फौजदारीनाथ दरबार में शहनाई की धुन के बीच शिव-पार्वती का हुआ घूंघट

Updated at : 27 Feb 2025 10:41 PM (IST)
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फौजदारीनाथ दरबार में शहनाई की धुन के बीच शिव-पार्वती का हुआ घूंघट

महाशिवरात्रि को लेकर शिव बारात निकाली गयी. बाद में शिव के प्रतीकात्मक त्रिशूल के साथ शिवभक्तों ने अबीर-गुलाल से होली खेली.

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बासुकिनाथ. महाशिवरात्रि के दूसरे दिन बाबा फौजदारीनाथ दरबार में भगवान शिव व माता पार्वती के विवाह के उपरांत शहनाई की धुन के बीच गुरुवार की संध्या को घूंघट की रस्म की गयी. इस पवित्र अवसर पर मंदिर प्रांगण में मंदिर पुजारी, पंडित व विदकरी शौखी कुंवर के पुत्र फुलेश्वर कुंवर व उसके परिवार के सदस्यों द्वारा घूंघट की रस्म पूरी की गयी. मंदिर पुजारी डबलू झा ने विधिवत सभी रस्म की. मंदिर प्रांगण में शहनाई की धुन के बीच दूल्हे का चेहरा सुहाना लगता है…, परदेशियों से ना अँखियाँ मिलाना…, कजरा मुहब्बत वाला… आदि बेहतरीन धुनों पर शिवभक्त श्रोता झूमने पर विवश हुए. मो काजिम व ताहिर हुसैन ने एक से बढ़ कर एक शहनाई की धुन प्रस्तुत की. सुरपेटी में समशीर अब्बास, मंजीरा पर महेश्वर हुसैन, तबला पर जमाल हुसैन एवं नाल पर जाहिर हुसैन के दादरा, होली खेलेल कन्हाई लाल…, बहारो फूल बरसाओ… की बेहतरीन प्रस्तुति से मंदिर परिसर में जुटे श्रद्धालु झूम उठे. मंदिर प्रांगण में शिवभक्तों ने बाबा फौजदारीनाथ के दरबार में एक-दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर होली खेली. मिथिलांचल से पहुंचे शिवभक्त एक-दूसरे को गुलाल लगाकर गले मिले. सुहागिन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर पहना कर भगवान शिव व माता पार्वती के विवाह की बधाई दी. सैकड़ों शिवभक्तों की उपस्थिति में इस रस्म को शहनाई की धुन के बीच पूरा किया गया. मंदिर परिसर विवाह मंगलगीत से गुंजायमान रहा.

मंदिर परिसर गुलाब जल एवं इत्र के फुहार से हुआ सराबोर :

मंदिर प्रबंधन द्वारा श्रद्धालुओं के बीच व्यापक रूप से सूखे मेवे का वितरण प्रसादस्वरूप किया गया. काजू, अखरोट, बदाम, मिश्री, मखाना आदि का वितरण श्रद्धालुओं के बीच किया गया. घूंघट के दौरान सम्पूर्ण मंदिर परिसर गुलाब जल एवं इत्र की फुहार से सराबोर हुआ. मंदिर प्रबंधन की इस व्यवस्था को लेकर श्रद्धालुओं ने प्रसन्नता व्यक्त की.

शिव के प्रतीकात्मक त्रिशूल पालकी पर नगर भ्रमण किया :

बासुकिनाथ मंदिर के पुरोहित व पुजारी ने भगवान शिव के प्रतीकात्मक त्रिशूल को लेकर चांदी की बनी पालकी पर बैठकर नगर भ्रमण किया. भ्रमण कर लौटे भगवान शिव के त्रिशूल को मंदिर परिसर स्थित कोहबर के पास विधि-विधान से रखा गया. भोलेनाथ के प्रतीकात्मक त्रिशूल, पीतांबर धोती व रुद्राक्ष माला, माता पार्वती के प्रतीकात्मक स्वरूप के साथ नगर भ्रमण के पश्चात भोलेनाथ व माता पार्वती को कोहबर गृह में प्रवेश कराया गया. इस दृश्य को देखने के लिए शिवभक्तों की भीड़ मंदिर प्रांगण में जुटी. मंदिर पुजारी प्रेमशंकर झा ने बताया कि कोहबर के पास त्रिशूल फाल्गुन पूर्णिमा तक रहेगा. उसके बाद उसे वहां से हटाया जायेगा. बाबा फौजदारीनाथ के घूंघट की रस्म में एसडीओ कौशल कुमार, पूर्व सांसद अभयकांत प्रसाद, रविकांत मिश्रा, मंदिर प्रभारी सह बीडीओ कुंदन भगत, मनोज पंडा, अरविंद झा, कैलाश साह, सोमनाथ यादव, मीठू राव, चंदन राव, कुंदन झा, सारंग झा आदि मौजूद थे.

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