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Jharkhand News: सांसद की गोद में भी नहीं हुआ गांव का विकास, ना सड़क, ना पीने का पानी

सांसद महेश पोद्दार ने धनबाद के करमाटांड़ पंचायत को साल 2018 में गोद लिया था लेकिन 4 साल बीत जाने के बाद भी आज एक फुट भी सड़क नहीं बना है. साथ ही पीने के लिए पानी की व्यवस्था भी नहीं है

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
महेश पोद्दार द्वारा गोद लिया गांव में सड़क हाल
महेश पोद्दार द्वारा गोद लिया गांव में सड़क हाल
प्रभात खबर

धनबाद : सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित धनबाद के बलियापुर प्रखंड के करमाटांड़ पंचायत का हुचुकटांड़ किसी भी मायने में आदर्श नहीं बन पाया. चार वर्ष बाद भी इस गांव को जाने के लिए मुख्य सड़क नहीं बन पायी. हिचकोले खा कर गांव तक जाना पड़ता है. साथ ही यहां पर पानी की व्यवस्था नहीं हो पायी. पीने के लिए भी पानी एक से डेढ़ किलोमीटर दूर से लाना पड़ता है.

सांसद महेश पोद्दार ने वर्ष 2018 में लिया था गोद :

राज्यसभा सदस्य महेश पोद्दार ने वर्ष 2018 में सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत बलियापुर प्रखंड के करमाटांड़ प्रखंड के हुचुकटांड़ को गोद लिया था. शुरू में इस योजना को लेकर काफी उत्साह था. हुचुकटांड़ गांव के लोगों को उम्मीद थी कि अब यहां की समस्याएं दूर हो जायेंगी. खासकर उनके गांव तक आने वाली कच्ची सड़क पक्की बन जायेगी.

साथ ही हर घर जल, हर घर नल के तहत घरों तक पाइपलाइन के जरिये जलापूर्ति होगी. धनबाद-बलियापुर मुख्य मार्ग से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित यह गांव दो रेल लाइन के बीच में है. इस गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क निर्माण के लिए कई बार कोशिशें हुई. रेलवे से एनओसी का मामला फंसता रहा. कई बार सांसद ने इस मुद्दे को लेकर पूर्व मध्य रेल के जीएम सहित कई अधिकारियों से बातचीत भी की. कहा गया था कि एनओसी दे दिया जायेगा.

बरसात में बच्चों का स्कूल जाना भी मुश्किल :

ग्रामीणों के अनुसार मुख्य सड़क नहीं बनने के कारण भारी परेशानी हो रही है. रात में वाहन चलाने में काफी समस्या होती है. बरसात में पैदल चलना भी मुश्किल होता है. खासकर माध्यमिक व उच्च विद्यालय के छात्रों को बारिश के समय हाथ में जूता, चप्पल ले कर स्कूल जाना पड़ता है. चार पहिया नहीं चल पाता है. दुपहिया वाहन के भी फिसलने का डर रहता है. हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.

सोलर टंकी, कुआं से लाते हैं पानी :

हुचुकटांड़ गांव की आबादी लगभग आठ सौ है. यहां पर पेयजल की व्यवस्था गांव के अंतिम छोर पर है. एक चापाकल है जो काफी दिनों से खराब है. एक सोलर टंकी है, जिसका नल चोरों ने उखाड़ लिया है. ग्रामीण यहां एक कुआं से पीने का पानी लाते हैं. गांव के प्रवेश स्थल से कुआं की दूरी एक किलोमीटर से अधिक है. वहीं एक तालाब व जोरिया भी है, जहां लोग नहाते हैं. सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित होने के बाद गांव में पेयजल के लिए पाइपलाइन बिछायी गयी. लेकिन, आज तक यहां हर घर नल, हर घर जल योजना के तहत लोगों को पानी नहीं मिल पाया.

सरकार बदलते ही बदल गयीं प्राथमिकताएं : पोद्दार

सांसद महेश पोद्दार कहते हैं कि सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत शुरुआत में अच्छा काम हुआ. बेसलाइन सर्वे वगैरह हुआ. बीच में राज्य की सरकार बदलने के बाद प्राथमिकताएं बदल गयी. सांसद आदर्श ग्राम अब फोकस में नहीं रह गया है. कई बार अधिकारियों से भी बातें की. राज्य सरकार को इसकी समीक्षा करनी चाहिए.

क्योंकि विकास कार्य होने से गांव तथा आस-पास के रहने वाले लोगों को लाभ होता है. यह राष्ट्रीय कार्यक्रम है. सभी सरकारों को इस पर ध्यान देना चाहिए. इसके लिए सभी विभाग को प्राथमिकता के आधार पर काम करना चाहिए. एक बार फिर से रेलवे एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों से बात करेंगे.

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रिपोर्ट- संजीव झा

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