तसर से महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

दलाही : दलाही के मसलिया प्रखंड के सुग्गापहाड़ी पंचायत में सुग्गापहाड़ी गांव की आदिवासी महिलाएं तसर उत्पादन कर अत्मनिर्भर बन रही हैं. महिलाएं इस काम को समूह बना कर करती हैं. अपने परिवार को आर्थिक रूप से मदद भी कर रही हैं. समूह की बालिका हांसदा, मंगत्री किस्कू, गीता मुर्मू, चिंतामुनी हेंब्रम, सीमा टुडू, रायमती […]
दलाही : दलाही के मसलिया प्रखंड के सुग्गापहाड़ी पंचायत में सुग्गापहाड़ी गांव की आदिवासी महिलाएं तसर उत्पादन कर अत्मनिर्भर बन रही हैं. महिलाएं इस काम को समूह बना कर करती हैं.
अपने परिवार को आर्थिक रूप से मदद भी कर रही हैं. समूह की बालिका हांसदा, मंगत्री किस्कू, गीता मुर्मू, चिंतामुनी हेंब्रम, सीमा टुडू, रायमती किस्कू, मिरुदी हेंब्रम आदि ने कहा कि बरसात पर आश्रित रहने से साल में एक बार धान की फसल होती थी. दूसरा काम नहीं था़ अधिकांश महिलाएं घर पर शराब बनाने का काम करती थीं.
लेकिन, वे जागरूक हुईं और शराब बनाने का काम छोड़ कर तसर उत्पादन में जुट गयीं. इस काम को करके वे अपने परिवार के भरण-पोषण में पुरुषों की मदद कर रही हैं. महिलाओं ने बताया कि रेशम उत्पादन का काम सितंबर से नवंबर तक किया जाता है और इस दो महीने में प्रत्येक महिला को 10-15 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है़
ऐसे हुई शुरुआत
प्रदान ने वर्ष 2013 में 29 महिलाओं के साथ नया सूरज महिला तसर विकास समिति नामक समूह का गठन किया. महिलाओं को प्रशिक्षण देकर इस काम से जोड़ा गया़ इसके बाद महिलाएं इससे जुड़ती गयीं.
खेती और शराब बनाने का काम छोड़ महिलाएं तसर उत्पादन में रम गयी हैं. खुद कुकून से कीट निकालती हैं, अंडों की माइक्रोस्कोप से जांच करती हैं और अंडों से कीड़ों को निकालकर आसन व अर्जुन के पेड़ पर छोड़ती हैं.
महिलाओं की मांग है कि सरकार उन्हें प्रशिक्षण दे या मशीन उपलब्ध करा दे, ताकि वे घर में ही धागा निकाल सकें.
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