Climate Change: सावन के महीने में ठूंठ हो गया बेल का पेड़, कीड़े के आक्रमण से विल्वपत्र को तरसे शिव भक्त

बिशुनपुर में शिव मंदिर के पास बेल के पत्ते चट कर रहे कीड़े. फोटो : प्रभात खबर
Climate Change: सावन के महीने गुमला जिले के बिशुनपुर प्रखंड में बेल पत्र पर एक कीड़े का हमला हुआ है. इसे क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) का असर भी माना जा सकता है. सावन की पहली सोमवारी पर ही मंदिर के आसपास के बेल के पेड़ों से पत्ते गायब हो गये हैं. एक पेड़ को पूरी तरह से ठूंठ हो गया है. बाकी के पेड़ों के आधे पत्ते गायब हो गये हैं. शिवभक्त और मंदिर के पुजारी इस बात से चिंतित हैं कि आने वाले दिनों में श्रद्धालु विल्वपत्र के बगैर कैसे अपनी पूजा पूरी करेंगे.
Climate Change: सावन के महीने में विल्वपत्र (बेल पत्र) का अलग ही महत्व होता है. कहते हैं कि बेल पत्र के बिना भगवान भोलेनाथ की पूजा पूरी नहीं होती. झारखंड के गुमला जिले के बिशुनपुर प्रखंड में बेल का पेड़ पूरी तरह से ठूंठ हो गया है. एक भी बेल पत्र पेड़ पर नहीं है. बेल के पेड़ पर एक कीड़े का आक्रमण हुआ है. ये कीड़े बेल पत्र को खा गये. इसका खामियाजा शिवभक्तों को भुगतना पड़ रहा है.
Climate Change: ‘लीफ कैटर किलर’ का प्रकोप चरम पर
इन दिनों बिशुनपुर प्रखंड में ‘लीफ कैटर किलर’ नामक कीड़े का प्रकोप चरम पर है. ये कीड़े बेल के पत्ते खा रहे हैं. इससे श्रावण मास में शिवलिंग पर बेल पत्र अर्पित करने वाले शिव भक्तों को काफी परेशानी हो रही है. सबसे पहले इस कीड़े का आक्रमण सेरका के चट्टी स्थित शिवालय मंदिर के समीप लगे विशालकाय बेल के पेड़ पर हुआ. रातों-रात पेड़ के तमाम बेल पत्र इन कीड़ों ने खा लिया.
शिव मंदिर के पास वाले बेल के पेड़ पर नहीं एक भी पत्ता
सावन की पहली सोमवारी पर भक्त जब शिवालय पहुंचे, तो वे निश्चिंत थे कि मंदिर के पास बेल पत्र मिल जायेगा. यहां पहुंचने पर वे सन्न रह गये. वहां बेल पत्र उपलब्ध नहीं था. लोगों के मन में इस बात की चर्चा है कि आखिर सावन के महीने में ही कीड़े ने बेल के पेड़ पर क्यों हमला बोला है. श्रद्धालुओं ने बेल पत्र के लिए आसपास के पेड़ों का रुख किया, तो देखा कि वहां भी कीड़े का अटैक हुआ है.
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मुश्किल से शिव भक्तों को पूजा के लिए बेल पत्र मिले
अन्य पेड़ों के आधे से अधिक पत्ते कीड़े खा चुके हैं. बहुत मुश्किल से भक्तों ने बेल पत्र की व्यवस्था की और शिवलिंग पर अर्पित किया. मंदिर के पुजारी टेमन दास ने शिव भक्तों से आग्रह किया है कि सावन माह में अगर भगवान शिव की पूजा बेल पत्र से करनी है, तो जल्दी करें. देरी हुई, तो कीड़े बेल पत्र खा जायेंगे और भक्तों को परेशानी होगी.
कटे-फटे या दागदार बेल पत्र माने जाते हैं अशुद्ध – ब्राह्मण
ब्राह्मणों ने कहा है कि दागदार या कटे-फटे बेल पत्र अशुद्ध माने जाते हैं. इसे शिवलिंग पर चढ़ाने से पूजा की शुद्धता भंग हो जाती है. उन्होंने कहा कि भगवान शिव को दागी बेल पत्र चढ़ाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह अशुद्ध माना जाता है. भगवान शिव की पूजा में शुद्धता का बहुत महत्व है.
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बरसात के कारण पैदा हुए हैं कीड़े – कृषि वैज्ञानिक
बिशुनपुर मुख्यालय स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने कहा है कि ‘लीफ कैटर किलर’ नमक कीड़े की उत्पत्ति बारिश की वजह से हुई है. कीड़े के प्रकोप से निबटने के लिए वैज्ञानिकों ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है. अभी पहली सोमवारी की पूजा हुई है. 3 सोमवारी अभी बाकी है. अगर सारे बेल पत्र कीड़े खा गये, तो भक्त कैसे अपनी पूजा पूरी करेंगे.
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By Mithilesh Jha
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