोशिश की है. इन तमाम कोशिशों के बावजूद स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के बंद होने से बाजार में अभी भी काफी अनिश्चितता बनी हुई है.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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