Bihar News: बिहार के औरंगाबाद जिले में मंगलवार की देर रात हुई. इस घटना ने सोते हुए किसानों की किस्मत को अंधेरे में धकेल दिया. जब सुबह ग्रामीण अपने खेतों की ओर टहलने निकले, तो नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. जिधर नजर जा रही थी, वहां लहलहाती रबी फसलों की जगह सिर्फ नहर का पानी ही पानी नजर आ रहा था.
रात में टूटा तटबंध, सुबह दिखी तबाही
किसानों के अनुसार मखरा बिगहा के पश्चिम में माली कोचहासा नहर का दक्षिणी तटबंध लगभग दस फीट तक टूट गया. धीरज कुमार, जयप्रकाश और बबन यादव ने बताया कि रात में किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी. सुबह खेतों में पानी भरा देख किसान हैरान रह गए. उनका कहना है कि नहर में पानी का बहाव भी अधिक नहीं था, फिर भी तटबंध का टूटना कई सवाल खड़े करता है.
जलभराव के कारण गेहूं, चना, मसूर और सरसों की फसलें पूरी तरह पानी में डूब गई हैं. ये फसलें पकने के करीब थीं, जिससे किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद थी. अब खेतों में भरे पानी से फसल सड़ने और पूरी तरह नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है. किसानों का कहना है कि यदि जल्द पानी की निकासी नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ जाएगा.
सिंचाई विभाग की सफाई और मरम्मत का दावा
सिंचाई विभाग के कनीय अभियंता विक्रम कुमार ने बताया कि तटबंध टूटने की सूचना मिलते ही विभाग सक्रिय हो गया है. मरम्मत के लिए मेठ को भेज दिया गया है और आज ही काम पूरा करा दिया जाएगा. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि तटबंध लगभग दस फीट नहीं, बल्कि करीब तीन फीट का आउटलेट टूटा है. विभागीय स्तर पर स्थिति का आकलन किया जा रहा है.
माली कोचहासा नहर की कुल लंबाई करीब 41 किलोमीटर है. यह पटना मुख्य नहर से निकलकर ओबरा के तेजपुरा लख क्षेत्र से होते हुए दाउदनगर, हसपुरा और माली तक जाती है. विभागीय सूत्रों के अनुसार तटबंध टूटने की यह घटना मुख्य बिंदु से 0 से 18 किलोमीटर के दायरे में हुई है. इस घटना ने नहर के रखरखाव और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
मुआवजे की मांग तेज
फसल डूबने से परेशान किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है. उनका कहना है कि यह नुकसान उनकी लापरवाही से नहीं, बल्कि तटबंध की कमजोरी के कारण हुआ है. यदि समय पर मरम्मत और जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो हालात और गंभीर हो सकते हैं.

