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Jharkhand Village Story: झारखंड के एक गांव का नाम था काफी आपत्तिजनक, बताने में आती थी शर्म, लोग उड़ाते थे मजाक

Updated at : 18 Feb 2025 6:40 AM (IST)
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Jharkhand Village Masuria deoghar

Jharkhand Village

Jharkhand Village Story: झारखंड के देवघर जिले में एक ऐसा गांव था, जिसका नाम काफी आपत्तिजनक था. ग्रामीणों को अपने गांव का नाम बताने में काफी शर्म आती थी. लोग नाम सुनते ही मजाक उड़ाने लगते थे. लंबे अरसे बाद ग्राम सभा की पहल से उन्हें मुक्ति मिली.

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Jharkhand Village Story: देवघर-अपने गांव का नाम बताने में आपको शर्म आती है? शायद नहीं, लेकिन झारखंड में एक गांव का नाम ऐसा था, जहां के ग्रामीण पहले अपने गांव का नाम बताने में काफी शर्मिंदगी महसूस करते थे. खासकर लड़कियों को स्कूल-कॉलेज में अपने गांव का नाम बताने में काफी शर्म आती थी. गांव का नाम काफी आपत्तिजनक था. नाम सुनते ही लोग उनका मजाक उड़ाने लगते थे. आखिरकार ग्राम सभा के जरिए इसका समाधान निकला और गांव का नया नामकरण किया गया. तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली.

नाम सुनते ही उड़ाने लगते थे मजाक


देवघर जिले के मोहनपुर प्रखंड की बंका पंचायत का एक गांव ऐसा था, जिसका नाम बताने में पहले लोगों को काफी शर्म आती थी. नयी पीढ़ी के बच्चों को स्कूल हो या कॉलेज, अपने गांव का नाम बताने में लज्जा आती थी. अपने दोस्तों को भी गांव का नाम बताने से वे परहेज करते थे. जैसे ही लोग गांव का नाम सुनते थे, उनका मजाक उड़ाने लगते थे. लंबे अरसे तक गांव के लोग इससे परेशान रहे.

काफी आपत्तिजनक था गांव का नाम


गांव का नाम काफी आपत्तिजनक भोस… था. यही वजह थी कि नाम पूछने पर ग्रामीण हिचकिचाने लगते थे. जाति, आवासीय और आय प्रमाण पत्रों में गांव का नाम देखकर लोग हंसने लगते थे. आखिरकार ग्रामीणों के आग्रह पर ग्राम सभा ने इस दिशा में पहल की. इसके बाद गांव का नाम बदला गया. सर्वसम्मति से गांव का पुराना नाम बदलकर नया नाम मसूरिया रखने का प्रस्ताव पारित किया गया. सभी सरकारी कार्यालयों के दस्तावेजों में मसूरिया के नाम से गांव की एंट्री करायी गयी. अब लोग बेहिचक अपने गांव का नाम बताते हैं.

ग्राम सभा ने ग्रामीणों को मुसीबत से दिलायी मुक्ति


बंका पंचायत के तत्कालीन प्रधान रंजीत कुमार यादव कहते हैं कि गांव का नाम सचमुच काफी आपत्तिजनक था. लोगों को काफी शर्मिंदगी झेलनी पड़ती थी. लड़कियों को स्कूल और कॉलेज नाम बताने काफी परेशानी होती थी. ग्राम सभा से प्रस्ताव पारित कर गांव का नया नामकरण किया गया. सरकारी दस्तावेजों में गांव का नया नाम मसूरिया दर्ज हो गया. अब गर्व से लोग अपने गांव का नाम बताते हैं.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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