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Dhanbad News: स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को मिलेगी नि:शुल्क डायग्नोस्टिक जांच सेवाएं

15वें वित्त आयोग की राशि से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती प्रदान करने के लिए डायग्नोस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर योजना को स्वास्थ्य विभाग ने दी मंजूरी

15वें वित्त आयोग से वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए प्राप्त राशि से जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में डायग्नोस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर सेवा शुरू की जायेगी. योजना के तहत सब हेल्थ सेंटर (एससीएच), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (यूपीएचसी) में डायग्नोस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जायेगा. इसके माध्यम से मरीजों को ब्लड टेस्ट, यूरीन टेस्ट, शुगर, हीमोग्लोबिन, थायरॉयड, लिवर व किडनी फंक्शन जैसी बुनियादी जांच सेवाओं के अलावा अल्ट्रासोनोग्राफी व एक्स-रे की सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध करायी जायेगी. इससे मरीजों को जिला अस्पताल व निजी लैब पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

धनबाद, गिरिडीह, बोकारो समेत राज्य के सभी जिलों में उपलब्ध होगी सुविधा

15वें वित्त आयोग के स्वास्थ्य अनुदान से धनबाद, बोकारो और गिरिडीह समेत पूरे झारखंड में डायग्नोस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण होगा. इससे इलाज से पहले जांच की अवधारणा को मजबूती मिलेगी तथा आम लोगों को बेहतर, सस्ती व सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी. पिछले दिनों स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में रांची में हुई 15वें वित्त आयोग की सातवीं राज्य स्तरीय समिति (एसएलसी) की बैठक में इस योजना को स्वीकृति प्रदान की गयी है.

धनबाद, बोकारो और गिरिडीह को मिलेगा सीधा लाभ

योजना के तहत धनबाद जिले को कुल 8,316.97 लाख रुपये का आवंटन मिला है. इसमें डायग्नोस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पीएचसी, एससीएच और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में अलग-अलग मदों की राशि शामिल है. वहीं बोकारो को 1,243.09 लाख रुपये तथा गिरिडीह को 5,864.95 लाख रुपये आवंटित किये गये हैं.

ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की गुणवत्ता में होगा सुधार

डायग्नोस्टिक सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा. अब सामान्य जांच के लिए लोगों को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी. खासकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी साबित हो सकती है. प्रारंभिक स्तर पर बीमारी की पहचान होने से गंभीर मामलों में रेफरल का दबाव भी कम होगा.

स्वास्थ्य कर्मियों और मरीजों दोनों को राहत

नई मशीनों और लैब सुविधाओं से स्वास्थ्य कर्मियों को भी जांच रिपोर्ट समय पर उपलब्ध होंगी. इससे उपचार में तेजी आयेगी. मरीजों को भी नजदीक ही नि:शुल्क जांच की सुविधा मिलेगी.

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