स्कूल का चहारदीवारी नहीं रहने से कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

दुमका नगर शहर के रेलवे स्टेशन समीप स्थित प्राथमिक विद्यालय में धेराबंदी नहीं होने से विधार्थियों एवं शिक्षकों को भय के साये में अध्ययन करना पड़ रहा है. यह विद्यालय ठीक रेलवे स्टेशन के पास होने के कारण प्रतिदिन सैकड़ों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं. जिससे तेज आवाज के साथ धूल भी उड़ती रहती […]
दुमका नगर शहर के रेलवे स्टेशन समीप स्थित प्राथमिक विद्यालय में धेराबंदी नहीं होने से विधार्थियों एवं शिक्षकों को भय के साये में अध्ययन करना पड़ रहा है. यह विद्यालय ठीक रेलवे स्टेशन के पास होने के कारण प्रतिदिन सैकड़ों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं. जिससे तेज आवाज के साथ धूल भी उड़ती रहती है. इस स्कूल में लगभग 500 बच्चे पढ़ते हैं.
स्कूल में चहारदीवारी नहीं होने से बच्चों को धूल और ध्वनि दोनों से प्रतिदिन दो-चार होना पड़ रहा है. यहां तेज गति से वाहन चलाने वाले की भी कमी नहीं है, तेज गति से वाहन चलाने के कारण आये दिन कई दुर्घटनाएं होती रहती है. जिससे छात्रों में भय का माहौल व्याप्त रहता है. छात्रों के साथ-साथ उनके अभिभावक भी इस कारण चितिंत रहते हैं. ‘स्कूल में चहारदीवारी नहीं होने से पठन कार्य में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है. वाहनों के शोरगुल से एवं उनके द्वारा उड़ाये गये धूल के कारण पढ़ाई में अड़चन आ रही है. सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है.’
मणिमाला साह, प्रभारी प्राचार्या ‘चहारदीवारी नहीं होने एवं विद्यालय परिसर सड़क से नीचे होने के कारण हम अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित रहते हैं. यह मुख्य मार्ग है, जिससे कभी भी कोई वाहन अनियंत्रित होकर विद्यालय के अंतर घुस सकता है. जिससे बच्चों एवं विद्यालय दोनों को नुकसान पहुंच सकता है. हमलोगों ने कई बार संबंधित विभाग को इस समस्या से अवगत भी कराया है.’
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