दुमका : तालाब बना गांव में, शिलापट्ट रखे हैं दफ्तर में

Updated at : 16 Sep 2018 7:28 AM (IST)
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दुमका : तालाब बना गांव में, शिलापट्ट रखे हैं दफ्तर में

दुमका : भूमि संरक्षण विभाग के तालाबाें के जीर्णोद्धार का कार्य साल भर पहले ही पूरा हाे चुका है, पर उन योजनाओं के शिलापट्ट आज तक नहीं लग सके हैं. तालाब निर्माण की योजनाओं के कई शिलापट्ट भूमि संरक्षण पदाधिकारी के कार्यालय के बाहर पड़े हुए हैं. इन शिलापट्ट में कुछ तो ऐसे भी हैं, […]

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दुमका : भूमि संरक्षण विभाग के तालाबाें के जीर्णोद्धार का कार्य साल भर पहले ही पूरा हाे चुका है, पर उन योजनाओं के शिलापट्ट आज तक नहीं लग सके हैं. तालाब निर्माण की योजनाओं के कई शिलापट्ट भूमि संरक्षण पदाधिकारी के कार्यालय के बाहर पड़े हुए हैं. इन शिलापट्ट में कुछ तो ऐसे भी हैं, जो साल भर पहले के हैं. पिछले साल सितंबर में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के हाथों कई योजनाओं का शिलान्यास करवाया गया था. इतने लंबे अंतराल के बाद भी संबंधित योजनास्थलों पर विभाग शिलापट्ट को नहीं भेज सका है.

दिखी अनियमितता : जब कुछ तालाब योजनाओं की पड़ताल की, तो पाया कि रानीश्वर प्रखंड के रांगालिया पंचायत के कुचियाडाली गांव में भूमि संरक्षण विभाग की ओर से निर्माण कराये गये तालाब में निर्माण से संबंधित सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है़

तालाब खोदने के बाद अधिकांश मिट्टी तालाब के मेड़ पर ही फेंकी गयी है. मिट्टी मेड़ के बदले दूर फेंके जाने से बरसात के पानी में मिट्टी तालाब में नहीं जाती.

यही हाल भूमि संरक्षण विभाग से नावाडीह गांव में निर्मित तालाब का भी है. सूचना पट्ट या बोर्ड लगा नहीं था. तलाब में तीन से चार फीट पानी भरा हुआ था. पानी निकासी के लिए आउटलेट नहीं बनाया गया है. इसी प्रकार काठीकुंड के पंदनपहाड़ी स्थित तालाब में भी सूचना पट नहीं दिखा.

दूसरे दिन भी जांच रही जारी

भूमि संरक्षण विभाग के निदेशक द्वारा भेजी गयी दो सदस्यीय जांच टीम दुमका के भूमि संरक्षण कार्यालय में तालाब व डोभा निर्माण से संबंधित संचिकाओं की जांच दूसरे दिन भी करती रही. मामले में जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी देवघर गोपाल ठाकुर, 2016-17 में यहां के भूमि संरक्षण पदाधिकारी रहे डॉ मदन मोहन जायसवाल तथा वर्तमान भूमि संरक्षण पदाधिकारी राम कुमार सिंह कार्यालय में एक साथ मौजूद दिखे.

इन पदाधिकारियों का कहना था कि राज्यादेश यही कहता है कि इस तरह की योजनाओं में कोई वाउचर की जरूरत नहीं है, क्योंकि पानी पंचायत को भुगतान एमबी के आधार पर होता है, जबकि मिट्टी की कटाई अथवा ढुलाई के लिए ट्रैक्टर, जेसीबी या पोकलैन का भुगतान पानी पंचायत करता है.

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