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रेशम उत्पादन में आ रही गिरावट, राज्य में 40 अग्र परियोजना केंद्र में महज पांच तकनीकी पदाधिकारी

Updated at : 22 Dec 2025 11:05 PM (IST)
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रेशम उत्पादन में आ रही गिरावट, राज्य में 40 अग्र परियोजना केंद्र में महज पांच तकनीकी पदाधिकारी

देश के 76 प्रतिशत तसर रेशम उत्पादन वाले झारखंड में बजट कटौती

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तकनीकी पदों की भारी कमी से उत्पादन पर पड़ा प्रतिकूल असर संताल परगना के 12 केंद्रों में एकमात्र पीपीओ हैं पदस्थापित दुमका. जिस रेशम ने भारतीय वस्त्र उद्योग को वैश्विक पहचान दिलायी, उसी रेशम उत्पादन में अग्रणी रहे झारखंड में आज हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं. तसर रेशम उत्पादन में देश का 76 प्रतिशत योगदान देने वाला झारखंड राज्य सरकार की उपेक्षा, बजट कटौती और तकनीकी पदाधिकारियों की कमी के कारण अग्रणी स्थिति खोने की कगार पर है. एक समय ऐसा था जब झारखंड से छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों को तसर बीज की आपूर्ति की जाती थी. राज्य के लगभग 1.70 लाख आदिवासी–मूलवासी परिवार रेशम उत्पादन से जुड़े हैं, जो 50–60 दिनों में 30 से 40 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर लेते हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता ने इस परंपरागत आजीविका को संकट में डाल दिया है. सरकारी उपेक्षा का दिखने लगा है असर राज्य में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 40 अग्र परियोजना केंद्र स्थापित किये गये हैं, जिनमें से 12 संताल परगना प्रमंडल में हैं. विडंबना यह है कि पूरे राज्य में मात्र पांच ही अग्र परियोजना पदाधिकारी कार्यरत हैं. संताल परगना के 12 केंद्रों में सिर्फ एक ही पीपीओ पदस्थापित है. दुमका, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़ सहित कई जिलों के अग्र परियोजना केंद्र गैर-तकनीकी अधिकारियों के भरोसे चल रहे हैं. कई जगह बीडीओ और सीओ जैसे अधिकारियों को प्रभार दिया गया है, जिनके पास न तो रेशम कीटपालन का तकनीकी ज्ञान है और न ही समय. इसी तरह दुमका जिले के आसनबनी, कुश्चिरा, काठीकुंड, काठीजोरिया, शिकारीपाड़ा, सरैयाहाट, गोपीकांदर, पाकुड़ के लिट्टीपाड़ा व महेशपुर, साहिबगंज के राजमहल तथा गोड्डा के अलावा देवघर के जगदीशपुर, गिरिडीह के बेंगाबाद और डुमरी, धनबाद के गोबिंदपुर, हजारीबाग जिले में हजारीबाग व इटखोरी में संचालित अग्र परियोजना कार्यालय गैर तकनीकी पदाधिकारी के भरोसे चल रहे हैं. अग्र परियोजना पदाधिकारी के तौर पर जो पदाधिकारी नियुक्त होते हैं, वे रेशम उत्पादन को लेकर तकनीकी शिक्षा ग्रहण कर सेवा में आते हैं. इन अग्र परियोजना केंद्रों में आज केवल साहिबगंज के बोरियो में ही अग्र परियोजना पदाधिकारी पदस्थापित है. राज्यभर में पांच ही अग्र परियोजना पदाधिकारी हैं पदस्थापित पूरे झारखंड में केवल पांच ही अग्र परियोजना पदाधिकारी पदस्थापित हैं. साहिबगंज के बोरियो में रविशंकर शर्मा पदस्थापित हैं. जबकि नीतीश कुमार खरसांवा, प्रदीप महतो हाट गम्हरिया, मोहसिना खातून सिमडेगा एवं सोनी कुमारी बेड़ो में अग्र परियोजना पदाधिकारी के पद पर पदस्थापित हैं. अमूमन पुराने अग्र परियोजना केंद्र पर बीस और नये अग्र परियोजना केंद्र में छह पद सृजित हैं. इनमें अग्र परियोजना पदाधिकारी के अलावा कीटपालक, प्रबंधक, ओवरसियर, पिउन, नाइट गार्ड एवं क्लर्क जैसे पद शामिल हैं. संताल व गिरिडीह के अलावा कोल्हान क्षेत्र में सरायकेला खरसावां, चक्रधरपुर, चाईबासा, भरवरिया, गोयलखड़ा, चांडिल, कुचाई, बनगांव, मनोहरपुर, देवरासाईं जैसे स्थानों पर अग्र परियोजना केंद्र संचालित हैं. राज्य में सहायक उद्योग निदेशक, शोध पदाधिकारी, क्रय विक्रय पदाधिकारी जैसे शीर्ष पदों पर भी अधिकारियों की कमी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAKESH KUMAR

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