जो जानवरों के पीने लायक भी नहीं, वैसे गंदे पानी से लोग बुझा रहे प्यास

Updated:
विज्ञापन
जो जानवरों के पीने लायक भी नहीं, वैसे गंदे पानी से लोग बुझा रहे प्यास

चिरुडीह के तीनों पहाड़िया टोला में तकरीबन 400 की आबादी होगी. किसी टोले में जलमीनार के सहारे प्यास बुझ रही है तो स्कूल टोला में जलमीनार बीते छह माह पहले ही दम तोड़ दिया है.

विज्ञापन

गोपीकांदर. प्रखंड में ऐसा भी गांव है जहां के लोगों को वैसे पानी से प्यास बुझानी पड़ रही है, जिस पानी को लोग अपने मवेशियों को भी शायद न पिलाना चाहें. कच्चे कुएं से लोग पानी निकालकर पीते हैं. पानी का रंग मटमैला है. गड्ढे में कई तरह के कीड़े-मकोड़े मौजूद होने के बाद भी ग्रामीण बाध्य होकर उसी पानी को पीते हैं. गड्ढे के पानी को जानवरों से बचाये रखने के लिए ऊपर से लकड़ियों को रख देते हैं ताकि जानवर इस पानी को और गंदा नहीं करें. इस कुएं का पानी जब सूख जाता है तब ग्रामीण दो किलोमीटर दूर नदी तक पहुंचते हैं. नदी के पानी से दैनिक कार्य को करते हैं. हम बात कर रहे हैं गोपीकांदर में कोल ब्लॉक से प्रभावित होनेवाले गांव चिरुडीह की. यहां का नजारा देखकर ठंडा-गरम कमरे में बैठकर गांव के लिए नीति निर्धारित करने वाले भी शायद असहज हो जाएं. गोपीकांदर के कोल ब्लॉक से प्रभावित होनेवाले तीन टोले में पेयजलापूर्ति को लेकर ऐसा ही संकट है. चिरुडीह के अलावा कुंडापहाड़ी और मोहुलडाबर गांव में आनेवाले समय में कोयला उत्खनन होना है. ग्रामीणों ने कोल उत्खनन करनी वाली कम्पनी नवेली उत्तर प्रदेश पॉवर प्रॉजेक्ट लिमिटेड से स्वास्थ्य सुविधा और पेयजल की मांग की थी. हालांकि कम्पनी ने दोनों ही मांगों पर अमल भी किया, लेकिन कुछ माह में ही पेयजलापूर्ति सिस्टम ने दम तोड़ दिया. आलम यह हो गया है कि रैयत नदी, खुला कुआं तो पहाड़िया परिवार गड्ढे का पानी पीने को मजबूर हैं. चिरुडीह गांव पहाड़िया टोला में पानी को लेकर सबसे ज्यादा किल्लत देखने को मिली. पहाड़िया परिवारों ने अपनी प्यास बुझाने के लिए गड्ढा खोद दिया ताकि पानी मिल सके. चिरुडीह पहाड़िया टोला में दो जलमीनार भले लगे हुए हैं लेकिन सिस्टम के आगे फेल हो गये हैं. बीते छह माह से ज्यादा समय से खराब पड़ा हुआ है. पहाड़िया परिवार प्यास बुझाने के लिए गड्ढे का सहारे लेते हैं. ग्रामीणों के मुताबिक कोयला कम्पनी ने जमीन की मापी कर लिया है. कम्पनी के अधिकारियों ने पानी देने की बात कही थी, लेकिन आज तक पहाड़िया टोला में पानी का टैंकर नहीं पहुंचा है. आदिवासी टोला तक ही टैंकर आया करता है, लेकिन बीते दो माह से वह भी बंद है. ग्रामीणों ने अपनी प्यास बुझाने के लिए पहाड़ की तलहटी पर गड्डा बनाया है, जिसके पानी से प्यास बुझायी जाती है. इस दौरान रामलाल देहरी, सोनाय देहरी, अर्जुन सिंह, रूपाय देहरी, फ्लॉवती महारानी, फूलकुमारी, नमिता देवी, सुकली महारानी ने शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की मांग की है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Rakesh Kumar

लेखक के बारे में

By Rakesh Kumar

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola