लेकिन विभाग की अंदरुनी जांच में यह गड़बड़ी पकड़ में आ गयी. मार्च में कैबिनेट सचिव व महालेखाकार द्वारा पत्र के माध्यम से सभी जिलों को यह आदेश दिया गया था कि वित्तीय वर्ष 2014-15 में विधायक फंड की शेष बची हुई राशि वित्तीय वर्ष 2015-16 में हस्तांतरित कर दिया जाये, ताकि इस राशि को नये विधायकों की अनुशंसा पर खर्च की जायेगी.
कैबिनेट सचिव द्वारा जारी पत्र के अनुसार पिछले वर्ष विधायक फंड की जो योजनाएं 45 दिनों के अंदर चालू नहीं हुई है उसे रद्द करते हुए उक्त योजनाओं की राशि अप्रैल माह में नये विधायकों की अनुशंसा पर खर्च की जायेगी, लेकिन देवघर में एनआरइपी के अभियंताओं ने सारठ में लगभग 65 लाख व देवघर में लगभग सात लाख रुपये की उन योजनाओं को कागज पर पूर्ण दिखा दिया जिसे धरातल पर कभी उतारा ही नहीं गया. यह योजनाएं वित्तीय वर्ष 2014-15 में तत्कालीन विधायकों की अनुशंसा पर स्वीकृत तो जरूर हुई थी, लेकिन विभाग द्वारा योजनाओं पर काम चालू नहीं किया गया था. इधर कैबिनेट सचिव के नये पत्र आने के बाद विभाग के अभियंताओं ने किस इरादे से कागज पर ही अपूर्ण योजनाओं को पूर्ण दिखा दिया था यह सवाल उठा रहा है.

