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सांख्य योग साधना स्थल कापिल मठ में धूमधाम से मनाया गया वार्षिकोत्सव

मधुपुर के बावनबीघा स्थित विश्व प्रसिद्ध सांख्य योग साधना स्थल कापिल मठ में आयोजन

मधुपुर. शहर के बावनबीघा स्थित विश्व प्रसिद्ध सांख्य योग साधना स्थल कापिल मठ में रविवार को पारंपरिक सामूहिक पाठ के बीच धूमधाम से वार्षिकोत्सव मनाया गया. उत्सव के दौरान सुबह वर्षों से गुफा में रहकर साधनारत सद्गुरु स्वामी भाष्कर आरण्य श्रद्धालुओं को दर्शन दिये. स्वामीजी गुफा द्वार पर बैठकर ही शिष्यों के साथ सामूहिक पाठ में शामिल हुए. ओम आदि विदुषे कपिलाय नमः से पूरा मठ गुंजायमान होता रहा. उत्सव को लेकर पूरे मठ को भव्य ढंग से सजाया गया है. इसमें शामिल होने के लिए बिहार, बंगाल, झारखंड, असम, ओडिशा, दिल्ली, महाराष्ट्र आदि प्रदेश से सैकड़ों श्रद्धालु आये हुए हैं. पाठ के उपरांत हजारों लोगों ने बगैर भेदभाव के जमीन पर बैठकर खिचड़ी, सब्जी, बुंदिया, चटनी का प्रसाद पाया. आयोजन की सफलता के लिए दर्जनों शिष्य तन, मन और धन से जुटे रहे. उत्सव को सफल बनाने के लिए मधुपुर शहर समेत आसपास के दर्जनों श्रद्धालु लगे हुए थे.

परम पद कैवल्य की ओर लक्ष्य स्थिर रखे : स्वामी भाष्कर आरण्य

हमेशा प्रचार-प्रसार से दूर रहने वाले साधनारत स्वामी भाष्कर आरण्य ने शिष्यों से कहा कि जहां धर्म है वहां जय होती है और जहां अधर्म वहीं पर पराजय होती है. जैसे फल से वृक्ष पहचाना जाता है, उसी प्रकार मनुष्य जाति तथा भारतीयों का चारों और नैतिक पराजय देखकर नि:संदेह विदित होता है कि उनलोगों में धर्म के नाम पर निश्चय ही अधर्म प्रबल रूप से चल रहा है. उन्होंने कहा कि जातीय अभ्युदय के ठीक पहले कपिल आदि प्रमुख ऋषियों के द्वारा जो विशुद्ध योग धर्म अविष्कृत व अनुष्ठित हुए है. उन्हें हृदय में धारण करने का प्रयत्न करें. अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, शौच, संतोष, तप और स्वाध्याय का आचरण करें. परम पवित्र धर्म के आचरण से ही मैत्री, करुणा, मुदिता और उपेक्षा के द्वारा चित को शुद्ध करें और परम पद कैवल्य की ओर लक्ष्य स्थिर रखें. बताते चले कि सांख्य योगाचार्य स्वामी हरिहरानंद आरण्य ने वर्ष 1926 में मठ की स्थापना किया था. सन 1947 में स्वामीजी हरिहरानंद आरण्य ने कापिल मठ में समाधि ली थी. स्वामी जी कहते थे सांख्य योग ही ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है. भारत में सांख्य योग साधना पर आधारित मधुपुर का एकलौता मठ है. इसकी एक शाखा दार्जिलिंग के कास्यांग में है. बाद के दिनों में स्वामी धर्म मेघ आरण्य ने यहां चल रही साधना परंपरा को समृद्ध किये. स्वामी धर्म मेघ आरण्य की महासमाधि के बाद वर्तमान में सद्गुरु योगाचार्य स्वामी भाष्कर आरण्य परंपरा को अनवरत बनाए हुए हैं. मठ से अंग्रेजी, हिंदी, बांग्ला, गुजराती, संस्कृत में ग्रंथ लिखे गए है. इनमें से कुछ ग्रंथ दुनिया के 56 विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता है.

हाइलार्ट्स: ओम आदिविदुषे कपिलाय नमः से गुंजायमान हुआ कापिल मठ

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