22 वर्ष बाद कोरडीहा के पांडेय परिवार को मिला मालिकाना हक

Updated at : 28 Aug 2018 5:07 AM (IST)
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22 वर्ष बाद कोरडीहा के पांडेय परिवार को मिला मालिकाना हक

कमिश्नर कोर्ट के फैसले के बाद भूमि विवाद खत्म जमीन विवाद में हत्या, आगजनी व मारपीट की हो चुकी थी वारदात दुमका : जरमुंडी के पेटसार पंचायत के कोरडीहा गांव में दो दशक से भी अधिक समय से चल रहा जमीनी विवाद अंतत: न्यायालय के फैसले से सुलझ गया. न्यायालय के फैसले पर पांडेय परिवार […]

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कमिश्नर कोर्ट के फैसले के बाद भूमि विवाद खत्म

जमीन विवाद में हत्या, आगजनी व मारपीट की हो चुकी थी वारदात
दुमका : जरमुंडी के पेटसार पंचायत के कोरडीहा गांव में दो दशक से भी अधिक समय से चल रहा जमीनी विवाद अंतत: न्यायालय के फैसले से सुलझ गया. न्यायालय के फैसले पर पांडेय परिवार को जमीन पर मालिकाना हक मिल गया. भैरव पांडेय, उमेश पांडेय, गौरी शंकर पांडेय नाम खतियानी रैयतों का गांव के ही सोलह आना रैयतों के साथ 1996 से ही एक लंबा विवाद चल रहा था. 22 साल पुराने इस विवाद में हत्या, आगजनी, मारपीट जैसी वारदातें होती रहीं थी. अंततः न्यायालय के द्वारा इस मामले में जांचोपरांत भैरव पांडेय, उमेश पांडेय, गौरी शंकर पांडेय को उक्त भूमि का मालिकाना हक दिया गया. करीब 79 बीघा जमीन का विवाद लंबे समय से चल रहा था. इस जमीन में पोखर, बाड़ी, बगीचा, खेत, आम के कई पेड़ सहित कई अन्य पौधे लगे हुए थे,
जिनको लेकर लंबे समय से दोनों पक्षों में तनातनी चल रही थी. इस घटना को लेकर कल्लर ओझा नाम के एक शख्स की हत्या 18 साल पहले कर दी गयी थी. वहीं तालाब में मछली मारने, मछली लूटने, घरों में अगलगी की भी वारदात हुई थी. मामले में संतोष पांडेय, पंकज पांडेय ने बताया कि वर्ष 1996 में गांव के सोलह आना रैयतों ने भैरव पांडेय, उमेश पांडेय, गौरी शंकर पांडेय के द्वारा जोत आबाद किए जा रहे जमाबन्दी नंबर- सात एवं आठ में 23 बीघा 9 कट्ठा 16 धुर, जमाबंदी नंबर 30 में 20 बीघा 2 कट्ठा 7 धुर, जमाबंदी नंबर 32 और 53 में 17 बीघा 5 कट्ठा 3 धुर एवं जमाबंदी नंबर 46 में 18 बीघा 10 कट्ठा आठ धुर सहित कुल 79 बीघा जमीन पर सेटलमेंट में केस किया गया था. सेटलमेंट में 16 आना रैयत के दावे को खारिज किया गया. पुनः कोरडीहा के सोलह आना रैयत ने कमिश्नर कोर्ट में केस दाखिल किया. उसके बाद कमिश्नर कोर्ट ने भी अपने सेटलमेंट का ऑर्डर को देखते हुए भैरव पांडेय गैरह के पक्ष में फैसला सुनाया एवं कोरडीहा के सोलह आना रैयत के दावे को खारिज किया. इस फैसले के खिलाफ विपक्षी हाईकोर्ट की शरण में गये. हाईकोर्ट ने रिमांड बैक करके कमिश्नर कोर्ट को फ्रेश आर्डर का निर्देश दिया. जिसके बाद कमिश्नर कोर्ट ने 90 दिन के अंदर फिर फ्रेश ऑर्डर भैरव पांडेय, उमेश पांडेय गौरी शंकर पांडेय पिता स्वर्गीय राम गोविंद पांडेय के पक्ष में फैसला सुनाया. मेक पर्सन, गेन्जर से लेकर नया पर्चा तक में भी पांडेय परिवार के नाम से उक्त खतियानी जमीन दर्ज है.
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