ग्रामसभा की सहमति के बिना हो रही बालू घाटों की नीलामी
Published by : ANAND JASWAL Updated At : 29 Jan 2026 7:40 PM
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मांझी-परगना प्रतिनिधियों ने सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि समता जजमेंट (1997) के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी प्रकार की नीलामी, पट्टा या खनन नहीं किया जा सकता.
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आरोप. पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में नीलामी के खिलाफ मांझी-परगना प्रतिनिधियों ने सौंपा ज्ञापन
मांझी-परगना ने जताया कड़ा ऐतराज, कहा: संवैधानिक व न्यायिक प्रावधानों का हो सख्ती से पालनसंवाददाता, दुमका
संताल परगना प्रमंडल के विभिन्न इलाके के मांझी परगना ने सूरजू टुडू के नेतृत्व में आयुक्त कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा. पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में हो रही अवैध बालू नीलामी का मुद्दा प्रमुखता से उठाते हुए इस पर आवश्यक पहल करने की मांग की. प्रतिनिधियों ने बताया कि संताल परगना प्रमंडल के अंतर्गत आनेवाले सभी जिले पांचवीं अनुसूची क्षेत्र घोषित हैं, जहां आदिवासी संताल समुदाय की पारंपरिक मांझी-परगना स्वशासन व्यवस्था अनादि काल से चली आ रही है. यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 13(1) के तहत प्री-कांस्टीट्यूशनल लॉ के रूप में मान्य है. अनुच्छेद 13(3)(क) के अनुसार इसे विधिक मान्यता प्राप्त है. इसके अतिरिक्त अनुसूचित क्षेत्र झारखंड राज्य आदेश-2007 के तहत भी यह क्षेत्र विशेष संरक्षण में आते हैं. मांझी-परगना प्रतिनिधियों ने सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि समता जजमेंट (1997) के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी प्रकार की नीलामी, पट्टा या खनन नहीं किया जा सकता. वहीं जगपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य (2011) के फैसले में ग्राम समुदाय के सामान्य भू-संसाधनों को ग्रामसभा की सामूहिक संपत्ति माना गया है. इन संवैधानिक और न्यायिक निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा संताल परगना प्रमंडल में 100 से अधिक बालू घाटों की नीलामी ग्राम सभा की अनुमति के बिना कर दिए जाने का आरोप लगाया गया. प्रतिनिधियों ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्र का उद्देश्य आदिवासी समुदाय को अपने प्राकृतिक संसाधनों, भूमि और परंपराओं पर स्वशासन के माध्यम से अधिकार देना है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में इन अधिकारों की अनदेखी हो रही है. प्रशासन पर आरोप लगाया गया कि वह ट्रस्टी की भूमिका निभाने की बजाय मालिक की तरह प्राकृतिक संसाधनों का व्यवसाय कर रहा है, जो पांचवीं अनुसूची की भावना के विपरीत है. ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से सुनील कुमार हेंब्रम, आलेश हांसदा, शिवचरण महतो, विजय कुमार टुडू, बालेश्वर हेंब्रम, पलटन हांसदा, चंद्र मोहन हांसदा, पीटर हेंब्रम, सरोज हेंब्रम, राजकिशोर मरांडी, बबलू हेंब्रम, धनीराम मुर्मू, कमलजीत हेंब्रम, लुकाश हेंब्रम, राजीव हांसदा, महादेव सोरेन, सनातन बेसरा समेत अन्य मांझी एवं परगना उपस्थित थे.मांझी-परगना की प्रमुख मांगें
– सभी बालू नीलामियों को तत्काल निरस्त किया जाये.
– ग्रामसभा की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की नीलामी न हो.– अनुसूचित क्षेत्र से जुड़े सभी संवैधानिक व न्यायिक प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाये.
– प्राकृतिक संसाधनों पर आदिवासी समुदाय का वैधानिक अधिकार बहाल किया जाये.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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