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बांग्ला सावन में बाबाधाम का अद्भुत नजारा, कांवरिया पथ से आईं दिल छू लेने वाली तस्वीरें

Updated at : 25 Jul 2023 10:46 AM (IST)
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बांग्ला सावन में बाबाधाम का अद्भुत नजारा, कांवरिया पथ से आईं दिल छू लेने वाली तस्वीरें

बांग्ला सावन और मलमास की पहली सोमवारी पर बाबाधाम का अद्भुत नजारा देखने को मिला. इस दौरान कांवरिया पथ से भी अलग-अलग तस्वीरें आईं, जो दिल छू लेने वाली हैं. इधर बाबाधाम की ओर लगातार कांवरियों के बढ़ते कदम, भगवा रंग से पटा कांवरियां पथ और आस्था में डुबे भक्त पूरे माहौल को भक्तिमय बना रहे थे.

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बांग्ला श्रावण और पुरुषोत्तम मास में भी बाबा बैद्यनाथ पर जलाभिषेक के लिए कांवरियों के आने का सिलसिला जारी है. बांग्ला सावन के पहले दिन और मलमास की पहली सोमवारी को बाबाधाम आने वाले भक्तों का तांता लगा रहा. अहले सुबह बाबा मंदिर का पट खुलने से पहले ही श्रद्धालुओं की कतार लगभग चार किमी तक पहुंच चुकी थी. जलार्पण के पट खुलते ही दो-तीन घंटे में ही कांवरियों की कतार बाबा मंदिर से दो किमी दूर जलसार चिल्ड्रेन पार्क तक सिमट गयी. वहीं, दोपहर दो बजे से आये भक्तों को मानसरोवर से ही मंदिर भेजने की व्यवस्था प्रारंभ कर दी गई. सोमवारी को बांग्ला श्रावण में आने वाले बंगाल, नेपाल, ओडिशा के भक्तों के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान से कांवरिये पहुंचे थे. कांवरिये सोमवारी के अवसर पर जलार्पण करने की चाहत लेकर रविवार की रात से ही कतारबद्ध होने लगे थे.

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सरदार पंडा ने की पहली पूजा

सोमवारी के अवसर पर बाबा मंदिर का पट सुबह 03:10 बजे खुला. इसके पहले मां काली के मंदिर में पूजा की गयी. उसके बाद बाबा मंदिर के गर्भ गृह में सबसे पहले सरदार पंडा श्रीश्री गुलाब नंद ओझा ने बाबा को कांचा जल अर्पित कर पूजा प्रारंभ की. करीब 15 मिनट तक इस खास पूजा में तीर्थ पुरोहित समाज के लोग शामिल हुए. इसके बाद सरदार पंडा ने बाबा भोले नाथ की दैनिक षोडशोपचार विधि से सरदारी पूजा संपन्न की. सरदारी पूजा होने के बाद सुबह चार बजे अरघा के माध्यम से आम भक्तों के लिए जलार्पण प्रारंभ कराया.

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बाह्य अरघा में भी रही भीड़

भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बाह्य अरघा भी काफी कारगर साबित हो रहा था. लंबी कतार से बचने के लिए इस व्यवस्था के तहत भी भारी संख्या में कांवरिये जलार्पण करते देखे गये.

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कांवरियों को झुमाने ढोल बजाते पहुंचे 60 वर्षीय बुजुर्ग, कांवरियों के नहीं आने से हुए मायूस

मलमास की पहली सोमवारी पर बरमसिया चौक के पास सुबह का करीब आठ बजे भी कांवरियों की भीड़ कतार में नहीं पहुंची थी. रविवार की रात से ही स्थानीय लोगों के अलावा दुकानदार, पुलिस के जवान भी कांवरियों के कतार में पहुंचने का इंतजार में थे. लेकिन, सोमवार को पौ फटने के बाद भी रूटलाइन खाली-खाली रही. इस दौरान बरमसिया चौक पर कांधे पर भारी भरकम ढोल लिये, पैरों में घुंघरू, माथे पर कौड़ी-सीप, चवन्नी की पट्टी लगाये 60 वर्षीय बालेश्वर पुजहर ढोल पर थाप दिये पहुंचते हैं. उनके ढोल बजाते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है. पैरों में घुंघरू डाले बालेश्वर ढोल बजाते हुए पुलिस के जवानों के साथ लोगों का मनोरंजन भी करते हैं. लेकिन, कांवरियों की कतार सिंघवा होते हुए चमारीडीह से कुमैठा तक पहुंचने का इंतजार है. अपनी इसी कला की बदौलत उन्हें पैसे मिलते हैं, जिससे घर परिवार चलता है. उम्मीद के अनुरूप कांवरियों के नहीं आने से वे काफी मायूस दिखे. इसके बाद मलमास की पहली सोमवारी को सिंघवा से निकल कर नंदन पहाड़, बरमसिया पहुंचे. यहां भी कांवरियों की कतार नहीं दिखी. इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और स्थानीय लोगों व ड्यूटी पर जमे पुलिस के जवानों को ढोल की थाप पर खूब झुमाया.

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सिंघवा से निकल कर बरमसिया तक भी नहीं मिले कांवरिये

इस दौरान एक चाय वाले घनश्याम ने उन्हें चाय भी पिलायी. इसके बाद बालेश्वर ने बताया कि पिछले दो दशक से ज्यादा समय से श्रावणी मेला के दाैरान सिंघवा व आसपास कतारबद्ध कांवरियों व बाबा के भक्तों को ढोलक के धुन पर उन्हें झुमाते व नचाते आ रहे हैं. पहले प्रत्येक सोमवारी को पांच से सात हजार रुपये की कमाई हो जाती थी. लेकिन, इस बार सिंघवा से निकल कर बरमसिया तक भी कांवरिये नहीं मिले. अब तो लगता है बाबा मंदिर तक ही जाना पड़ेगा. उन्होंने बताया कि कमाई नहीं होने से आज मेरे व परिवार के समक्ष जीविकोपार्जन का बड़ा खतरा है. सरकारी योजना का भी लाभ नहीं मिलता है. इतनी महंगाई में खुद व परिवार का पेट भरना किसी चुनौती से कम नहीं है. प्रशासन उनकी गरीबी पर ध्यान दे, जिससे हमारा परिवार भी दो वक्त का भोजन कर सके.

बाबा मंदिर में लगी बेलपत्र प्रदर्शनी

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में चली आ रही परंपरा के अनुसार बंगला श्रावण प्रारंभ होने के साथ बिल्व प्रदर्शनी भी शुरू हो गयी है. पहली प्रदर्शनी कर्क संक्रांति के अवसर पर सोमवार को ही लगायी गयी थी. बिल्व पत्र प्रदर्शनी व बाबा पर बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा 150 वर्षों से भी अधिक समय से चली आ रही है. सोमवार को काली मंदिर में जरनेल समाज व देवकृपा वन सम्राट बेलपत्र समाज, तारा मंदिर में बरनेल समाज, लक्ष्मी नारायण मंदिर में मसानी दल एक व मसानी दल दो एवं शांति अखाड़ा समाज, राम मंदिर में राजाराम बेलपत्र समाज, आनंद भैरव मंदिर में पंडित मनोकामना राधे श्याम बेलपत्र समाज के दो दल द्वारा आकर्षक एवं बाबा की त्रिनेत्र के समान अनोखे पहाड़ी बिल पत्र की प्रदर्शनी लगायी गयी. शाम में सभी दलों ने अपने बिल्व पत्र को चांदी के बर्तनों पर सजाकर शहर भ्रमण कराया. इसके बाद अपनी गद्दी पर ले जाकर प्रदर्शनी लगायी.

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कांवरिया पथ से आईं अलग-अलग तस्वीरें

मलमास की पहली सोमवारी पर बाबाधाम और कांवरिया पथ से भी अलग-अलग तस्वीरें आईं, जो दिल छू लेने वाली हैं. कहीं पुलिस पदाधिकारी कांवरियों को संभालते दिखे, तो कहीं दिव्यांगों काे जलार्पण में मदद कराते. रेडक्रॉस साेसाइटी भी कांवरियों की सेवा करते दिखे. इधर बाबाधाम की ओर लगातार कांवरियों के बढ़ते कदम, भगवा रंग से पटा कांवरियां पथ और आस्था में डुबे भक्त पूरे माहौल को भक्तिमय बना रहे थे.

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कांवरियों की कतार को संभालते दिखे पुलिस पदाधिकारी

बांगला सावन व मलमास की पहली सोमवारी पर जलार्पण के लिए कांवरियों की कतार रूटलाइन में बीएड कॉलेज स्पाइरल से होते हुए तिवारी चौक व शिवराम झा होते हुए आगे बढ़ रही थी. मंदिर का पट खुलने के बाद एसपी सुभाष चंद्र जाट की अगुवाई में क्यूआरटी ने कांवरियों की सुविधा के लिए सुबह करीब पांच बजे जलसार से हदहदिया पुल जाने वाली कतार को हनुमान टिकरी चौक से शिवराम झा चौक की तरफ मोड़ दिया. इससे शिवभक्तों ने राहत महसूस की. वहीं, बीएड कॉलेज में सीसीआर डीएसपी आलोक रंजन के साथ क्यूआरटी, तिवारी चौक पर मुख्यालय डीएसपी मंगल सिंह जामुदा व हनुमान टिकरी पर कुछ अन्य पदाधिकारियों के साथ भारी संख्या में क्यूआरटी के जवान मौजूद थे.

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बुजुर्ग महिला श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ी

सुबह करीब पांच बजे कतार में लगी समस्तीपुर की रहने वाली 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला शीला देवी की हालत बिगड़ गयी. उन्हें चलने में हो रही दिक्कत को देखते हुए अन्य दो बुजुर्ग महिला कांवरिये इंदू देवी व शांति देवी सहारा देते हुए कतार में आगे बढ़ाती रहीं. पुलिसकर्मियों ने उन्हें पानी दी.

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दिव्यांगों काे जलार्पण में मदद कर रहे बाबा मंदिर ओपी प्रभारी

बाबा पर जलार्पण के लिए आने वाले दिव्यांग श्रद्धालुओं की सहायता के लिए बाबा मंदिर के ओपी प्रभारी रामानुज मिश्र जुटे रहते हैं. मंदिर आने वाले किसी भी दिव्यांग श्रद्धालु पर नजर पड़ते ही वे खुद आगे आकर उन्हें उठाकर बाह्य अरघा से जलार्पण में सहयोग करने लगते हैं. वह इन श्रद्धालुओं को आवासन तक पहुंचाने में सहायता कर रहे हैं. ओपी प्रभारी का कहना है कि पुलिस का पहला मोटो सेवा ही परम धर्म एवं परम लक्ष्य का उद्देश्य शामिल है.

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रेडक्रॉस साेसाइटी ने की कांवरियों की सेवा

बाबा बैद्यनाथ पर पर जलार्पण के लिए आये श्रद्धालुओं की सेवा में इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी के सदस्य भी जुटे रहे. देर रात से ही सोसाइटी के सदस्यों ने नेहरू पार्क, क्यू कॉम्प्लेक्स के पास अपनी सेवाएं दीं. मौके पर सेवा शिविर की समन्वयक संगीता सुल्तानिया, सोसाइटी के चेयरमैन जितेश राजपाल, वाइस चेयरमैन पीयूष जायसवाल, कार्यकारिणी सदस्य मयंक राय, महेश कुमार, सुधांशु शेखर बरनवाल, विजय प्रताप सनातन, उमा छावछरिया, बबलू साह, संजीव झा, करण, राहुल, स्नेहा, रिया, मोहिनी समेत अन्य थे.

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मौन पद यात्रा कर रहे यूपी बलिया के मौनी कांवरिया अखिलेश

यूपी के बलिया जनपद के रहने वाले मौनी भक्त अखिलेश कुमार सिंह ने 2022 से 12 वर्षों के लिए बलिया से बाबा बैद्यनाथ व बाबा बासुकिनाथ मंदिर तक की यात्रा का संकल्प लिया है. इस बीच वे अन्न व फल ग्रहण नहीं करते हैं. अखिलेश ने कागज पर लिख कर अपनी यात्रा का वृत्तांत साझा किया है. श्रावणी माह के पहले दिन से बलिया स्थित महर्षि ऋषि श्रीभुगुमुनि मंदिर से यात्रा शुरू कर मांझी, छपरा, हाजीपुर, पटना, बख्तियारपुर, बाढ़, मोकामा, लखीसराय, मुंगेर के रास्ते सुल्तानगंज स्थित अजगैबीनाथ मंदिर तक पहुंचते हैं. गंगा घाट से जल भर कर कांवरिया पथ होते हुए बाबा बैद्यनाथधाम के मंदिर, फिर बाबा बासुकिनाथ मंदिर में जलार्पण करेंगे. इस बीच वे अन्न व फल का ग्रहण नहीं करते. देवघर से बासुकिनाथधाम के लिए वे रवाना हो गये हैं. वहां जलार्पण के बाद वे अपने घर को लौट जायेंगे, जहां उनकी मौन यात्रा पूरी हो जायेगी.

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स्वास्थ्य अधिकारी मेला क्षेत्र में करते रहे मॉनिटरिंग

बांग्ला सावन की पहली सोमवारी पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी से लेकर डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी पूरी तरह अलर्ट दिखे. इस दौरान अधिकारी श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मुहैया कराने की मॉनिटरिंग करते रहे. विभाग की ओर से श्रावणी मेला को लेकर मेला क्षेत्र में 32 स्थायी व अस्थायी स्वास्थ्य शिविरों का संचालन किया जा रहा है. इन शिविरों में डाॅक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों के साथ दवा, स्लाइन, बेड, ऑक्सीजन सहित अन्य व्यवस्था की गयी है. मौके पर डिप्टी डायरेक्टर डॉ सीपी चौधरी, सीएस डॉ युगल किशोर चौधरी, मेला प्रभारी डॉ सिंह आलोक कुमार, डॉ मनीष समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे.

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सोमवारी को शिव मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु

बांग्ला सावन माह की पहली सोमवारी पर शहर के कई शिवालयों में भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए शिव भक्तों की भीड़ उमड़ी. सोमवार की अहले सुबह से ही शिव मंदिरों में भक्तों की कतार लगी थी. इनमें सबसे अधिक किशोरी व महिलाएं शामिल थीं. सभी भक्तों ने विभिन्न शिव मंदिरों में शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की और अपनी मन्नतें मांगीं. नंदन पहाड़ सहित पुरनदहा, पलंगा पहाड़ी, धर्मपुर, आरोग्य भवन सहित अन्य जगहों पर स्थित शिव मंदिरों में भक्तों ने शिवलिंग पर जलार्पण कर मंगलकामना की.

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बेलाबगान दुर्गा बाड़ी में पूजा करने वालों का लगा तांता

पुरुषोत्तम मास के पहले सोमवार को बेलाबागान दुर्गा बाड़ी में पूजा करने आये भक्तों की सुबह से ही भीड़ लगी रही. मंदिर में समिति व भक्तों के द्वारा सुबह रुद्राभिषेक किया गया. इसके बाद आम लोगों ने पूजा की. भीड़ प्रबंधन के लिए बालक संघ के देबू रजक, प्रशांत सिंह, चुन्नू झा, कुंदन झा, रामानंद शर्मा, शिवजी सिंह, उदय सिंह, सुबह से ही व्यवस्था को संभालने में लगे थे. संध्या काल में बाबा की भव्य शृंगार आरती की गयी.

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