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वर्क्‍स कमेटी का यूनियनों ने किया विरोध

धनबाद: कोल इंडिया में वर्क्‍स कमेटी के गठन का पांच केंद्रीय यूनियनों ने विरोध किया है. कोलकाता में उप मुख्य श्रमायुक्त (के) के यहां सुनवाई मे सोमवार को यूनियन प्रतिनिधियों ने लिखित रूप से विरोध जताया. आज की सुनवाई के बाद उप मुख्य श्रमायुक्त (के) अपनी रिपोर्ट दिल्ली मुख्य श्रमायुक्त को भेजेंगे. मुख्य श्रमायुक्त के […]

धनबाद: कोल इंडिया में वर्क्‍स कमेटी के गठन का पांच केंद्रीय यूनियनों ने विरोध किया है. कोलकाता में उप मुख्य श्रमायुक्त (के) के यहां सुनवाई मे सोमवार को यूनियन प्रतिनिधियों ने लिखित रूप से विरोध जताया. आज की सुनवाई के बाद उप मुख्य श्रमायुक्त (के) अपनी रिपोर्ट दिल्ली मुख्य श्रमायुक्त को भेजेंगे. मुख्य श्रमायुक्त के निर्देश के आलोक मे ही आज कोलकाता में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान एसक्यू जामा (इंटक), नथ्थु लाल पांडेय (एचएमएस), केके कर्ण (एटक), मानस मुखर्जी (सीटू) और विदेंश्वरी प्रसाद (बीएमएस) उपस्थित थे.
क्या है मामला : औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत कोल इंडिया प्रबंधन ने अपनी अनुषंगी इकाइयों मे वर्क्‍स कमेटी गठित करने की सूचना जारी की. ट्रेड यूनियनों ने इसका विरोध किया. श्रम मंत्रलय के दबाव में कोल इंडिया वर्क्‍स कमेटी गठन के लिए सक्रिय हो उठा. यूनियनों के विरोध को देखते हुए मामला मुख्य श्रमायुक्त के यहां पहुंचा. मुख्य श्रमायुक्त ने उप मुख्य श्रमायुक्त को सुनवाई करने का निर्देश दिया.
यूनियनों की दलीलें : पांचों केंद्रीय यूनियनों के प्रतिनिधियों ने कोल इंडिया प्रबंधन द्वारा वर्क्‍स कमेटी गठन के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि कोल इंडिया में यूनिट से लेकर मुख्यालय तक कई कमेटियां हैं, जो मजदूरों की समस्याओं का समाधान करती है. निजी खान मालिकों के समय भी वर्क्‍स कमेटी नहीं थी. वर्क्‍स कमेटी होने से यूनियनों की सदस्यता प्रभावित होगी एवं कायदे कानून का हनन होगा. वर्तमान समय मे कोल इंडिया मे वर्क्‍स कमेटी की कोई जरूरत नहीं है.
क्या है वर्क्‍स कमेटी
औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत मजदूर एवं प्रबंधन के बीच सौहार्द बनाये रखने एवं श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए सौ या सौ से अधिक कामगारों वाले उद्योग में वर्क्‍स कमेटी गठित होगी. सदस्यों की संख्या अधिकतम 20 होगी. आधे सदस्य प्रबंधन के, आधे कर्मचारी होंगे. कर्मी सदस्यों का चुनाव मतदान से होगा. सभी कर्मचारी मतदान करेंगे. मतदान की तिथि प्रबंधन घोषित करेगा. कमेटी का चेयरमैन और सचिव प्रबंधन का होगा. जबकि सह चेयरमैन और संयुक्त सचिव का चुनाव कर्मियों के प्रतिनिधि करेंगे. कम से कम कम तीन माह में एक बार कमेटी की बैठक जरूरी है. वैसे जब जरूरत हो तब कमेटी की बैठक हो सकती है. कमेटी का कार्यकाल दो वर्षो का होगा. बीसीसीएल मे वर्क्‍स कमेटी गठित नहीं करने पर कंपनी के कई महाप्रबंधकों पर सहायक श्रमायुक्तों (के) ने मुकदमा भी दायर किया है.
नेताओं ने कहा
बहुत पहले हमलोगों ने लिख कर दे दिया है कि कोल इंडिया मे वर्क्‍स कमेटी की जरूरत नहीं है. यहां नीचे से ऊपर तक कमेटी है. यह अधिनियम 1947 का है. पहले नहीं बना. अब सरकार की नींद खुल रही है.
रमेंद्र कुमार, अध्यक्ष एटक
वर्क्‍स कमेटी स्थायी कामगारों के लिए है. कोल इंडिया मे हर स्तर पर द्विपक्षीय कमेटियां है, जिसमे ठेका मजदूरों की समस्याओं पर चर्चा एवं निर्णय होता है. वर्तमान समय में वर्क्‍स कमेटी की जरूरत नहीं है. हम पांचों ने आज इसका विरोध किया है.
मानस मुखर्जी, सीटू
Prabhat Khabar Digital Desk
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