पुलिस साबित नहीं कर पायी अपराध संदेह का लाभ मिला रामधीर सिंह को
Updated at : 19 Aug 2018 4:57 AM (IST)
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सकलदेव सिंह हत्याकांड धनबाद : बिहार जनता खान मजदूर संघ के महामंत्री और जनता दल के नेता सकलदेव सिंह हत्याकांड में रामधीर सिंह को संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने बरी किया है. हालांकि रामधीर के खिलाफ वादी व प्रत्यक्षदर्शी समेत 10 लोगों की गवाही हुई. बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनूप कुमार सिन्हा व […]
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सकलदेव सिंह हत्याकांड
धनबाद : बिहार जनता खान मजदूर संघ के महामंत्री और जनता दल के नेता सकलदेव सिंह हत्याकांड में रामधीर सिंह को संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने बरी किया है. हालांकि रामधीर के खिलाफ वादी व प्रत्यक्षदर्शी समेत 10 लोगों की गवाही हुई. बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनूप कुमार सिन्हा व अभय कुमार सिन्हा अभियोजन पक्ष के तर्कों को संदेहास्पद साबित करने में सफल रहे. अभियोजन पक्ष की ओर से मनोज सिंह व मनोज अकेला की गवाही को मुख्य आधार बनाया गया था. दोनों ने कहा था कि सकलदेव बाबू को गोली मारने वाले को उसने धनबाद जेल में बंद रामधीर से मिलते देखा था. गवाह की यह बात पुलिस डायरी में दर्ज नहीं है. दोनों ने कोर्ट में यह गवाही दी है. बचाव पक्ष ने साक्ष्य अधिनियम की धारा 10 के तहत इसे संदेहास्पद बताया. पुलिस ने जेल जाकर जांच नहीं की थी.
साथ ही केस के आइओ ने जिरह के दौरान अदालत में कहा कि गवाहों ने उन्हें ऐसा कई बयान नहीं दिया और केस डायरी में ऐसा बयान उल्लेखित नहीं है. अभियोजन पक्ष गवाहों के बयान के बावजूद यह साबित करने में विफल रहा कि जेल में बंद रामधीर ने सकलदेव की हत्या करायी है. अभियोजन पक्ष की ओर से कहा गया कि सकलदेव सिंह के अनुज विनोद सिंह की हत्या रामधीर व उनके परिजनों ने करायी थी. केस में रामधीर समेत सभी लोग बंद थे. विनोद सिंह हत्याकांड में सकलदेव सिंह अभियुक्तों के खिलाफ कानूनी पैरवी कर रहे थे. केेस को कमजोर करने के ख्याल से जेल में बंद रामधीर व उनके परिजनों ने सकलदेव की हत्या करायी है. बचाव पक्ष ने अभियोजन के इस मुख्य आधार को साबित नहीं होने दिया.
चलती गाड़ी में मारी गयी थी सकलदेव को गोली
विनोद मर्डर केस में उम्रकैद काट रहे हैं रामधीर
रामधीर सिंह सकलदेव सिंह के अनुज विनोद सिंह हत्याकांड में उम्र कैद की सजा काट रहे हैं. नौ अप्रैल 2015 को कोर्ट ने बच्चा सिंह को रिहा करते हुए रामधीर को दोषी पाया था. रामधीर फरार चल रहे थे. कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहे थे. रामधीर की अनुपस्थिति में ही कोर्ट ने 15 अप्रैल को उम्र कैद की सजा सुनायी थी. रामधीर ने 20 फरवरी 2017 को कोर्ट में सरेंडर किया था.
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