इजरायल ने ईरान के 'गैस खजाने' साउथ पार्स पर बरसाए बम, भारत की क्यों बढ़ी टेंशन?

Updated at : 19 Mar 2026 1:05 PM (IST)
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Iran South Pars Gas Field

एआई के द्वारा बनाया गया ईरान के साउथ पार्स का इमेज.

Israel Iran South Pars Gas Field: मिडिल ईस्ट की जंग अब एनर्जी वॉर में बदल गई है. इजरायल के 'साउथ पार्स' अटैक के बाद ईरान ने कतर की गैस यूनिट्स पर मिसाइलें दाग दी हैं. इस टकराव से दुनिया भर में तेल-गैस की किल्लत और महंगाई का खतरा मंडरा रहा है, जिससे भारत की सप्लाई चेन भी सीधे रडार पर है.

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Israel Iran South Pars Gas Field: बुधवार (18 मार्च 2026) को मिडिल ईस्ट में तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब इजरायल ने ईरान के सबसे बड़े गैस फील्ड ‘साउथ पार्स’ पर सीधा हमला बोल दिया. यह हमला उस बड़े संकट के बीच हुआ है जो फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल के एक ज्वाइंट ऑपरेशन के बाद शुरू हुआ था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. साउथ पार्स दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड है और ईरान की बिजली और घरेलू ऊर्जा का सबसे मुख्य जरिया है.

ट्रंप का बयान: ‘हमें इस हमले की खबर नहीं थी’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले पर हैरानी जताते हुए ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि अमेरिका को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. ट्रंप ने साफ किया कि इस हमले में कतर का भी कोई हाथ नहीं है. हालांकि, एपी की रिपोर्ट्स के मुताबिक वॉशिंगटन को इजरायल के इस प्लान के बारे में पहले से पता था, लेकिन अमेरिका ने इस ऑपरेशन में हिस्सा नहीं लिया. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने फिर से कतर की गैस फैसिलिटीज पर हमला किया, तो अमेरिका साउथ पार्स को पूरी तरह तबाह कर देगा.

साउथ पार्स क्यों है ईरान की जान?

साउथ पार्स गैस फील्ड करीब 9,700 स्क्वायर किलोमीटर में फैला हुआ है. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के मुताबिक, इसमें 51 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर गैस का भंडार है. ईरान की कुल गैस सप्लाई का 70% हिस्सा यहीं से आता है. शुरुआती रिपोर्ट्स कहती हैं कि इजरायली हमले से इसके 12% प्रोडक्शन पर असर पड़ा है. इस हमले के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Brent crude) की कीमतें 5% उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं.

ईरान का पलटवार: कतर के गैस प्लांट ‘रास लफान’ पर मिसाइलें दागी

इजरायल के हमले के जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है. ईरान ने सऊदी अरब, UAE और कतर के तेल-गैस ठिकानों को टारगेट करने की धमकी दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक रियाद में धमाके सुने गए हैं. इससे पहले मंगलवार को ईरान के ड्रोन हमले की वजह से अबू धाबी के ‘शाह गैस फील्ड’ में काम रोकना पड़ा था. यह फील्ड UAE की 20% गैस की जरूरत पूरी करता है. वहीं ईरान ने कतर की ‘रास लफान’ इंडस्ट्रियल सिटी और ‘पर्ल GTL’ फैसिलिटी पर मिसाइलें दागी हैं, जिससे वहां भारी नुकसान हुआ है.

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भारत के लिए क्यों है यह बुरी खबर?

मिडिल ईस्ट की यह जंग भारत और पाकिस्तान के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है. भारत अपनी जरूरत की 53% गैस कतर और UAE जैसे देशों से मंगाता है. वहीं पाकिस्तान की 99% LNG सप्लाई इन्हीं देशों पर टिकी है. कतर की गैस फैसिलिटीज पर ईरानी मिसाइल हमलों के बाद भारत की एनर्जी सप्लाई चेन टूटने का डर बढ़ गया है. अगर ये सप्लाई रुकी, तो भारत में गैस और बिजली महंगी हो सकती है.

रिपेयरिंग में लग सकते हैं कई साल

एक्सपर्ट्स का कहना है कि गैस फील्ड्स को हुए नुकसान की भरपाई तुरंत मुमकिन नहीं है. साल 2003 के इराक युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि 2 अरब डॉलर खर्च करने के बाद भी वहां प्रोडक्शन को नॉर्मल होने में 2 साल लग गए थे. यूक्रेन के बिजली घरों पर हुए हमलों के बाद भी वहां सामान की कमी और लॉजिस्टिक दिक्कतों के कारण रिपेयरिंग बहुत धीमी रही है. ऐसे में साउथ पार्स का कामकाज फिर से पटरी पर लाना ईरान के लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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