सुविधाओं के अभाव में बर्बाद हो रहे धनबाद के टेबल टेनिस खिलाड़ी, BCCL के रहमों करम पर चल रहा एसोसिएशन
धनबाद जिला टेबल टेनिस एसोसिएशन को बीसीसीएल ने कोयला नगर के नेहरू कॉम्प्लेक्स में जगह दी है. कई सालों से एसोसिएशन की गतिविधियां वहां संचालित हैं.
शोभित रंजन, धनबाद : धनबाद जिला टेबल टेनिस एसोसिएशन वर्ष 1990 से संचालित है, लेकिन इतने सालों में जिला प्रशासन की तरफ से टेबल टेनिस एसोसिएशन के लिए कुछ नहीं किया गया है. टेबल टेनिस खेल के लिए ना स्टेडियम की व्यवस्था है और ना ही कोई कोर्ट है. लेकिन इस खेल में करियर बनने के लिए शहर के युवा पसीना बहा रहे हैं. सुविधाओं की कमी से खिलाड़ियों को इस खेल की उच्च स्तरीय ट्रेनिंग के लिए कोलकाता व अन्य शहर जाना पड़ता है. वहां रह कर तैयारी करने में काफी खर्च आता है, जो सभी के वश की बात नहीं है. ऐसी स्थिति में कई स्तरीय खिलाड़ियों की प्रतिभा जिले में ही दम तोड़ देती है.
मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में उग आये हैं घास :
शहर के नावाडीह में मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनवाया गया है. मगर वहां किसी खेल के लिए कोई सुविधा नहीं है. ग्राउंड में घास उग आए हैं. वहां ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ट्रायल होता है.
बीसीसीएल ने दी है जगह :
धनबाद जिला टेबल टेनिस एसोसिएशन को बीसीसीएल ने कोयला नगर के नेहरू कॉम्प्लेक्स में जगह दी है. कई सालों से एसोसिएशन की गतिविधियां वहां संचालित हैं. एसोसिएशन को सिर्फ जगह ही नहीं, बल्कि सारा इंफ्रास्ट्रक्चर बीसीसीएल ही मुहैया कराता है.
क्या कहते हैं सचिव
टेबल टेनिस एसोसिएशन के सचिव साकेत सिन्हा ने बताया कि एसोसिएशन को आज तक जिला प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली है. बीसीसीएल व आपसी मदद से एसोसिएशन चल रहा है. खिलाड़ियों को फंड भी खुद से लगाना पड़ता है. जिले के खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के लिए कोच की भी व्यवस्था एसोसिएशन ही करता है. बोर्ड व बेसिक सामग्री भी खुद खरीदनी पड़ती है. इस वजह से जिले में राष्ट्रीय प्रतियोगिता भी नहीं करा पाते हैं. राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए 16 बोर्ड चाहिए, मगर यहां सिर्फ तीन ही हैं. अगर बीसीसीएल मदद नहीं करें तो टेबल टेनिस एसोसिएशन का संचालन मुश्किल है.
जानें क्या-क्या है परेशानी
- टेबल टेनिस एसोसिएशन के पास नहीं है अपना कोई स्टेडियम
- जिला प्रशासन की तरफ से एसोसिएशन को कोई सहायता नहीं
- खेल के लिए बोर्ड की कमी से नहीं हो पाते हैं राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट
- टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए खिलाड़ियों को खर्च करने पड़ते हैं अपने पैसे
- खेल की तैयारी के लिए जिले में कोच की है कमी
- उच्च स्तरीय अभ्यास के लिए रहना पड़ता है बाहर के शहरों में
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By Sameer Oraon
समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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