17 किमी तक पूरी तरह सूख गयी अजय नदी, हरियाली गायब
संताल : परगना की नदियां यहां की लाइफ लाइन है. यहां के लोगों की संस्कृति, परंपरा व कई मान्यताओं से जुड़ी हैं. इनसे लोगों का दाना-पानी चलता है. क्योंकि इस इलाके के खेतों को पानी इन्हीं नदियों से मिलता है. शहर से लेकर गांव तक के लोगों की प्यास भी यही बुझाती हैं. वर्तमान स्थिति […]
संताल : परगना की नदियां यहां की लाइफ लाइन है. यहां के लोगों की संस्कृति, परंपरा व कई मान्यताओं से जुड़ी हैं. इनसे लोगों का दाना-पानी चलता है. क्योंकि इस इलाके के खेतों को पानी इन्हीं नदियों से मिलता है. शहर से लेकर गांव तक के लोगों की प्यास भी यही बुझाती हैं. वर्तमान स्थिति को देखें तो नदियां अपना अस्तित्व बचाने को जद्दोजहद कर रही हैं. इनके गर्भ में पानी रखने की क्षमता है. यह क्षमता नदियों को बालू से मिलती है.
प्राय: सभी नदियों से बालू युद्ध स्तर पर निकाला जा रहा है. इस कारण साल दर साल संताल की नदियों का जलस्तर नीचे जा रहा है. नदियों के संरक्षण की दिशा में कोई काम नहीं हो रहा है, उल्टे इनका दोहन हो रहा है. जानकारों के अनुसार नदियों का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो जायेगी. किसानों के खेतों को पानी तो दूर, लोगों को पीने का पानी तक नसीब नहीं होगा. प्रभात खबर ने संताल की नदियों की स्थिति की पड़ताल शुरू की है. पहली कड़ी में प्रस्तुत है देवघर में बहने वाली ‘अजय नदी’ पर
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