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Dhanbad News : पुश्तैनी संपत्ति में बुआ और बहन वैध हिस्सेदार होते हैं, इन्हें नजर अंदाज नहीं किया जा सकता

Updated at : 14 Apr 2025 12:25 AM (IST)
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Dhanbad News : पुश्तैनी संपत्ति में बुआ और बहन वैध हिस्सेदार होते हैं, इन्हें नजर अंदाज नहीं किया जा सकता

प्रभात खबर के लीगल काउंसेलिंग में वरिष्ठ अधिवक्ता बिजन रवानी ने लोगों के सवालों का दिया जवाब

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भूमि, संपत्ति और पारिवारिक विवादों को कानूनी रास्ता अपनाने से पहले आपसी सहमति से सुलझाने का प्रयास करना चाहिए. कई बार ऐसे मामले केवल बातचीत और समझौते से हल हो सकते हैं. अदालतों के चक्कर में पड़ने से समय और धन दोनों की हानि होती है. यह सुझाव रविवार को प्रभात खबर ऑनलाइन लीगल काउंसेलिंग के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता बिजन रवानी ने दी. कहा कि पहले आपसी संवाद और मध्यस्थता के माध्यम से हल करने की कोशिश करनी चाहिए. इससे न केवल मानसिक शांति बनी रहती है, बल्कि आर्थिक नुकसान से भी बचाव होता है.

चिरकुंडा से रीना कुमारी का सवाल :

पिताजी और चाचा जी के बीच काफी पहले पारिवारिक संपत्ति का बंटवारा हो चुका है. इसका पंचायतनामा पास में है. लेकिन अब बुआ इसमें अपना हिस्सा मांग रहीं हैं. क्या करना चाहिए?

अधिवक्ता का जवाब :

हिंदू सकसेशन एक्ट के अनुसार पारिवारिक संपत्ति पर आपकी बुआ और बहन का भी अधिकार बनता है. अगर बुआ ने पिताजी और चाचा जी के बीच हुए बंटवारे के समय बंटवारे के कागजात पर हस्ताक्षर नहीं किया है, तो उनका दावा कानूनी रूप से वैध है. बेहतर होगा कि परिवार के साथ बैठकर आपस इसमें मामले का निबटारा करें.

तिसरा से विक्रांत सिंह का सवाल :

क्या बीसीसीएल किसी जमीन का अधिग्रहण किये बिना उस पर खनन कार्य कर सकता है ?

अधिवक्ता का जवाब :

बीसीसीएल या कोई अन्य सरकारी लोक उपक्रम किसी भी जमीन का उपयोग तभी कर सकता है, जब वह इसका अधिग्रहण करे. अगर इसके बाद भी ऐसा कोई मामला है, तो उसे न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है.

गिरिडीह से अभिजीत सेनगुप्ता का सवाल :

किसी व्यक्ति ने जमीन का फर्जी कागजात बनाकर उस पर कब्जा कर लिया है. उसके खिलाफ थाना में केस भी किया है, लेकिन इसमें मामले में कोई प्रगति नहीं दिख रहा है ?

अधिवक्ता का जवाब :

इस मामले में सबसे बेहतर यह होगा कि सिविल कोर्ट में केस पिटीशन केस फाइल हो. थाना से राहत नहीं मिलेगी. कब्जाधारी को पार्टी बनाते हुए केस करना ही होगा.

धनबाद से रामकिशोर वर्णवाल का सवाल :

दादाजी के नाम पर खतियानी जमीन है. गोतिया जो दादा जी के भाई का परिवार हैं, अब इस जमीन पर दावेदारी कर रहे हैं. क्या करना चाहिए ?

अधिवक्ता का जवाब :

यहां पहले यह देखना होगा कि दादाजी और उनके भाइयों के बीच बंटवारा हुआ था या नहीं. अगर बंटवारा हो गया था, तो दादाजी के भाइयों के परिवार का कोई भी दावा जमीन पर नहीं बनेगा. लेकिन आपको बंटवारे से संबंधित कागजात प्रस्तुत करने होंगे.

कसमार से गिरधारी महतो का सवाल :

1961 में पिताजी ने खतियानी जमीन खरीदी थी. अब इस विक्रेता के परिवार कोई सदस्य जमीन में आधा हिस्सा मांग रहा है. क्या करना चाहिए ?

अधिवक्ता का जवाब :

1961 में पिताजी ने, जो जमीन खरीदी थी, उसका रजिस्टर्ड बैनामा (बिक्री पत्र) दस्तावेज पास में होना चाहिए. नये सर्वे में उस जमीन का नाम पिताजी के नाम चढ़ा हुआ है या नहीं यह देख लें. इसे ऑनलाइन या अंचल कार्यालय में चेक करें. जमीन किससे खरीदी गयी थी? क्या यह एक साझा जमीन थी या किसी एक की व्यक्तिगत ? खतियान और जमाबंदी की नकल निकालें, जिससे साबित हो कि जमीन किसके नाम दर्ज है.

बाघमारा से संजय कुमार साहू का सवाल :

2021 में एक प्लॉट लिया था. उस प्लॉट का म्यूटेशन करवा लिया है, रसीद भी कट रहा है और ऑनलाइन भी दर्ज है. लेकिन जमीन लेते वक्त यह नहीं पता था कि उस प्लॉट को पहले भी एक व्यक्ति को बेचा गया था. उस व्यक्ति ने जिससे विक्रेता को पार्टी बनाते हुए प्लॉट पर केस कर दिया है. अब क्या करना चाहिए ?अधिवक्ता का जवाब :

सबसे पहले यह जांचें कि उस केस में प्रतिवादी बनाये गये हैं या नहीं. यदि आपको अब तक कोई

नोटिस नहीं मिला है, तो भी बेहतर होगा कि केस की जानकारी जुटाएं. चूंकि यह जमीन वैध रूप से खरीदी गयी है और अब वह जमीन आपके कब्जे व नाम पर है, तो आपको खुद को उस मुकदमे में “नेसेसरी पार्टी ” बनवाना चाहिए, ताकि कोर्ट में अपनी बात रख सकें.

चंद्रपुरा से अजीत कुमार का सवाल :

2011 में एक प्लॉट को खरीदने के लिए एग्रीमेंट किया था. एग्रीमेंट में रजिस्ट्री के लिए कोई समयावधि तय नहीं की गयी थी. पता चल रहा है कि वह जमीन सीएनटी के तहत आ गयी है. पैसा वापस लेने के लिए उसे वकील के माध्यम से नोटिस भी भेजा था. लेकिन फिर भी वह पैसा नहीं दे रहा है. क्या करना चाहिए ?

अधिवक्ता का जवाब :

इस मामले में एग्रीमेंट की प्रति के साथ कोर्ट में केस करें. कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए वकील रख लें. उस पार्टी को आपको पैसा लौटाना ही होगा.

बोकारो पीतांबर प्रसाद महतो का सवाल :

पिताजी के नाम पर 1932 के खतियान में दर्ज है. संबंधित सभी कागजात पास में है, लेकिन गोतिया के लोगों ने जमीन का फर्जी कागजात बनाकर उसे दूसरे को बेच दिया है. क्या करना चाहिए ?

अधिवक्ता का जवाब :

इस मामले में दूसरी पार्टी का बिक्री पत्र रद्द करने के लिए सिविल कोर्ट में पिटीशन केस फाइल करना होगा. इसलिए अच्छा होगा कि आप सारे कागजात के साथ वकील से संपर्क करें.

राजधनवार से सुधीर कुमार भारती का सवाल

: काफी पहले 40 डिसमिल जमीन खरीदी थी. इस जमीन से संबंधित सभी कागजात पास है. नियमित रूप से 40 डिसमिल जमीन की रसीद भी कटवाता आ रहा हू. लेकिन मेरी इस प्लॉट से 2.33 डिसमिल जमीन विक्रेता के नाम पर चढ़ गया है. कई बार शिकायत की, लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है . अब क्या करना चाहिए ?

अधिवक्ता का जवाब :

जितनी जमीन खरीदी थी. उसका रसीद भी कट रहा है. इस मामले में सबसे पहले आप अंचल अधिकारी के पास शिकायत दीजिए और उन्हें वस्तु स्थिति से अवगत करवाइए. इसके बाद भी अगर बात नहीं बनती है, तो उपायुक्त से इस फर्जीवाड़े की शिकायत करें.

रजगंज से नीलकंठ रवानी का सवाल :

पुलिस द्वारा कई बार हादसे के गवाह के रूप में नाम दे दिया जाता है. इसकी जानकारी तक मुझे नहीं होती है. इसका पता मुझे तब चलता है, जब कोर्ट से मुझे गवाही के लिए समन मिलता है. इन सब चीजों से काफी परेशान हूं क्या करना चाहिए?

अधिवक्ता का जवाब :

चूंकि हादसों के मामले में गवाह हैं, इसलिए कोर्ट तो जाना ही होगा. वहां आपको अपनी गवाही दर्ज करवानी ही होगी.

इन्होंने भी पूछे सवाल

: गिरिडीह से सूर्य नारायण सिंह, राजगंज से गणेश रवानी, गिरिडीह से जगत नारायण, दुग्दा से हरेंद्र मल्लाह, निरसा से मनीष कुमार, गोपीनाथडीह से शक्तिनाथ पाठक.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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By NARENDRA KUMAR SINGH

NARENDRA KUMAR SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

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