IIT ISM Convocation: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गूगल और चैटजीपीटी को बताया डिस्टर्बिंग गुरु, स्टूडेंट्स को दी ये सलाह

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आईआईटी आईएसएम धनबाद के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (बाएं से दाएं)

IIT ISM Convocation: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को आईआईटी आईएसएम धनबाद के 45वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि गूगल और चैटजीपीटी डिस्टर्बिंग गुरु बन रहे हैं. इससे निपटने के लिए सोचना होगा. आप इंजीनियर नहीं, देश के भावी निर्माता हैं. सिर्फ नौकरी के लिए प्रयास नहीं करें, बल्कि नौकरी देने वाले बनें. स्टार्टअप के लिए प्रयास करें.

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IIT ISM Convocation: धनबाद-आईआईटी आईएसएम धनबाद के 45वें दीक्षांत समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि गूगल और चैटजीपीटी डिस्टर्बिंग गुरु बन रहे हैं. इससे निपटने के लिए सोचना होगा. सिर्फ नौकरी के लिए प्रयास नहीं करें, बल्कि नौकरी देने वाले बनें. एक बड़ी जिम्मेदारी है. स्टार्टअप के लिए प्रयास करें. डिग्री से ज्यादा कंपीटेंसी होती है. आप इंजीनियर नहीं, देश के भावी निर्माता हैं. भगवान बिरसा मुंडा और महात्मा गांधी अगर साधारण जिंदगी चुनते तो शायद यह देश आजाद नहीं होता. देश के नेतृत्व की चुनौतियों को स्वीकार करने को तैयार रहें. भारत को दुनिया की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार करना होगा.

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गुलामी काल में था यह दूसरा तकनीकी शिक्षण संस्थान-धर्मेंद्र प्रधान


भगवान बिरसा मुंडा की धरती पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि शिक्षा का कोई अंत नहीं होता. यह तो एक पड़ाव है. यहां के नए छात्रों से मिलने का मौका मिला. गुलामी काल में यह दूसरा तकनीकी शिक्षण संस्थान था. यह शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहा है. कोयला की राजधानी भले ही धनबाद को कहा जाता है, लेकिन आज सबसे ज्यादा कोयला उत्पादन ओडिशा में हो रहा है. कोयला से उनका नाता बचपन से रहा है. पेट्रोलियम मंत्री रहते हुए भी आईआईटी आईएसएम से वे जुड़े रहे.

वट वृक्ष की तरह खुद को करें विकसित-धर्मेंद्र प्रधान


केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आज परिस्थितियां सहज नहीं हैं. असहजता के बीच अपने को वट वृक्ष की तरह विकसित करना होगा. देश और दुनिया के लिए कुछ करना होगा. आज सभी अपने अधिकार को लेकर चिंतित हैं, लेकिन जिम्मेदारी लेने को लेकर नहीं. यह जिम्मेदारी लेने का समय है, ताकि दूसरे के अधिकारों की भी रक्षा हो. अलग सोचने के लिए आपको साहसी बनना होगा. आपके मन में जो इच्छा है उसे पूरा करो.

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