बाजार समिति के गेट पर आज से माैन धरना देंगे व्यवसायी

Updated at : 19 Dec 2019 2:52 AM (IST)
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बाजार समिति के गेट पर आज से माैन धरना देंगे व्यवसायी

धनबाद : कृषि बाजार समिति परिसर को सील किये जाने से व्यवसायी आंदोलित हैं. उन्होंने 19 से 23 दिसंबर तक सुबह 11 से शाम छह बजे तक कृषि बाजार समिति के मुख्य द्वार पर मौन धरना देने का निर्णय लिया है. इससे पहले जिला चेंबर के नेतृत्व में खाद्यान्न व्यवसायी संघ का प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से […]

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धनबाद : कृषि बाजार समिति परिसर को सील किये जाने से व्यवसायी आंदोलित हैं. उन्होंने 19 से 23 दिसंबर तक सुबह 11 से शाम छह बजे तक कृषि बाजार समिति के मुख्य द्वार पर मौन धरना देने का निर्णय लिया है. इससे पहले जिला चेंबर के नेतृत्व में खाद्यान्न व्यवसायी संघ का प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से मिला और वैकल्पिक मार्ग की मांग की.

कहा गया कि खंड ‘क’ परिसर को सील किया गया है. मछली पट्टी (खंड ख) से वैकल्पिक मार्ग दिया जा सकता है. 11 दिनों तक मंडी बंद रही, तो लाखों का माल खराब हो जायेगा. रिटेल बाजार में सामानों की किल्लत शुरू हो जायेगी.

जिला खाद्यान्न व्यवसायी संघ के अध्यक्ष विनोद गुप्ता ने कहा कि उपायुक्त अमित कुमार ने स्पष्ट कहा है कि प्लानिंग करते समय व्यापारियों के पक्ष को ध्यान में नहीं रखा गया. उन्होंने कहा कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से वैकल्पिक मार्ग की अनुमति नहीं दी जा सकती है. प्रतिनिधिमंडल में जिला चेंबर अध्यक्ष राजेश गुप्ता, महासचिव चेतन गोयनका, शिवाशीष पांडेय, अजय नारायण लाल, खाद्यान्न व्यवसायी संघ के अध्यक्ष विनोद गुप्ता, महासचिव विकास कंधवे, दीपू कटेसरिया, अशोक सर्राफ, सुरेंद्र जिंदल थे.
जीटी रोड पर 200 ट्रक, एक दिन में छह लाख डैमरेज : जिला खाद्यान्न व्यवसायी संघ के महासचिव विनोद गुप्ता ने कहा कि जीटी रोड पर पांच दिनों से खाद्यान्न के लगभग 200 ट्रक खड़े हैं. खाद्यान्न व्यवसायियों को क्षतिपूर्ति के रूप में ट्रकवालों को छह लाख रुपये प्रतिदिन देना पड़ रहा है. जिला प्रशासन की ओर से 11 दिनों की बंदी की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गयी थी.
लिहाजा खाद्यान्न मंडी के व्यवसायियाें ने अपने हिसाब से राजस्थान, मध्यप्रदेश, यूपी, गुजरात आदि राज्यों से लगभग 200 ट्रक माल मंगा लिया. 14 दिसंबर से जीटी रोड पर ट्रक खड़े हैं. एक ट्रक का डैमरेज 3000 रुपया देना पड़ रहा है. एक दिन में छह लाख रुपया लग रहे हैं. 11 दिनों में हम व्यवसायियों को 66 लाख सिर्फ क्षतिपूर्ति के रूप में देना पड़ेगा. इसके अलावा स्टाफ खर्च व दुकान का किराया अलग से लगेगा.
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