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जी-8 ग्रेड के नाम पर वाशरी-5 ग्रेड के कोयला की बिक्री, 100 % ग्रेड स्लीपेज से 150 करोड़ का नुकसान

Updated at : 18 May 2019 11:09 AM (IST)
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जी-8 ग्रेड के नाम पर वाशरी-5 ग्रेड के कोयला की बिक्री, 100 % ग्रेड स्लीपेज से 150 करोड़ का नुकसान

मनोहर कुमार-बीसीसीएल के लोदना एरिया का मामलाधनबाद : गत वित्तीय वर्ष (218-19) में बीसीसीएल के लोदना एरिया में कोयला के ग्रेड में 100 % स्लिपेज से कंपनी को करीब 150 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. ग्रेड में स्लिपेज का सिलसिला चालू वित्तीय वर्ष (2019-20) में बदस्तूर जारी है. वर्तमान में भी करीब 90-95 प्रतिशत […]

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मनोहर कुमार
-बीसीसीएल के लोदना एरिया का मामला
धनबाद :
गत वित्तीय वर्ष (218-19) में बीसीसीएल के लोदना एरिया में कोयला के ग्रेड में 100 % स्लिपेज से कंपनी को करीब 150 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. ग्रेड में स्लिपेज का सिलसिला चालू वित्तीय वर्ष (2019-20) में बदस्तूर जारी है. वर्तमान में भी करीब 90-95 प्रतिशत कोयले के ग्रेड में स्लिपेज हो रहा है. इस कारण कंपनी उच्च प्रबंधन की चिंता बढ़ गयी है. मामले को गंभीरता से लेते हुए बीसीसीएल विजिलेंस विभाग रेस हो गया है. विजिलेंस ने लोदना एरिया प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कोयला के ग्रेड स्लिपेज का कारण पूछा है. कहा कि आखिर किन कारणों से कोयला के ग्रेड में लगातार स्लिपेज हो रहा है. जिस कारण कंपनी को आर्थिक नुकसान हो रहा है.

प्रतिमाह 10-12 करोड़ की हो रही हानि : खराब क्वालिटी के कारण गत वित्त वर्ष में 150 करोड़ रुपये के नुकसान के बावजूद एरिया प्रबंधन का क्वालिटी पर ध्यान नहीं है. आलम यह है कि चालू वित्त वर्ष में भी कोयले के ग्रेड में स्लिपेज के कारण कंपनी को औसतन प्रति माह करीब 10-12 करोड़ का नुकसान हो रहा है. कोयला की क्वालिटी को लेकर कोयला मंत्रालय, कोल इंडिया चेयरमैन व बीसीसीएल के सीएमडी गंभीर है. हर मीटिंग में कोयला की क्वालिटी में सुधार व ग्रेड स्लिपेज बर्दाश्त नहीं करने की चेतावनी दी जाती है, इसके बावजूद एरिया प्रबंधन पर इसका असर नहीं दिख रहा है.

19 सौ रुपये के कोयले की बिक्री 1200 में
लोदना एरिया में अवस्थित एनटी-एसटी परियोजना के कोयला को सिंफर ने वाशरी-5 ग्रेड डिक्लियर (घोषित) किया है, जबकि यही कोयला पूर्व में उक्त एरिया द्वारा पिछले दिनों जी-8 ग्रेड में बिक्री हो रही थी. दोनों ग्रेड के कोयले के मूल्य की तुलना करे तो कंपनी को प्रति टन 700 रुपये का नुकसान होता दिख रहा है. जानकारों की माने तो जी-8 ग्रेड कोयले का बाजार मूल्य करीब 12 सौ रुपये है, जबकि वाशरी-5 ग्रेड के कोयला का मूल्य 19 सौ रुपये प्रतिटन है.

सीएचपी की बजाय रेलवे साइडिंग में होती है कोयला क्रशिंग

बताते हैं कि अपनी वाहवाही में लोदना एरिया प्रबंधन ने कोयला की ओवर रिपोर्टिंग तो कर दी है, लेकिन स्टॉक के मुताबिक साइडिंग व कोलियरी में कोयला उपलब्ध नहीं है. ऐसे में एरिया प्रबंधन की ओर से रेलवे साइडिंग में ही कोयला के साथ ओवर बर्डेन (ओबी) आदि मिलाकर डिस्पैच कर दिया जा रहा है. इतना ही नहीं, बीसीसीएल उच्च प्रबंधन का निर्देश है कि सीएचपी से क्रश कोयला ही डिस्पैच करना है, लेकिन यहां स्थानीय प्रबंधन द्वारा रेलवे साइडिंग में ही डोजर से क्रश कर कोयला डिस्पैच किया जा रहा है. इसी कारण ग्रेड में स्लिपेज आ रहा है.

स्लीपेज पर विजिलेंस रेस, लोदना प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस

जी-8 ग्रेड कोयला को सिंफर ने वाशरी-5 ग्रेड किया है डिक्लीयर

वर्तमान में भी 90-95 प्रतिशत हो रहा ग्रेड में स्लीपेज

सीएमडी की चेतावनी का भी एरिया प्रबंधन पर असर नहीं

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