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कई प्रखंडों में महीनों से भुगतान लंबित, परंपरागत स्वशासन व्यवस्था पर पड़ रहा असर

Updated at : 20 Jan 2026 11:26 PM (IST)
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कई प्रखंडों में महीनों से भुगतान लंबित, परंपरागत स्वशासन व्यवस्था पर पड़ रहा असर

जिले में परंपरागत स्वशासन व्यवस्था से जुड़े कुल 6,181 पदधारी को सरकार सम्मान राशि का भुगतान कर रही है. इनमें ग्राम प्रधान 2061 हैं.

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दुमका (आनंद जायसवाल). परंपरागत स्वशासन व्यवस्था से जुड़े ग्राम प्रधान एवं उनके सहयोगियों के भुगतान में काफी विलंब हो रहा है. मिली रिपोर्ट के अनुसार जिले के कई प्रखंडों में कई महीनों से भुगतान लंबित है, जिससे कार्य प्रभावित हो रहे हैं. उनमें उदासीनता देखी जा रही है. जरमुंडी जैसे प्रखंड में जुलाई-अगस्त का विपत्र तैयार किया गया है, लेकिन भुगतान नहीं हो पाया है. जामा प्रखंड की बात की जाए, तो भुगतान अगस्त 2025 के बाद से लंबित है. जबकि रामगढ़ प्रखंड की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है. यहां ग्राम प्रधान एवं उनके सहयोगियों का भुगतान सितंबर 2025 तक ही किया जा सका है, जबकि इसके बाद की राशि अब तक लंबित है. शिकारीपाड़ा प्रखंड में भी भुगतान अक्तूबर 2025 तक ही किया गया है. रामगढ़ में कुल 46.04 लाख रुपये का भुगतान लंबित है, जो जिले में सर्वाधिक है. लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण पंचायत प्रतिनिधियों में नाराजगी देखी जा रही है. प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में कुल 18.43 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया, लेकिन इसके बावजूद 1.09 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अब भी लंबित है. यह दर्शाता है कि समस्या धन की नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया और निगरानी की कमजोरी की भी है. जिले में परंपरागत स्वशासन व्यवस्था से जुड़े कुल 6,181 पदधारी को सरकार सम्मान राशि का भुगतान कर रही है. इनमें ग्राम प्रधान 2061 हैं, जबकि गोड़ैत 1640, नायकी 1380, पराणिक 1375, जोग-मांझी 1371, कुड़ाम नायकी 1315 हैं. जिले में केवल मसलिया प्रखंड के 39 ग्राम सभा प्रधान को भी सरकार सम्मन राशि का भुगतान कर रही है. जिले में एक भी परगणैत नहीं हैं. उल्लेखनीय है कि ग्राम प्रधान को चार हजार रुपये, नायकी गुडै़त, जोगमांझी, पाराणिक व कुडुम नायकी को दो-दो हजार रुपये के सम्मान राशि के भुगतान का प्रावधान है. ========= क्रम-प्रखंड-ग्राम प्रधान-परगनैत-पराणिक-जोगमांझी-कुड़ाम नायकी-नायकी-गुड़ैत 1 – दुमका सदर – 194 – 0 – 212 – 187 – 186 – 200 – 228 2 – गोपीकांदर – 99 – 0 – 102 – 106 – 97 – 108 – 108 3 – जामा – 248 – 0 – 140 – 156 – 156 – 147 – 223 4 – जामुंडी – 371 – 0 – 140 – 142 – 137 – 146 – 140 5 – मसलिया – 240 – 0 – 244 – 244 – 246 – 245 – 284 6 – काठीकुंड – 134 – 0 – 157 – 150 – 126 – 148 – 164 7 – रामगढ़ – 257 – 0 – 80 – 85 – 81 – 85 – 82 8 – रानीश्वर – 104 – 0 – 126 – 127 – 116 – 120 – 160 9 – शिकारीपाड़ा – 158 – 0 – 114 – 119 – 113 – 122 – 131 10 – सरैयाहाट – 256 – 0 – 60 – 55 – 57 – 59 – 120 —————- सरकार व प्रशासन परंपरागत स्वशासन व्यवस्था के प्रति उदासीन दिख रही है. कई अंचलों में अंचल अधिकारी की लापरवाही भी शिथिल दिख रही है. जुलाई-अगस्त माह से जरमुंडी जैसे प्रखंड में भुगतान नहीं हुआ है. दूसरे प्रखंडों में भी अक्तूबर-नवंबर से भुगतान नहीं हुआ है. यह रवैया मनोबल को तोड़ने वाला है. व्यवस्था को चोट पहुंचानेवाला है. – भीम प्रसाद मंडल, प्रमंडलीय अध्यक्ष, ग्राम प्रधान मांझी संगठन. —————- सरकार परंपरागत स्वशासन व्यवस्था के प्रति उदासीन है. प्रावधानों के तहत हर महीने सम्मान राशि का भुगतान होना चाहिए था, लेकिन हमारे जरमुंडी अंचल में जुलाई और अगस्त 2025 से ग्राम प्रधान को मानदेय नहीं मिला है, जिससे आर्थिक दिक्कत हो रही है. मानदेय भुगतान की मांग को लेकर प्रधानों ने सरकार से मांग की है. – लालमोहन राय, ग्राम प्रधान

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BINAY KUMAR

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