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Deoghar News : आरबीआइ के नाम पर भेजे जा रहे फर्जी लिंक, साइबर ठगी के हो सकते हैं शिकार

Updated at : 29 Apr 2025 7:08 PM (IST)
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Deoghar News : आरबीआइ के नाम पर भेजे जा रहे फर्जी लिंक, साइबर ठगी के हो सकते हैं शिकार

देवघर समेत पूरे झारखंड में साइबर ठगों ने अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) के नाम पर लोगों को ठगने का नया तरीका अपना लिया है.

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वरीय संवाददाता, देवघर : देवघर समेत पूरे झारखंड में साइबर ठगों ने अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) के नाम पर लोगों को ठगने का नया तरीका अपना लिया है. ठग फर्जी टेक्स्ट मैसेज, ई-मेल और व्हाट्सएप संदेशों के माध्यम से लोगों के मोबाइल पर एक लिंक भेज रहे हैं. इन मैसेज में यह दावा किया जाता है कि आरबीआइ की तरफ से कोई योजना या अनुदान राशि दी जा रही है, जिसे पाने के लिए उस लिंक पर क्लिक करना जरूरी है. जैसे ही लोग उस लिंक पर क्लिक करते हैं, तो उनके मोबाइल या कंप्यूटर की संवेदनशील जानकारियां साइबर अपराधियों के पास पहुंच जाती हैं. इसके बाद उनके बैंक खाते से अवैध तरीके से रुपये निकाल लिये जाते हैं. वाट्सएप पर आरबीआइ का लोगो लगा हुआ ऐसा ही एक मैसेज देवघर के एक युवक को आया है, जिसमें बिजनेस एकाउंट लिखा हुआ है. उक्त युवक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर यह जानकारी दी. देवघर साइबर थाना में भी इस तरह की कई शिकायतें हाल के दिनों में प्राप्त हुई हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी हर बार कोई नया तरीका निकाल लेते हैं. इस बार उन्होंने आरबीआइ के नाम का सहारा लिया है, जिससे लोगों को जल्द विश्वास हो जाता है. कुछ मामलों में तो ठगों ने मैसेज में आरबीआइ का लोगो और सरकारी भाषा का भी प्रयोग किया है ताकि मैसेज असली लगे.

सतर्क रहें लोग, आरबीआइ या बैंक नहीं भेजता कोई लिंक

साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि आम जनता को सतर्क रहने की जरूरत है. आरबीआइ या कोई भी बैंक किसी योजना के लिए लिंक नहीं भेजती, न ही ई-मेल या व्हाट्सएप पर व्यक्तिगत जानकारी मांगती है. अगर किसी को ऐसा कोई संदिग्ध लिंक या मैसेज मिलता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नजदीकी साइबर थाना में इसकी शिकायत दर्ज करायें. साइबर विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि मोबाइल में एंटीवायरस एप रखें. अंजान नंबर से आये किसी भी लिंक पर क्लिक नहीं करें और किसी भी योजना की जानकारी केवल सरकारी वेबसाइट से ही लें.

हाइलाइट्स

-आरबीआइ के नाम पर भेजे जा रहे हैं फर्जी मैसेज और लिंक

-लिंक पर क्लिक करते ही बैंक खातों से हो रही है अवैध निकासी

-आरबीआइ कभी भी योजना संबंधी ई-मेल या व्हाट्सएप लिंक नहीं भेजता

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ASHISH KUNDAN

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By ASHISH KUNDAN

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