निगम और ए टू जेड विवाद में सड़ गयी 4.75 करोड़ रुपये की टिपर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Aug 2019 7:54 AM
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धनबाद : नगर निगम व ए टू जेड के विवाद में 4.72 करोड़ की टिपर खड़े-खड़े सड़ गयी. पांच साल से मामला आर्बिटेशन में चल रहा है. ए टू जेड ने निगम पर 77 करोड़ व निगम ने ए टू जेड पर 168 करोड़ का दावा ठोका है. ए टू जेड की गवाही चल रही […]
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धनबाद : नगर निगम व ए टू जेड के विवाद में 4.72 करोड़ की टिपर खड़े-खड़े सड़ गयी. पांच साल से मामला आर्बिटेशन में चल रहा है. ए टू जेड ने निगम पर 77 करोड़ व निगम ने ए टू जेड पर 168 करोड़ का दावा ठोका है. ए टू जेड की गवाही चल रही है. तीन अगस्त को इसकी गवाही है. इसके बाद निगम अपना पक्ष रखेगा.
आर्बिटेटर के फैसले के बाद ही टिपर पर निर्णय होगा. ऑर्बिटेटर रिटायर्ड जज यूपी सिंह हैं, जबकि ए टू जेड का को- ऑर्बिटेटर तिलक राज अरोड़ा व निगम का को-ऑर्बिटेटर अनिल कुमार हैं.
क्या है मामला : फरवरी 2012 में ए टू जेड व निगम के बीच करार हुआ था. अक्तूबर 2012 से ए टू जेड ने ठोस कचरा प्रबंधन का काम शुरू किया. एग्रीमेंट के मुताबिक कचरा डिस्पोजल के लिए 20 दिनों के अंदर ए टू जेड को जमीन देनी थी.
निगम की पहल पर बीसीसीएल ने ए टू जेड को सियालगुदरी (पुटकी) में 33 एकड़ जमीन दी. इधर, सफाई को लेकर नगर निगम व ए टू जेड में विवाद शुरू हो गया. दिसंबर 2013 को ए टू जेड ने अपना काम समेट लिया.
लिहाजा नगर निगम ने ए टू जेड की 2.25 करोड़ की सिक्युरिटी मनी जब्त कर ली. इसके खिलाफ ए टू जेड ने सिविल कोर्ट में स्टे के लिए अर्जी दी, लेकिन कोर्ट ने स्टे नहीं दिया. इसके बाद ए टू जेड ने 2014 में हाइकोर्ट में रिट फाइल की. हाइकोर्ट ने मामले को ऑर्बिटेशन में जाने का निर्देश दिया. 2015 से मामला आर्बिटेशन में चल रहा है.
ए टू जेड के साथ 30 साल का हुआ था करार
निगम के लीगल ऑफिसर मनीष अग्रवाल के मुताबिक ए टू जेड के साथ नगर निगम का 30 साल के लिए करार हुआ था. इसके लिए 35 करोड़ ग्रांट राशि थी. गाड़ी खरीदने के लिए ए टू जेड को 4.70 करोड़ रुपया दिया गया. ए टू जेड ने निगम की जगह अपने नाम से गाड़ी खरीद ली. ए टू जेड ने मुश्किल से डेढ़ साल तक धनबाद में काम किया.
2019 से रैमकी ने संभाला कचरा प्रबंधन का काम
ठोस कचरा प्रबंधन का काम अब रैमकी कर रही है. वेस्ट टू एनर्जी के प्लांट को लेकर अब तक रैमकी को जमीन नहीं मिली है. पुटकी की 33 एकड़ जमीन को दिखाकर टेंडर तो किया गया लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण यहां वेस्ट टू एनर्जी का प्लांट लगना संभव नहीं हो पाया. सिंदरी में 45 एकड़ जमीन को लेकर बातचीत चल रही है.
अब तक निगम को एनओसी नहीं मिला है. फिलहाल रैमकी शहर के 14 वार्डों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का काम शुरू किया है. ए टू जेड को 410 रुपये प्रति टन पर कचरा उठाव का टेंडर था, जबकि रैमकी को 2000 रुपये प्रति टन कचरा उठाव का टेंडर है.
- आर्बिटेशन में चल रहा मामला, कल होगी गवाही
- फरवरी 2012 में नगर निगम ने ए टू जेड से किया करार
- दो अक्तूबर 2012 से ए टू जेड ने शुरू की सफाई
- दिसंबर 2013 में ए टू जेड ने काम कर दिया बंद
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