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Dhanbad News : धनबाद में पत्ता काट कर दवा नहीं देते दुकानदार, मरीज परेशान

प्रभात : सरोकार : दवाओं की फुटकर बिक्री का नहीं है कोई ठोस नियम, मनमानी कर रहे दुकानदार, बीपी, शुगर और हार्ट सहित कई तरह की दवाओं का पूरा पत्ता खरीदना पड़ रहा है मरीजों को

मौजूदा समय में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हार्ट समेत कई गंभीर बीमारियों के मरीजों को दवाओं की पूरी स्ट्रिप (दवा का पूरा पत्ता) खरीदनी पड़ रही है. सामान्य बीमारियों के मरीजों को भी दवा दुकानदार दो-तीन खुराक के लिए पत्ते से काट कर दवा देने से परहेज करते हैं और दवा की पूरी स्ट्रिप खरीदने का दबाव बनाते हैं. वहीं, दवा कंपनियां भी आजकल 10 की जगह 15 या 20 गोलियों की स्ट्रिप तैयार कर रही हैं. ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी गरीब मरीजों को होती है, जिनके पास कई बार दवा का पूरा पत्ता खरीदने के पैसे तक नहीं होते हैं. इसे लेकर कोई ठोस नियम नहीं होने की वजह से दवा दुकानदारों की मनमानी को बल मिल रहा है. हालांकि, केंद्र सरकार इस समस्या के प्रति गंभीर है, वहीं झारखंड ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन ऐसे मामलों में दवा दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है.

दवाओं की कीमत :

धनबाद में दवा दुकानों पर शुगर की सामान्य दवा मेटफॉर्मिन की 10 गोली की स्ट्रिप की कीमत 22 रुपये है. वहीं, इसकी 20 गोली की स्ट्रिप की कीमत 42 रुपये है. बीपी की दवा एम्लोडिपिन की 15 गोलियों वाली स्ट्रिप की कीमत 42 रुपये है. जिनको सिर्फ दो दिन की दवा चाहिए, उनको दुकानदार दवा काट कर नहीं देते हैं. मरीज या उनके परिजन को बताया जाता है कि ये दवाएं काटकर नहीं बेची जाती हैं. मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ यूके ओझा ने दवा दुकानदारों के इस चलन को गलत बताया. कहा कि बीपी और शुगर की दवाएं तो लंबी चलती हैं, लेकिन कुछ मरीज में एलर्जी होने पर दवा बदलनी पड़ती है. वैसे भी किसी भी दवा का पत्ता काटकर देने का प्रावधान है. इस्तेमाल में नहीं आने वाली दवाएं दुकानदार को वापस लेनी चाहिए.

एलर्जी और बुखार की दवा की स्ट्रिप काटकर देने से कतराते हैं दुकानदार :

कई दवा दुकानदार एलर्जी और बुखार की दवा की स्ट्रिप काटकर भी देने से कतराते हैं. काेरोना काल के बाद चर्चित दवा मोंटेलुकास्ट सोडियम और लेवोसेटिरिजिन हाइड्रोक्लोराइड का पत्ता भी दुकानदार काटकर नहीं देते हैं. उनकी दलील यह होती है कि पांच दिन का कोर्स होता है, इसलिए काटकर नहीं दिया जा सकता है. वहीं, पारासिटामोल की दवा भी सस्ती और घर में काम आनेवाला बता कर दुकानदार स्ट्रिप काटने से बचते हैं.

केस स्टडी-1

सरायढेला के राहुल प्रसाद ने बताया कि उनके पिता विभिन्न रोगों से ग्रसित हैं. इसलिए दवाएं लंबी चलती हैं. कई बार पैसे के अभाव में एक या दो दिन की दवा लेने की जरूरत पड़ती है, तो दुकानदार स्ट्रिप काटकर दवा देने से मना कर देते हैं. ऐसे में परेशानी होती है.

केस स्टडी-2

हीरापुर के रहने वाले राजेश शुक्ला ने बताया कि वह मोंटेलुकास्ट और लेवोसेटिरिजिन नाम की दवा खरीदने दुकान पर गये थे. लेकिन दुकानदार ने दो या तीन दिन की दवा काटकर देने से मना कर दिया. अंंत में पूरा पत्ता खरीदना पड़ा. पारासिटामोल की दवा खरीदने में भी कई बार ऐसा ही हुआ है.

झारखंड ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन में कर सकते हैं शिकायत

झारखंड ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन इस मुद्दे पर बेहद संजीदा है. एसोसिएशन के धनबाद जिलाध्यक्ष ललित अग्रवाल कहते हैं कि कोई भी दवा दुकानदार किसी ग्राहक को दवा की पूरी स्ट्रिप खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है. ग्राहक को जितनी जरूरत हो, वह उतनी मात्रा में दवा लेने के लिए स्वतंत्र है. दुकानदार को स्ट्रिप से काट कर उतनी दवा देनी ही पड़ेगी. अगर राज्य का कोई भी दवा दुकानदार एसोसिशन के निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो ग्राहक उसकी शिकायत धनबाद ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन से कर सकता है. एसोसिएशन शिकायत के आधार पर संबंधित दवा दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई करेगा.

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Prabhat Khabar News Desk
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