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धनबाद :कहीं काम बंद तो कहीं पांच प्रतिशत हुआ काम

Updated at : 22 Jan 2019 4:56 AM (IST)
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धनबाद :कहीं काम बंद तो कहीं पांच प्रतिशत हुआ काम

विकास योजनाओं की नगर निगम ने करायी जांच धनबाद : 14 वें वित्त आयोग के फंड से चल रही विकास योजनाओं की रविवार को जांच की गयी. कहीं काम बंद मिला तो कहीं पांच से 10 प्रतिशत काम की प्रगति पायी गयी. एक-दो जगहों पर काम संतोषप्रद रहा. हालांकि जांच के क्रम में कहीं भी […]

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विकास योजनाओं की नगर निगम ने करायी जांच

धनबाद : 14 वें वित्त आयोग के फंड से चल रही विकास योजनाओं की रविवार को जांच की गयी. कहीं काम बंद मिला तो कहीं पांच से 10 प्रतिशत काम की प्रगति पायी गयी. एक-दो जगहों पर काम संतोषप्रद रहा. हालांकि जांच के क्रम में कहीं भी कंसल्टेंट पीएमसी के प्रतिनिधि नहीं मिले. सोमवार को गठित जांच टीम द्वार दी गयी रिपोर्ट में यह मामला सामने आया है.

नगर आयुक्त चंद्रमोहन कश्यप ने बताया कि सभी अंचल के लिए पांच-पांच टीम गठित की गयी थी. रविवार को सभी टीम ने योजनाओं की जांच की. जांच रिपोर्ट के आधार पर जहां धीमी गति से काम चल रहा है और जिस अवधि में काम पूरा करना था और जानबूझ कर काम विलंब किया गया. उस योजना का सेवा विस्तार नहीं किया जायेगा और प्रावधान के अनुसार प्राक्कलित राशि में विलंब शुल्क की कटौती की जायेगी.

जांच रिपोर्ट पर एक नजर : वार्ड नंबर एक में लिलौरी स्थान पर पार्क निर्माण का काम बंद मिला. वार्ड नंबर तीन में नाली-सड़क की जांच की गयी. नाली में 90 प्रतिशत व सड़क में 08 प्रतिशत प्रगति पाया गया. संवेदक को कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया गया. वार्ड नंबर 4 गुहीबांध कतरास में सड़क का 18 प्रतिशत व नाली का 12 प्रतिशत काम की प्रगति पाया गया. वार्ड नंबर 31 में सड़क का 25 प्रतिशत व नाली का 30 प्रतिशत प्रगति पाया गया. वार्ड नंबर 39 में सड़क व नाली का काम संतोष प्रद पाया गया. जबकि वार्ड नंबर 39 में ही संवेदक अनिल कुमार का सड़क व नाली का काम बंद पाया गया. नुनूडीह विवाह मंडल में कुछ लेबर काम करते हुए पाये गये. डोमगढ़ ग्रेवयार्ड में पीएमसी के प्रतिनिधि नहीं पाये गये. वार्ड नंबर 21 में नाली व सड़क का काम मात्र पांच प्रतिशत ही हुआ था जबकि 100 प्रतिशत काम पूरा हो जाना चाहिए था.

वार्ड नंबर 24 में रोड व नाली का काम बंद पाया गया. वार्ड नंबर 9 में पांच प्रतिशत काम पाया गया. वार्ड नंबर 25 में विवाह भवन का काम चल रहा था. इस संबंध में नगर आयुक्त चंद्र मोहन कश्यप ने कहा कि जांच रिपोर्ट के बाद अपने स्तर से जांच की जायेगी. जहां गुणवक्ता खराब पायी गयी. संबंधित कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता पर प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी.

4530 शौचालय का 6.36 करोड़ कहां गया

4530 शौचालय का पैसा कहां गया है. निगम को इसका हिसाब नहीं मिल रहा है. नगर निगम को 47500 शौचालय के लिए 57 करोड़ का फंड आया था. इनमें 42 हजार 419 शौचालय पर 51 करोड़ रुपये खर्च हुए. छह करोड़ 36 लाख का फंड निगम के खाता में होना चाहिए लेकिन एकाउंट में मात्र 26 लाख रुपये ही है.

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