सुरक्षित नहीं त्रिकुट की चोटी न रेलिंग न घेरेबंदी, थोड़ी सी चूक ले सकती है जानत्रिकूट में नहीं है सुरक्षा बंदोबस्त-3संवाददाता, देवघरत्रिकुट पहाड़ पर रोप-वे को लगाये वर्षों हो गये. रोप-वे से सरकार को हर साल लाखों की आमदनी भी हो रही है. किंतु उक्त पर्यटक स्थल को विकसित व सुरक्षित करने के लिए सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है. स्थिति यह है कि त्रिकुट चोटी पर स्थित पर्यटक, सैलानी घूमने के उद्देश्य से जाते हैं. मशक्कत कर वे सभी शालीग्राम पत्थर पर चढ़ते हैं तो रावण गुफा के अंदर जाते हैं. चोटी पर स्थित चिकने पत्थरों पर पहुंच कर फोटो भी खिंचाते हैं, किंतु इन स्थलों पर पर्यटन विभाग द्वारा सुरक्षा के कोई बंदोबस्त नहीं हैं. कहीं भी न तो रेलिंग है और न ही घेरेबंदी करायी गयी है. वहीं इन स्थलों पर घूमने जाने वाले लोग पहुंच कर फोटो खिंचाते हैं. इस दौरान त्रिकुट चोटी पर इन लोगों को रोकने के लिए कोई नहीं रहता है. अगर उन चिकने पत्थरों में किसी सैलानी व पर्यटकों का पैर फिसल जाये तो जान जाने के सिवा कुछ अता-पता भी नहीं चलेगा. शालीग्राम पत्थर पर तो लोग किसी तरह चढ़ जाते हैं किंतु उतरने में छलांग लगानी पड़ती है. इसी प्रकार रावण गुफा के पास रोशनी की भी व्यवस्था नहीं है, वहां लोग अंधेरे में अंदर जाते हैं. सुसाइड प्वाइंट की होती है चर्चा त्रिकुट पर मौजूद गाइड, कैमरामैन व दुकानदारों ने बताया कि चोटी के किनारे में एक पत्थर ऐसा है कि उसके आगे खाई ही खाई है. उसे लोग सुसाइड प्वाइंट कह कर चिह्नित कर रखे हैं. वहां एक लाल झंडा भी लगा कर रखा गया है. बावजूद उक्त स्थल पर सैलानी-पर्यटक जाना नहीं छोड़ते हैं. उस जगह कि स्थिति ऐसी है कि थोड़ा सा पैर फिसला तो कहां पहुंचेंगे कि उसका पता भी नहीं चल सकेगा.नहीं बना पैदल पथ, न हुई रोशनी की व्यवस्था अगर समय से रोप-वे बंद हो जाय और लोग अगर त्रिकूट चोटी पर छूट जाएं तो उन्हें रात भर वहीं रहने के सिवा दूसरा कोई रास्ता नहीं है. रोप-वे के ऊपर चोटी पर से उतरने का पैदल पथ तो है किंतु उसे अच्छी तरह से बनाया नहीं गया है. अनजान लोग उस होकर आयेंगे तो ऊपर में ही घूमते रह जाने के सिवा दूसरा कोई रास्ता नहीं है. उसी तरह त्रिकुट चोटी समेत पैदल पथ में लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है. क्या करना चाहिये पर्यटन विभाग कोपर्यटन विभाग को पैदल रास्ते समेत चोटी पर लाइट की व्यवस्था जरुर करनी चाहिये. अगर चोटी तक बिजली नहीं पहुंचे तो सोलर लाइट भी लगाया जा सकता है. वहीं घूमने वाले जगहों पर गार्डवाल व रैलिंग आदि भी बनाना चाहिये. ………………………त्रिकुट के ऊपर जंगल का एरिया है. उसे विकसित करने के लिए पूर्व में पत्र लिखा गया था. पुन: पत्राचार करेंगे व संयुक्त रुप से त्रिकुट चोटी को विकसित करने का प्रस्ताव देंगे.सुनील कुमार, एमडी टूरिज्म झारखंड
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Prabhat Khabar Digital Desk
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