गैंग्स ऑफ वासेपुर : गोपी गया दुमका जेल, सभी छह सदस्य शिफ्ट, नीरज हत्याकांड के शूटरों को भी दूसरे जेलों में भेजा जायेगा

Updated at : 09 Oct 2018 7:03 AM (IST)
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गैंग्स ऑफ वासेपुर :  गोपी गया दुमका जेल, सभी छह सदस्य शिफ्ट, नीरज हत्याकांड के शूटरों को भी दूसरे जेलों में भेजा जायेगा

धनबाद : धनबाद जेल में बंद गैंग्स ऑफ वासेपुर के गोपी खान को भी दूसरे जेल भेज दिया गया है. गोपी खान को कड़ी सुरक्षा के बीच दुमका जेल भेज दिया गया है. गैंग्स के अन्य सदस्यों को पहले ही दूसरे जेलों में भेजा जा चुका है. इस तरह धनबाद जेल में बंद गैंग्स के […]

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धनबाद : धनबाद जेल में बंद गैंग्स ऑफ वासेपुर के गोपी खान को भी दूसरे जेल भेज दिया गया है. गोपी खान को कड़ी सुरक्षा के बीच दुमका जेल भेज दिया गया है. गैंग्स के अन्य सदस्यों को पहले ही दूसरे जेलों में भेजा जा चुका है. इस तरह धनबाद जेल में बंद गैंग्स के सभी छह सदस्य अब दूसरे जेल चले गये हैं. अब धनबाद जेल में बंद नीरज सिंह हत्याकांड के शूटरों समेत सात-आठ बंदियों को भी दूसरे जेल भेजा जाना है. इस दिशा में कार्रवाई की जा रही है.
पहले चरण में गैंग्स ऑफ वासेपुर के गॉडवीन खान को गिरिडीह व बंटी खान को रांची होटवार जेल भेजा गया था. दूसरे चरण में प्रिंस खान को पलामू, इकबाल खान को हजारीबाग तथा रितिक खान को चाईबासा जेल भेजा गया था. इकबाल गैंगस्टर फहीम खान का बेटा है. बंटी, गोपी, गॉडवीन व प्रिंस उसका भांजा है. रितिक खान फहीम के भांजान प्रिंस का खासमखास है.
फहीम अभी जमशेदपुर घाघीडीह जेल में उम्र कैद की सजा काट रहा है. धनबाद जेल से गैंग्स की हरकत से जेल प्रबंधन के साथ-साथ पुलिस भी परेशान थी. झावियुमो के जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह की रंगदारी के लिए 21 अगस्त को गोली मारकर हत्या किये जाने के बाद गैंग्स एक बार फिर सुर्खियों में आया था.
रंजीत की हत्या का आरोप गैंग्स के प्रिंस खान एंड ब्रदर्स पर लगा था. उससे जुड़े लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गयी. आरोप लगा कि जेल में बंद प्रिंस खान रंजीत को रंगदारी के लिए धमकी दे रहा था. पुलिस में रंजीत ने शिकायत की. पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही और रंजीत की हत्या कर दी गयी. जेल अधीक्षक ने 22 अगस्त को ही गैंग से जुड़े क्रिमिनलों को दूसरे जेल भेजने की अनुशंसा जेल आइजी से की थी.
इसके बाद एसएसपी की पहल पर डीसी की ओर से भी जेल आइजी को पत्र लिखकर गैंग्स से जुड़े कैदियों को दूसरे जेल शिफ्ट करने के लिए पत्र भेजा गया. जेल आइजी से अनुमति मिलने के बाद संबंधित बंदियों को दूसरे जेल भेजने के लिए कोर्ट से अनुमति ली गयी. इसके बाद बारी-बारी से बंदियों को भेजा गया.
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