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शिबू सोरेन के साथ-साथ बेटा-बहू ने किया है प्रतिनिधित्व, कमल खिलाने की चुनौती, जानें जामा विधानसभा क्षेत्र का लेखा-जोखा

Updated at : 18 Dec 2019 7:35 AM (IST)
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शिबू सोरेन के साथ-साथ बेटा-बहू ने किया है प्रतिनिधित्व, कमल खिलाने की चुनौती, जानें जामा विधानसभा क्षेत्र का लेखा-जोखा

आनंद जायसवाल कुल वोटर 205766 पुरुष वोटर 102913 महिला वोटर 102853 दुमका : जामा विधानसभा क्षेत्र सोरेन परिवार के लिए पसंदीदा, सुरक्षित और सुनिश्चित सीटों की सूची में शामिल है. 2005 का चुनाव छोड़ दें, तो 1980 से इस सीट पर झामुमो का कब्जा रहा है. यहां से झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन विधायक बने थे, […]

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आनंद जायसवाल
कुल वोटर
205766
पुरुष वोटर
102913
महिला वोटर
102853
दुमका : जामा विधानसभा क्षेत्र सोरेन परिवार के लिए पसंदीदा, सुरक्षित और सुनिश्चित सीटों की सूची में शामिल है. 2005 का चुनाव छोड़ दें, तो 1980 से इस सीट पर झामुमो का कब्जा रहा है.
यहां से झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन विधायक बने थे, तो बाद में उनके बड़े बेटे दुर्गा सोरेन तथा दुर्गा सोरेन के निधन के बाद दो बार पतोहू सीता सोरेन ने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है. 1984 में दुमका लोकसभा सीट हारने के बाद झारखंड आंदोलन को गति देने के लिए शिबू सोरेन ने 1985 में यहां से विधानसभा चुनाव लड़ा और पहली बार विधायक चुने गये थे.
1967 में यह विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया था. निर्दलीय एम हांसदा ने भारतीय जनसंघ के बटेश्वर हेम्ब्रम को पराजित किया था. 1969 में कांग्रेस के मदन बेसरा ने जनसंघ के बटेश्वर हेम्ब्रम को हराया िफर 1972 व 1977 में जीत कर मदन बेसरा हैट्रिक लगाने में सफल हुए. 1977 में मदन बेसरा जनता लहर में भी अपने प्रतिद्वंद्वी जनता पार्टी के चुनका हेम्ब्रम को हराया था.
इस चुनाव में चुनका हेम्ब्रम को 7099 मतों से ही संतोष करना पड़ा. 1980 में झामुमो के टिकट पर देवान सोरेन 19,638 वोट बटोर कर इस क्षेत्र पर झामुमो की जीत का अागाज किया. 1995 में झामुमो ने मोहरिल मुर्मू का टिकट काट कर पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेन ने पुत्र दुर्गा सोरेन को मैदान में उतारा. दुर्गा सोरेन विधायक चुने गये. दुर्गा सोरेन 2000 में भी इस क्षेत्र निर्वाचित हुए.
2005 में झामुमो से बगावत कर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले सुनील सोरेन ने झामुमो के इस मजबूत गढ़ को ध्वस्त किया और विधायक बने. 2009 में विधानसभा चुनाव के पूर्व दुर्गा सोरेन के निधन के बाद पार्टी ने उनकी पत्नी सीता सोरेन को मैदान में उतारा. इस क्षेत्र की जनता ने सीता सोरेन पर भरोसा जताया वह लगातार दो बार विधायक रहीं.
तीन महत्वपूर्ण कार्य जो हुए
1. पावर ग्रिड की स्थापना हुई
2. पेयजलापूर्ति की व्यवस्था सुधरी
3. स्वरोजगार को बढ़ावा मिला
तीन महत्वपूर्ण कार्य जो नहीं हुए
1. सिंचाई के साधन विकसित नहीं हुए
2. जामा,रामगढ़ में कॉलेज नहीं खुला
3. चुटोनाथ क्षेत्र का विकास नहीं हुआ
सड़क व जलापूर्ति में सुधार : सीता
सीता सोरेन ने कहा कि पूरे विधानसभा क्षेत्र में हर तरह की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया. गांव की सड़क की स्थिति काफी सुधरी. जलापूर्ति के लिए प्रयास हुए. आवश्यक पुल-पुलियों का निर्माण विधायक निधि से कराया.
जनता से सराेकार नहीं रखीं : सुरेश
भाजपा प्रत्याशी सुरेश मुर्मू ने कहा कि विधायक बनने के बाद सीता सोरेन का आगमन चुनाव के वक्त ही होता है. जनता के दुख-दर्द से उन्हें कोई सरोकार नहीं रहा. क्षेत्र के विकास के लिए कभी दिलचस्पी नहीं दिखायी. कुछ पहल की गयी होती, तो आज ऐसी स्थिति नहीं होती.
2005
जीते : सुनील सोरेन, भाजपा,
प्राप्त मत : 44073
हारे : दुर्गा सोरेन, झामुमो
प्राप्त मत : 37443
तीसरा स्थान : मनोज कु सिंह, राजद
प्राप्त मत : 4254
2009
जीते : सीता सोरेन, झामुमो
प्राप्त मत : 38550
हारे : मनोज कुमार सिंह, भाजपा
प्राप्त मत : 25844
तीसरा स्थान : सुशील मरांडी, कांग्रेस
प्राप्त मत : 12948
2014
जीते : सीता सोरेन, झामुमो
प्राप्त मत : 53250
हारी : सुरेश मुरमू, भाजपा
प्राप्त मत : 50944
तीसरा स्थान : सुखलाल सोरेन, झाविमो
प्राप्त मत : 9263
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