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देवघर में बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा-शृंगार का बदल गया समय, अब इस समय होगी पूजा

Updated at : 06 Aug 2025 10:34 PM (IST)
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Shravani Mela Puja Time-Table Deoghar Baba Baidyanath Dham News

बाबा बैद्यनाथ के मंदिर में आज पूजा, शृंगार और जलार्पण का समय.

Shravani Mela 2025 Puja Timing: देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है. श्रावण माह में देश के कोने-कोने से कांवरिये गंगाजल लेकर बाबा का जलाभिषेक करने आते हैं. इसकी वजह से श्रावण मास में बाबा के पट के खुलने, बंद होने का समय बदल जाता है. शृंगार पूजा का भी समय बदल जाता है. सावन में कब मंदिर खुलेगा, कब शृंगार पूजा होगी और कब से कब तक भक्त जलार्पण कर पायेंगे, एक-एक अपडेट आपको यहां मिलेगा.

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Shravani Mela 2025 Puja Timing: देवघर में हर साल एक महीने तक चलने वाला प्रसिद्ध श्रावणी मेला के लिए बाबा मंदिर में पूजा-अर्चना का समय बदल गया है. श्रावण मास 2025 की शुरुआत के बाद से अब तक लाखों श्रद्धालुओं ने बाबाधाम में जलार्पण किया है. सावन के महीने में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बिहार के सुल्तानगंज से गंगाजल भरकर कांवर लेकर 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी पैदल तय करके बाबाधाम में बाबा बैद्यनाथ को प्रसन्न करने के लिए जलार्पण करने आते हैं.

सुल्तानगंज से बाबाधाम तक होती है विशेष व्यवस्था

सावन के महीने में सुल्तानगंज से लेकर बाबाधाम तक कांवरियों के लिए विशेष व्यवस्था की गयी है. कांवरिया पथ को सजाया गया है, उस पर गंगा की मिट्टी डाली गयी है, ताकि सुल्तानगंज से जल लेकर चलने वाले शिवभक्तों के पैरों में छाले न पड़ें. उन्हें मखमल पर चलने का अहसास हो.

महादेव का जलाभिषेक करने को आतुर भक्त

दिन-रात बाबा के भक्त कांवर लेकर चलते हैं. बीच-बीच में उनके विश्राम करने की भी व्यवस्था है. बावजूद इसके सभी श्रद्धालु जल्द से जल्द देवघर पहुंचकर अपने आराध्य देवाधिदेव महादेव का जलाभिषेक करने के लिए आतुर हैं. इसलिए जानना जरूरी है कि देवघर पहुंचने के बाद बाबा मंदिर में कब पूजा कर पायेंगे. कब से कब तक मंदिर के पट खुले रहेंगे, कब से कब तक जलार्पूपण होगा.

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Shravani Mela: शृंगार पूजा के बाद बंद होता है गर्भगृह

बाबा बैद्यनाथ, जिन्हें मनोकामना लिंग भी कहा जाात है, पर अगर आप जलार्पण करने बाबाधाम जा रहे हैं, तो आपको वहां की पूजा के समय की पूरी जानकारी आपको होनी चाहिए. यह भी जानना चाहिए कि बाबा बैद्यनाथ की शृंगार पूजा कब होती है. शृंगार पूजा के बाद गर्भगृह का पट कब बंद होगा.

सुबह 3:05 बजे खुलता है बाबा बैद्यनाथ का गर्भगृह

बाबा बैद्यनाथ के मंदिर का पट सावन के महीने में सुबह 3:05 बजे खुल जाता है. इसके साथ ही भक्तों के द्वारा बाबा भोलेनाथ पर अरघा के जरिये जलार्पण शुरू हो जाता है. इसलिए कांवरिये और श्रद्धालु रात के 9 बजे तक बाबा को जल चढ़ायेंगे. इसके बाद मंदिर का पट बंद हो जायेगा.

रात के 9:30 बजे तक होती है बाबा की शृंगार पूजा

मंदिर का पट बंद होने के बाद बाबा बैद्यनाथ की शृंगार पूजा शुरू हो जाती है, जो रात के 9:30 बजे तक चलती है. इसके बाद 10:30 बजे गर्भगृह के पट को अगले दिन सुबह 3:05 बजे तक के लिए बंद कर दिया जाता है. इसके बाद सरदारी पूजा होती है और फिर दिन भर भक्तों के द्वारा जलाभिषेक किया जाता है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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