मौसम व मिट्टी की प्रकृति के अनुरूप तकनीक आधारित खेती करें किसान

Updated at : 13 Jun 2017 4:29 AM (IST)
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मौसम व मिट्टी की प्रकृति के अनुरूप तकनीक आधारित खेती करें किसान

कार्यक्रम . कृषि जागृति अभियान का हुआ उद‍्घाटन, डीसी ने कहा किसानों को आधुनिक तकनीक से खेती कर कम लागत में अच्छी उपज लेने का गुर सिखाया गया. इस दौरान कृषि योजनाओं से भी लाभ लेने की अपील किसानों से की गयी. दुमका : दुमका जिले के तीन प्रखंडों में तीन दिवसीय कृषि जागृति अभियान […]

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कार्यक्रम . कृषि जागृति अभियान का हुआ उद‍्घाटन, डीसी ने कहा

किसानों को आधुनिक तकनीक से खेती कर कम लागत में अच्छी उपज लेने का गुर सिखाया गया. इस दौरान कृषि योजनाओं से भी लाभ लेने की अपील किसानों से की गयी.
दुमका : दुमका जिले के तीन प्रखंडों में तीन दिवसीय कृषि जागृति अभियान सह मेला 2017 का उद्घाटन डीसी राहुल कुमार सिन्हा द्वारा किया गया. इस समारोह का उद्देश्य किसानों को सरकार के योजनाओं के प्रति जागरूक करना है. इस दौरान कृषकों को संबोधित करते हुए श्री सिन्हा ने कहा कि आज भी कृषि सबसे बड़ा व्यवसाय है और सबसे अधिक लोगों की आजीविका का यह साधन है. कहा कि किसान धरती के सच्चे सेवक हैं. दुमका भी कृषि के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान रखता है.
कोकुन और सिल्क के क्षेत्र में दुमका अपना महत्वपूर्ण योगदान देश को देते आ रहा है. कहा कि सरकार कृषकों के लिए विभिन्न योजनायें दिन प्रतिदिन ला रही हैं लेकिन जबतक सारी योजनाओं का लाभ किसान को नहीं मिलती तबतक सही मायने में योजनाओं का कोई महत्व नहीं रह जाता है. उन्होंने कहा कि हमें बचे भूमि पर उन्नत किस्म के खाद एवं उन्नत किस्म के बीज का इस्तेमाल कर पैदावार बढ़ाने की जरूरत है, तभी खाद्य की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को अनुदान राशि पर बीज एवं खाद उपलब्ध करा रही है लेकिन जागरूकता की कमी के वजह से इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है.
कृषक खुद जागरूक हों तथा अपने आस-पड़ोस के लोगों को भी जागरूक करें. कृषि अब बहुत आगे निकल चुका है रोज नये तकनीक आ रहे हैं. नये तकनीकों के माध्यम किसान अच्छे फसल का भी उत्पादन कर रहे हैं. जो जागरुक नहीं रहेंगे, वे केवल कृषि में नहीं संपन्नता में भी पिछड़े रह जायेंगे. उन्होंने कहा कि आज के वक्त किसान फसल उपजा रहे हैं लेकिन उत्पादन इतना नहीं हो पा रहा है जिससे सबका पेट भर जाये. अलग अलग किस्म के फसल को अलग अलग भूमि में अलग अलग वक्त पर लगाने की जरूरत है.
केवीके के वरीय वैज्ञानिक डाॅ श्रीकांत सिंह ने कहा कि वैसे किसान जो अपने खेत की मिट्टी की जांच कराना चाहते हैं वो कृषि विज्ञान केंद्र आकर आसानी से करा सकते हैं उन्होंने कहा कि कृषि से संबंधित कोई भी समस्या हो कृषि विज्ञान केन्द्र का द्वार कृषकों के लिए हमेशा खुला रहेगा. आत्मा परियोजना निदेशक डाॅ दिवेश कुमार सिंह ने अनुदान पर बीज से लेकर कृषि संसाधन मुहैया कराये जाने तथा समय-समय पर आयोजित होने वाले प्रशिक्षण व प्रादर्श की जानकारी दी तथा लाभ लेने का आह्वान किया. इस दौरान डीसी श्री सिन्हा के द्वारा गुमिन हांसदा, रूबीलाल हेंब्रम, सुनु मरांडी, हीरालाल सोरेन, सुलेमान मरांडी के बीच मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया गया. वहीं अरुण कुमार साहा, रमेश साहा, परिमल साहा, विरेंद्र हेंब्रम को सोयाबीन के बीज, हीरालाल सोरेन, सुकु मरांडी, कन्हाई हांसदा को तील का बीज दिया गया. जबकि गव्य विकास मिनरल मिक्सचर का वितरण राजू यादव, अम्बिका टुडू, विनोद यादव, रामनरेश यादव के बीच किया गया. धान का बीज रसका मुर्मू एवं गोविंद पाल को मिला.कृषि जागृति अभियान सह मेला के दौरान सरकार के विभिन्न योजनाओं के स्टॉल भी लगाये गये थे. कार्यक्रम का संचालन उप परियोजना निदेशक संजय कुमार मंडल ने किया. मौके पर कृषि, सहकारिता, पशुपालन, गव्य विकास, मत्स्य जैसे विभाग के पदाधिकारी मौजूद थे.
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