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देवघर : नशे में ड्राइविंग व साइलेंसर से फायरिंग की आवाज निकालने वाले बाइकर्स की खैर नहीं

Updated at : 01 Jan 2024 9:48 AM (IST)
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देवघर : नशे में ड्राइविंग व साइलेंसर से फायरिंग की आवाज निकालने वाले बाइकर्स की खैर नहीं

पुलिस डेसिबल मीटर लेकर भी घूम रही है. साउंड तय मानक से अधिक पाया गया, तो ध्वनि प्रदूषण, यातायात नियम का उल्लंघन सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कार्रवाई की जायेगी. डेसिबल मीटर साइलेंसर के पास ले जाकर साउंड माप की जाती है.

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देवघर में नये साल के जश्न के दौरान नशे में बाइक चलाने वालों व साइलेंसर से फायरिंग की आवाज निकालने वालों की खैर नहीं है. 31 दिसंबर शाम से ही पुलिस शहर के विभिन्न चौक-चोराहों पर डेसिबल मीटर व ब्रेथ एनालाइजर के साथ घूम रही है. कई वाहनों की साइलेंसर साउंड की पुलिस ने डेसिबल मीटर से जांच भी की. वहीं ड्रंक एंड ड्राइव को लेकर चालकों की जांच भी पुलिस ब्रेथ एनालाइजर से करती दिखी. इसे लेकर यातायात सह सीसीआर डीएसपी आलोक रंजन ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए इस बार देवघर ट्रैफिक पुलिस सभी पिकनिक स्पॉट समेत सेलिब्रेशन एरिया में ड्रंक एंड ड्राइव के खिलाफ अभियान एक जनवरी को भी चलायेगी. साथ ही अगर बाइक में कोई मॉडिफाई साइलेंसर लगवा रखे हैं, तो वे खोलवा लें, अन्यथा पुलिस कार्रवाई करेगी.

नये साल को लेकर डेसिबल मीटर व ब्रेथ एनालाइजर के साथ पुलिस कर रही जांच

इसके लिए पुलिस डेसिबल मीटर लेकर भी घूम रही है. साउंड तय मानक से अधिक पाया गया, तो ध्वनि प्रदूषण, यातायात नियम का उल्लंघन सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कार्रवाई की जायेगी. डेसिबल मीटर साइलेंसर के पास ले जाकर साउंड माप की जाती है. जांच के दौरान उससे प्रिंट निकलेगा, जो यह बतायेगा कि गाडी का साउंड मापदंड के अनुरूप है या नहीं. इसी आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने कहा कि हर वर्ष नववर्ष सेलिब्रेशन कर लौटने में लोग सड़क दुर्घटना के शिकार होते हैं. इसके पीछे सबसे प्रमुख वजह ड्रंक एंड ड्राइव है. शहरी क्षेत्र में भी ड्रंक एंड ड्राइव को लेकर विशेष अभियान जारी रहेगा. जांच में नशे में वाहन चलाते पकड़े जाने पर अर्थदंड तो वसूला ही जायेगा. साथ ही ऐसे लोगों के खिलाफ एफआइआर भी दर्ज हो सकता है और उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है.

क्या है डेसीबल मीटर

डेसिबल मीटर ध्वनि को पकड़ने वाला एक डिवाइस है. इस मशीन में लगे माइक्रोफोन की मदद से ध्वनि का मूल्यांकन किया जाता है. 80 डेसिबल से अधिक आवाज को खतरनाक माना गया है. इससे ऊपर की आवाज को ध्वनि प्रदूषण माना जाता है.

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