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ग्रामीणों ने बनाया पाकुड़ के बांसलोई नदी पर चचरी पुल, स्कूल और अस्पताल की 25km दूरी हुई कम

Updated at : 02 Sep 2022 4:21 AM (IST)
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ग्रामीणों ने बनाया पाकुड़ के बांसलोई नदी पर चचरी पुल, स्कूल और अस्पताल की 25km दूरी हुई कम

आवाजाही में हो रही परेशानी और नेता एवं प्रशासन की अनदेखी से परेशान ग्रामीणों ने ऐसा कदम उठाया कि 25 किमी की दूरी कम हो गयी. पाकुड़ के बांसलोई नदी पर ग्रामीणों ने चचरी पुल बना दिया. अब न तो आवागमन में परेशानी हो रही है और न ही स्कूल और अस्पताल जाने में दिक्कत. ग्रामीणों की पहल की सराहना हो रही है.

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छह करोड़ से बना पुल 2019 में हुआ था धराशायी

बांस का पुल बनने से लोगों के समय और पैसे दोनों बच रहे हैं. महेशपुर प्रखंड क्षेत्र के चांडालमारा समेत दर्जनों गांव बांसलोई नदी के किनारे बसे हैं. बता दें कि प्रखंड के घाटचोरा व चांडालमारा गांव के बीचो-बीच बांसलोई नदी पर लगभग छह करोड़ रुपये से बना पुल 30 सितंबर 2019 को छह दिनों की बारिश में धराशायी हो गया था.

ग्रामीणों ने ऐसे बनाया चचरी पुल

चचरी पुल बनाने के लिए ग्रामीणों ने लकड़ी, बांस, रस्सी और कील का इस्तेमाल किया है. बाजार से सामान खरीदने पर करीब 10 हजार रुपये से भी ज्यादा का खर्च आता. सामूहिक प्रयास से सब सामान जुटा लिया. अपने बाग व खेतों से लकड़ी की झाड़ियों व बांस काट कर दिए. तार और रस्सी खरीदने के लिए आपस में 8000 रुपये चंदा किया.

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दूर हुईं दिक्कतें, पर नहीं मिला स्थायी समाधान

बांसलोई नदी के रोलाग्राम घाट पर पत्थर, बांस, बल्ले के सहारे से बांस का चचरी पुल तो बना दिया. अब लोग दोपहिया एवं पैदल नदी पार करने लगे हैं. लेकिन, यह ग्रामीणों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं है. ग्रामीणों ने फिर शासन-प्रशासन व जनप्रतिनिधि से जल्द पुल बनाने की मांग की है, ताकि समस्या का स्थायी समाधान हो सके. पर, ग्रामीणों को स्थायी समाधान नहीं मिला.

25 किलोमीटर की दूरी हुई कम

सबसे बड़ी मुश्किल तो बीमार लोगों काे इलाज कराने के लिए महेशपुर प्रखंड क्षेत्र के सीएचसी अस्पताल तक जाने के लिए लगभग 25 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था. बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी हो रही थी. शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि भी इनकी समस्या की अनदेखी कर रहे थे. नदी में पानी कम होने के बाद चंडालमारा के ग्रामीण ट्यूब व बांस की चचरी बनाकर नदी के इस पार से उस पार आने-जाने लगे. कुछ दिनों बाद चंडालमारा के ग्रामीणों ने चंदा कर नदी पार करने के लिए एक छोटा-सा डायवर्सन पुल बनाया. वह भी जलस्तर बढ़ने के साथ बांसलोई नदी में समा गया. परेशान नारगीटोला के ग्रामीणों ने आपस में चंदा कर बांस का चचरी पुल बनाया है. चचरी पुल बनाने का काम आठ जुलाई को शुरू हुआ था. अब पुल बनने से हजारों की आबादी को इसका लाभ मिल रहा है.

इन ग्रामीणों ने दिया योगदान

नारगीटोला के जमाई बाबू किस्कू, सुगिचांद टुडू, ढेना टुडू, अलोक टुडू, फलिशन किस्कू, सोपेन टुडू, प्रदीप टुडू समेत ग्रामीणों का सराहनीय योगदान रहा. इनके अलावा आसपास गांव के लोगों ने भी पुल निर्माण में योगदान दिया.

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Posted By: Samir Ranjan.

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