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नक्सलवाद की तरह खत्म होगी कोयला चोरी, दिसंबर में आ सकता है आईपीओ, बोले बीसीसीएल के सीएमडी

Updated at : 01 Dec 2025 8:27 PM (IST)
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BCCL CMD Dhanbad Manoj Kumar Agrawal Jharkhand

बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल. फोटो : प्रभात खबर

BCCL CMD Dhanbad: बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा है कि नक्सलवाद की तरह खत्म कोयला चोरी को भी खत्म किया जायेगा. उन्होंने कहा कि बीसीसीएल में लापरवाह अधिकारियों को बर्दाश्त नहीं किाय जायेगा. दिसंबर में बीसीसीएल का आईपीओ आ सकता है. मनोज अग्रवाल प्रभात खबर के दफ्तर में प्रभात खबर संवाद में पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे. श्रम कानून और अन्य मुद्दों पर भी उन्होंने बात की.

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BCCL CMD Dhanbad: नक्सलवाद की तरह कोयला चोरी का भी खात्मा होगा. भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) का आईपीओ दिसंबर में आ सकता है. यह कहना है कि बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल का. वह प्रभात बर के धनबाद कार्यालय में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे. प्रभात खबर संवाद में बीसीसीएल के सीएमडी ने कोयला उद्योग के भविष्य से लेकर नये श्रम कानून एवं झरिया मास्टर प्लान के क्रियान्वयन के सवालों का खुलकर जवाब दिया.

बीसीसीएल का भविष्य उज्जवल – मनोज अग्रवाल

सीएमडी ने कहा कि बीसीसीएल का भविष्य उज्जवल है. देश में कोकिंग कोल की मांग आने वाले दिनों में घटने की बजाय बढ़ने वाली है. भारत में सबसे ज्यादा कोकिंग कोल का स्टॉक बीसीसीएल के पास है. इस्पात उद्योग के लिए कोकिंग कोल की सबसे ज्यादा जरूरत है. कंपनी कोयले के इतर सीबीएम और सोलर प्लांट जैसे डायवर्सिफिकेशन प्रोजेक्ट पर भी तेजी काम कर रही है. जल्द ही सीबीएम का उत्पादन शुरू होने की संभावना है.

मजदूर विरोधी नहीं है श्रम कानून – बीसीसीएल सीएमडी

मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि नये श्रम कानून से मजदूरों को लाभ होगा. यह कहीं से भी मजदूर विरोधी नहीं है. इससे जेंडर भेद समाप्त हुआ है. सबको काम का बराबर मौका मिलेगा. आने वाले समय में कोयला चोरी समाप्त होगी. नक्सलवाद की तरह इसका भी अंत होगा. झरिया के अग्नि एवं भू-धंसान प्रभावितों के लिए मंजूर रिवाइज्ड मास्टर प्लान का हर हाल में क्रियान्वनय होगा. जून 2028 तक तय समय-सीमा में सभी कार्य होंगे.

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BCCL CMD Dhanbad: 4 नये श्रम कानून से होगा लाभ

कोयला उद्योग में नये श्रम कानूनों के विरोध के सवाल पर कहा कि नये श्रम कानून से किसी को चिंतित होने की जरूरत नहीं है. यह मजूदरों के हित में है. सरल भाषा में कहें कि पहले जहां मजदूरों के लिए 29 कानून थे. अब सिर्फ 4 रह गये हैं. अब महिलाएं भी कोयला उद्योग में 24 घंटे काम कर सकती हैं. पहले महिलाओं को रात में ड्यूटी नहीं दी जाती थी. काम का घंटा भी तय हो गया है. ठेका मजदूरों को भी न्यूनतम मजदूरी मिलेगी. साथ ही मेडिकल सुविधाएं एवं बीमा का लाभ मिलेगा.

कोढ़ है कोयला चोरी, चंद लोगों को ही लाभ – अग्रवाल

कोयला चोरी की चुनौती पर उन्होंने कहा कि कोयला चोरी जल्द ही समाप्त होगी. नक्सलवाद की तरह इसका भी अंत होगा. कोयला चोरी कोढ़ है. इससे चंद लोगों को ही लाभ होता है. कोयला चोरी में लगे लोग बहुत कठिन श्रम करते हैं. उन्हें कई तरह की समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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