मधुपुर. शहर के भेड़वा नवाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में विद्रोही कवि धूमिल व प्रख्यात शायर इकबाल जयंती पर याद किया गया. दोनों विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया गया. मौके पर धनंजय प्रसाद ने कहा कि सुदामा पांडेय धूमिल एक विद्रोही कवि थे व हिन्दी साहित्य जगत में यंग एंग्री मैन के नाम से विख्यात थे. धूमिल हिन्दी के समकालीन कविता के मील के पत्थर थे. उनकी कविता में आजादी के सपनों का मोहभंग होने की पीड़ा व आक्रोश की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति मिलती है. व्यवस्था जिसने जनता को छला है, उसको आईना दिखाना मानो धूमिल की कविताओं के लिए परम लक्ष्य है. वे हिन्दी साहित्य के अनमोल रत्न थे और आज सबसे ज्यादा प्रासंगिक है. अल्लामा इकबाल विश्व विख्यात शायर थे और उर्दू के प्रमुख शायरों में से एक थे. सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा की रचना उन्होंने ही की थी. उनकी जयंती को उर्दू दिवस के रूप में मनाया जाता है.
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