Ration Card News: झारखंड में राशन कार्ड बनना बंद, 89000 आवेदन पेंडिंग, जरूरतमंद लोग परेशान

राशन कार्ड.
Ration Card News: झारखंड में राशन कार्ड बनना बंद हो गया है. 89 हजार आवेदन अलग-अलग स्तर पर पेंडिंग है. इसकी वजह से जरूरतमंद लोग परेशान हैं. झारखंड सरकार ने ग्रीन कार्ड के जरिये 20 लाख लोगों को जोड़ने के लिए राज्य खाद्य सुरक्षा योजना शुरू की थी, जिसके बाद इतने लोगों को लाभ मिलना शुरू भी हो गया. वहीं, बढ़ते आवेदनों को देखते हुए विभागीय मंत्री ने 5 लाख और लोगों को जोड़ा.
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Ration Card News| देवघर, संजीव मिश्रा : राशन कार्ड की आस में जिला आपूर्ति कार्यालय के बाहर जरूरतमंदों की भीड़ बढ़ने लगी है. राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के तहत लाखों लोगों को लाभ देने का वादा करने वाली सरकार के सामने अब वैकेंसी की कमी ने नयी चुनौती खड़ी कर दी है. देवघर में 15 हजार नये राशन कार्ड जारी कर 50 हजार लोगों को राहत देने के बाद वैकेंसी फुल होने से प्रक्रिया ठप हो गयी है. नये राशन कार्ड बनने बंद हो गये हैं. राज्यभर में 89 हजार आवेदन पेंडिंग हैं. 44 हजार से अधिक आवेदन बीएसओ और 45 हजार डीएसओ की लॉगिन में लंबित हैं.
20 लाख लोगों को ग्रीन कार्ड से जोड़ने की थी योजना
दरअसल, झारखंड सरकार ने ग्रीन कार्ड के जरिये 20 लाख लोगों को जोड़ने के लिए राज्य खाद्य सुरक्षा योजना शुरू की थी, जिसके बाद इतने लोगों को लाभ मिलना शुरू भी हो गया. वहीं, बढ़ते आवेदनों को देखते हुए विभागीय मंत्री ने 5 लाख और लोगों को जोड़ा. वर्तमान में राज्य भर में बीएसओ लॉगिन में 44 हजार से अधिक आवेदन पेंडिंग हैं, जबकि डीएसओ लॉगिन में भी करीब 45 हजार आवेदन लंबित पड़े हैं. बिना नयी वैकेंसी के इन आवेदनों पर राशन कार्ड जारी करना संभव नहीं दिख रहा है.
वैकेंसी बढ़ाकर पेंडिंग आवेदनों का निबटारा करने की मांग
जरूरतमंदों का कहना है कि सरकार को जल्द वैकेंसी बढ़ाकर पेंडिंग आवेदनों का निबटारा करना चाहिए, ताकि उन्हें खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ मिल सके. जिला आपूर्ति कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, वैकेंसी की कमी के कारण आवेदन प्रक्रिया ठप है. लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं. विभागीय स्तर पर इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये जाने से जरूरतमंद लोगों में निराशा बढ़ रही है.
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Ration Card : झारखंड में जिलावार पेंडिंग आवेदन
| जिला का नाम | बीएसओ लॉगिन | डीएसओ लॉगिन |
| बोकारो | 2186 | 3820 |
| चतरा | 705 | 605 |
| देवघर | 2721 | 1557 |
| धनबाद | 7167 | 5919 |
| दुमका | 792 | 946 |
| पूर्वी सिंहभूम | 526 | 2609 |
| गढ़वा | 2930 | 1809 |
| गिरिडीह | 5281 | 8279 |
| गोड्डा | 817 | 3713 |
| गुमला | 601 | 1352 |
| हजारीबाग | 3154 | 1233 |
| जामताड़ा | 1667 | 481 |
| खूंटी | 116 | 118 |
| कोडरमा | 2305 | 3296 |
| लातेहार | 382 | 162 |
| लोहरदग्गा | 716 | 527 |
| पाकुड़ | 2026 | 987 |
| पलामू | 633 | 1371 |
| रामगढ़ | 3222 | 882 |
| रांची | 2483 | 3504 |
| साहिबगंज | 2171 | 834 |
| सरायकेला खरसावां | 445 | 193 |
| सिमडेगा | 437 | 148 |
| पश्चिमी सिंहभूम | 796 | 329 |
| कुल | 44,315 | 44,668 |
हमने जो कहा था, वह किया. वैकेंसी दिये और लोगों को लाभ मिला. अब जितने भी आवेदन पेंडिंग हैं, समीक्षा की जायेगी. उसके बाद देखा जायेगा कि जितने लाभुकों को राशन कार्ड मिला, वे सही हैं या नहीं. वैसे संपन्न लोगों को भी चिह्नित करने के निर्देश दिये गये हैं, जो राशन कार्ड लेकर गरीबों का हक मार रहे हैं. लोग इंतजार करें, समीक्षा के बाद उचित निर्णय लेकर निर्देश दिया जायेगा.
डॉ इरफान अंसारी, खाद्य आपूर्ति मंत्री, झारखंड सरकार
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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