आज से गाड़ी लेने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Sep 2018 6:27 AM (IST)
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धनबाद : एक सितंबर से गाड़ी लेने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है. सुप्रीम कोर्ट ने कार खरीदने के साथ तीन साल का और बाइक खरीदने वालों के साथ पांच साल का थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस खरीदना अनिवार्य कर दिया है. अब तक सिर्फ दोपहिया वाहनों के लिए ही एक साल से […]
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धनबाद : एक सितंबर से गाड़ी लेने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है. सुप्रीम कोर्ट ने कार खरीदने के साथ तीन साल का और बाइक खरीदने वालों के साथ पांच साल का थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस खरीदना अनिवार्य कर दिया है. अब तक सिर्फ दोपहिया वाहनों के लिए ही एक साल से अधिक अवधि वाला बीमा कवर बाजार में मिल रहा था.
क्या है थर्ड पार्टी बीमा : मोटर वाहन कानून के तहत थर्ड पार्टी बीमा का प्रावधान काफी पहले ही लागू किया गया है. इसे थर्ड पार्टी लायबिलिटी कवर के नाम से भी जाना जाता है. जब मोटर वाहन से कोई दुर्घटना होती है तो कई बार इसमें बीमा कराने वाला व बीमा कंपनी के अलावा एक तीसरा पक्ष भी शामिल होता है, जो प्रभावित होता है. यह प्रावधान इसी तीसरे पक्ष यानी थर्ड पार्टी के दायित्वों को पूरा करने के लिए बनाया गया है.
यह पॉलिसी बीमा कराने वाले को नहीं, बल्कि जो तीसरा पक्ष दुर्घटना से प्रभावित होता है, उसे कवरेज देती है. कई बार ऐसा होता है कि मोटर वाहन चलाते समय किसी दुर्घटना में सामने वाले की मृत्यु होने या उसके घायल होने का पता चलता है और आपके पास उसके इलाज के लिए इतने पैसे नहीं होते हैं तो सरकार ने इस स्थिति में उस इंसान के लिए इस थर्ड पार्टी बीमा का प्रावधान रखा है, जिसे हर मोटर वाहन के लिए कानूनी तौर पर अनिवार्य कर दिया गया है. थर्ड पार्टी बीमा के तहत दुर्घटना में प्रभावित सामने वाले पक्ष को मुआवजा दिया जायेगा. इसलिए हर साधारण बीमा कंपनी को इस बारे में प्रावधान करना होता है.
कैसे करे थर्ड पार्टी बीमा का क्लेम
मोटर वाहन के मालिक के खिलाफ थर्ड-पार्टी क्लेम पीड़ित या उसका एजेंट, जिस प्रॉपर्टी को नुकसान हुआ है, उसका मालिक या मृतक का कानूनी प्रतिनिधि दायर कर सकता है. दुर्घटना के मामले में वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर, ड्राइवर के लाइसेंस नंबर और अगर कोई प्रत्यक्षदर्शी हों तो उनके नाम और संपर्क की जानकारियों के साथ एक प्राथमिकी पुलिस के पास दायर की जानी चाहिए.
दुर्घटना जिस इलाके में हुई है या जहां दावा किया गया हो, उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्राइब्यूनल में एक केस दायर करना होगा. दुर्घटना में जो नुकसान हुआ है, उसके सबूत के तौर पर प्राथमिकी की एक कॉपी और खर्चों के मूल दस्तावेज पेश करने होंगे. दुर्घटना से घायल होने या मृत्यु की स्थिति में थर्ड-पार्टी कवर की लिमिट नहीं बतायी जाती है. कोर्ट की रकम पर फैसला करने के बाद ही पूरा मुआवजा बीमा कंपनी देती है.
धनबाद में 45 प्रतिशत ही मोटरसाइकिलों का है बीमा
जिला परिवहन अधिकारी पंकज साव के अनुसार धनबाद में अक्सर बिना इंश्योरेंस की मोटरसाइकिल चेकिंग में पकड़ी जाती है. एक आंकड़े के अनुसार जिले में 45 प्रतिशत मोटरसाइकिल की ही बीमा है, वहीं चार पहिया वाहनों की 80 प्रतिशत बीमा है.
सीसी पर होता है इंश्योरेंस
बाइक या चार पहिया वाहन का इंश्योरेंस गाड़ी के इंजन क्षमता (सीसी) के अनुसार होती है. बाइक में पांच वर्ष और चार पहिया वाहन में तीन वर्ष का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस करने से पांच गुणा और तीन गुणा पैसा एक साथ देना होगा. इससे कंज्यूमर की जेब पर सीधा असर पड़ेगा.
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